लैंडलाइन फोन पर मंडरा रहा खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Dec 2015 8:20 AM (IST)
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डेहरी ऑन सोन : शहर में लैंड लाइन फोन की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होने से उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. लैंड लाइन फोन की घंटी सुनने को लोग तरसने लगे हैं. एक तरफ जहां टेलीफोन के उपभोक्ताओं की संख्या कम हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आज भी कई उपभोक्ता सुविधा लेने के […]
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डेहरी ऑन सोन : शहर में लैंड लाइन फोन की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होने से उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. लैंड लाइन फोन की घंटी सुनने को लोग तरसने लगे हैं. एक तरफ जहां टेलीफोन के उपभोक्ताओं की संख्या कम हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आज भी कई उपभोक्ता सुविधा लेने के लिए बेताब हैं. कई उपभोक्ताओं ने आवेदन भी दिये हैं. लेकिन, विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें रटा-रटाया जवाब मिलता है कि अभी डिपी में जगह नहीं है.
नया केबल डालने के बाद जगह बनेगा, तो आप को कनेक्शन दिया जायेगा. केबल कब तक डलेगा व कनेक्शन कब मिलेगा यह बताने को कोई नहीं है. कभी आवश्यक सुविधा माने जाने वाले लैंड लाइन फोन के लिए शहर की स्थिति को देखते हुए चार हजार लाइन की क्षमता वाले एक्सचेंज की स्थापना मथूरी पुल के पास सोन कैनाल पर किया गया था. उक्त एक्सचेंज के निर्माण से पहले रोहतास उद्योग समूह डालमियानगर के परिसर में कम क्षमता का टेलीफोन एक्सचेंज हुआ करता था. अपने चरम पर रहे टेली कम्यूनिकेशन विभाग के उस समय में यहां चार हजार लाइन के एक्सचेंज के निर्माण से शहर ही नहीं, आसपास के प्रखंडों के लोगों में भी काफी खुशी थी.
लोग यह सोचने लगे थे कि अब लैंड लाइन फोन के दिन सुधारने वाला हैं, लेकिन दिन सुधरने की जगह दुर्दिन में तब्दील हो जायेगा, किसी ने कल्पना में भी नहीं की. चार हजार की क्षमता वाले एक्सचेंज में पहले दो हजार कनेक्शन की सुविधा शुरू की गयी. प्रतिदिन टेलीफोन डेड रहने व केबल कटने आदि की समस्या से आजिज आ कर एक-एक कर उपभोक्ता अपना कनेक्शन कटवाते चले गये. आज करीब सात सौ उपभोक्ता ही बच गये है. ऐसा सूत्र बताते हैं. लोगों का कहना है कि उसमें भी करीब आधे फोन महीनों से या तो डेड पड़े हैं या कभी-कभी ही डायल टोन नसीब होता है.
मुहल्लों को जोड़नेवाला केबल क्षतिग्रस्त : शहर के डालयिमानगर, स्टेशन रोड, पाली पुल, थाना चौक, कोल डिपो, अनुमंडल कार्यालय रोड, नगर पर्षद रोड, जक्खी बिगहा व न्यू एरिया आदि मुहल्लों को जोड़ने वाला अधिकतर केबल क्षतिग्रस्त है. इस कारण उस इलाके का फोन या तो ठप है या वहां कोई नया कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है. विभागीय अधिकारी यह रोना रोते हैं कि सड़क व नाला निर्माण के दौरान केबल कट गया है.
इससे यह समस्या आयी है. पिछले कई वर्षों से शहर में कोई केबल क्यों नहीं डाला गया. गड्ढे खोदने की जगह नयी विधि से केबल क्यों नहीं डाले जा रहे हैं. इस बात पर कोई विभागीय अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज करते हैं. अधिकारियों द्वारा एक ही रट-रटाया जवाब यह भी दिया जाता है कि शहर के करीब-करीब सभी सड़कें अब पीसीसी हो गयी हैं.
इसके कारण केबल डालने में कठिनाई आ रही है. इस बात को कहने के पहले वे शायद इस बात को भूल जाते हैं कि अब नयी तकनीक से बिना सड़क की खुदाई किये कहीं भी केबल डाला जा सकता है. भारत संचार निगम के अधिकारियों की लापरवाही से कहीं शहर में लैंड लाइन फोन इतिहास बन कर न रह जाये. यह सोच कर इससे सहानुभूति रखने वाले लोगों का मन भर जाता है. मोबाइल फोन के इस युग में आज भी लैंड लाइन फोन को चाहने वाले उपभोक्ताओं की कमी नहीं है. कमी है तो सिर्फ उसकी सेवा को चुस्त-दुरुस्त करने की व अधिक-से-अधिक उपभोक्ताओं के पास उसे पहुंचाने की व्यवस्था करने की.
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