न मिल रहा सिलिंडर, न ही सब्सिडी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Mar 2015 9:05 AM (IST)
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डीबीटीएल की आड़ में एजेंसियां व वेंडर कर रहे मनमानी सासाराम (सदर): उपभोक्ताओं तक समय पर रसोई गैस सिलिंडर पहुंचाने व इसकी कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं. सरकार ने रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी के रुपये को सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजने का प्रावधान […]
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डीबीटीएल की आड़ में एजेंसियां व वेंडर कर रहे मनमानी
सासाराम (सदर): उपभोक्ताओं तक समय पर रसोई गैस सिलिंडर पहुंचाने व इसकी कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं. सरकार ने रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी के रुपये को सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजने का प्रावधान किया है.
लेकिन, गैस एजेंसियों की मनमानी से जिले में सरकार की यह योजना पूरी तरह सफल होती नहीं दिख रही है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन व मैन्युअल नंबर लगाने के बाद भी समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिलता है. गैस सब्सिडी के लिए फॉर्म करने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.
खाते तक नहीं पहुंच रही सब्सिडी की राशि : गैस वितरण प्रणाली में सुधार करने के लिए रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी के रुपये को सीधे उपभोक्ताओं के बैंकखाते में जमा करने का केंद्र सरकार का दावा फेल होता जा रहा है. गैस सिलिंडर मिलने के महीनों बाद भी उपभोक्ताओं के बैंकखाते में सब्सिडी के रुपये नहीं भेजे जा रहे हैं.
उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस सब्सिडी का लाभ लेने के लिए सभी जरूरी कागजात के साथ फॉर्म भर कर एजेंसी में जमा किये हैं. लेकिन, उनके खाते में गैस सब्सिडी का पैसा नहीं पहुंच रहा है. इसकी शिकायत करने पर एजेंसी द्वारा पुन: फॉर्म जमा करने को कहा जाता है. लेकिन, फॉर्म रद्द होने के कारणों को नहीं बताया जाता है. उधर, कई उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस सब्सिडी के रुपये एक बार तो बैंक खाते में चला जा रहा है, लेकिन दूसरी बार नहीं जा रहा है. गैस एजेंसी जाने पर पता चलता है कि उनका बैंक खाता नंबर की हटा दिया गया है. लेकिन, बैंक खाता नंबर क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को नहीं दी जाती है.
वेंडर कर रहे मनमानी : उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर लेने के लिए एक तरह ही तरह परेशानी से नहीं जूझना पड़ रहा है. पहले एजेंसी, इसके बाद वेडरों की मनमानी से लोग परेशान हैं.
एजेंसी द्वारा गैस सिलिंडर बांटने के लिए रसीद काट कर वेंडरों को दिया जाता है. लेकिन, वेंडर 10 से 15 दिन बाद संबंधित उपभोक्ता के पास गैस पहुंचा रहे हैं. साथ ही, वेंडर रसीद पर लिखे गैस की वास्तविक कीमत से अधिक रुपये ले रहे हैं. इसको लेकर कई उपभोक्ताओं एवं वेडरों आये दिनकहासुनी भी हो जाती है. रसीद के मुताबिक गैस सिलिंडर के लिए 722.50 रुपये लेने हैं, लेकिन वेंडर 800 रुपये की मांगते हैं. कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि अधिक पैसे नहीं देने पर वेंडर उन्हें गैस नहीं देकर, बाजार में अधिक मूल्य पर बेच देते हैं.
मनमाना रवैया अपना रहे हैं वेंडर
उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर लेने के लिए एक तरह ही तरह परेशानी से नहीं जूझना पड़ रहा है. पहले एजेंसी, इसके बाद वेडरों की मनमानी से लोग परेशान हैं. डेहरी सीडीसीएम एजेंसी के उपभोक्ता कलक्टर शर्मा (कंज्यूमर नंबर 26807) व एआरएन गैस एजेंसी के उपभोक्ता एसके पांडेय (कंज्यूमर नंबर 9464913) व एन हसन (कंज्यूमर नंबर सीएक्स 19223) की मानें, तो एजेंसी तो मनमानी कर ही रही है. गैस पहुंचाने वाले वेंडर भी मनमाना रवैया अपना रहे हैं.
एजेंसी द्वारा गैस सिलिंडर बांटने के लिए रसीद काट कर वेंडरों को दिया जाता है. लेकिन, वेंडर 10 से 15 दिन बाद गैस पहुंचा रहे हैं. साथ ही, वेंडर रसीद पर लिखे गैस की वास्तविक कीमत से अधिक रुपये ले रहे हैं. इसको लेकर कई उपभोक्ताओं एवं वेडरों आये दिनकहासुनी भी हो जाती है. डेहरी सीडीसीएम कंपनी के उपभोक्ता रामायण पांडेय (कंज्यूमर नंबर 13752) ने कहा कि रसीद के मुताबिक, गैस सिलिंडर के लिए 722.50 रुपये लेने हैं, लेकिन वेंडर 800 रुपये की मांगते हैं.
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