असम चुनाव 2026: चाय जनजातियों का 'ST दर्जा' कार्ड, क्या असम फतह कर पाएंगे JMM के 16 सूरमा?
Published by : Sameer Oraon Updated At : 04 May 2026 10:27 AM
असम विधानसभा चुनाव 2026 में झामुमो
Assam Election Results 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच JMM की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. क्या झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 'एकला चलो रे' का फैसला और चाय बागान श्रमिकों का मुद्दा असम में बदलाव लाएगा? जानें 16 सीटों पर लड़ रहे JMM उम्मीदवारों की पूरी कहानी और चुनावी समीकरण.
Assam Election Results 2026, रांची/गवाहटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं. शाम तक यह साफ हो जाएगा कि असम की सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा. लेकिन इस बार का चुनाव एक विशेष वजह से चर्चा में है और वह है झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की एंट्री.
गठबंधन टूटा, तो अपनाया ‘एकला चलो’ का संकल्प
झारखंड के बाहर अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में जुटी JMM ने इस बार असम में पूरी ताकत झोंकी है. कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत सिरे नहीं चढ़ने के बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘एकला चलो रे’ की नीति अपनाई. हालांकि पार्टी ने शुरुआत में 21 सीटों पर दावेदारी पेश की थी, लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी दिक्कतों के कारण 5 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द हो गई. अब 16 सीटों पर JMM के योद्धा मैदान में डटे हैं.
चाय बागान श्रमिक: JMM का सबसे बड़ा दांव
JMM की पूरी चुनावी बिसात असम के करीब 70 लाख चाय बागान श्रमिकों यानी ‘चाय जनजातियों’ के इर्द-गिर्द बिछी है. ये वो लोग हैं जिनका मूल नाता झारखंड के छोटानागपुर पठार से है. प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन ने इन श्रमिकों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने के संवेदनशील मुद्दे को हवा दी. पार्टी को उम्मीद है कि झारखंड से जुड़ा यह भावनात्मक कार्ड उन्हें असम में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में ला सकता है.
नामांकन के झटके और रणनीतिक चेहरे
नामांकन के दौरान पार्टी को बोकाजान जैसी महत्वपूर्ण सीट पर बड़ा झटका लगा, जहां प्रत्याशी प्रताप सिंह रोंगफर का पर्चा रद्द हो गया. बावजूद इसके, सोनारी से बलदेव तेली और चबुआ से भुबेन मुरारी जैसे मजबूत चेहरों ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. इन सीटों पर झारखंडी मूल के मतदाताओं की खासी तादाद है.
राष्ट्रीय विस्तार का लिटमस टेस्ट
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह चुनाव JMM के लिए केवल हार-जीत का सवाल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में एक ‘लिटमस टेस्ट’ है. यदि तीर-धनुष असम के बागानों में अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहा, तो यह पूर्वोत्तर भारत में झारखंडी राजनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। फिलहाल, सबकी नजरें ईवीएम के पिटारे पर टिकी हैं.
कौन कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं
सोनारी से बलदेव तेली, चबुआ से भुबेन मुरारी, डुमडुमा से रत्नाकर तांती, डिगबोई से भरत नायक, बिस्वनाथ से तेहारु गौर, खुमटाई से अमित नाग, डुलियाजान से पीटर मिंज, मर्गेरिटा से जरनैल मिंज, तिंगखोंग से महाबीर बास्के, नहरकटिया से संजय बाघ, माकुम से मुना कर्माकर, मजबत से प्रीति रेखा बारला, बरचला से अब्दुल मजान, रंगापाड़ा से मैथ्यू टोपनो और बोकाजान से प्रताप सिंह रोंगफर मैदान में हैं
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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