प्रदूषण मुक्त रखने के लिए पराली को नहीं जलाएं किसान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Nov 2019 7:25 AM

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अकोढ़ीगोला : पराली जलाने के रोकने के लिए मंगलवार को प्रखंड क्षेत्र के पंचायत भवनों पर ग्रामसभा का आयोजन हुआ. इसमें ग्रामीणों को पराली जलाने से होनेवाले नुकसान के बारे में समझाया गया. तेतराढ़ स्थित गांधी आश्रम पर आयोजित कार्यक्रम में कुंदन कुमार ने कहा कि जीवन में स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण को स्वच्छ […]

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अकोढ़ीगोला : पराली जलाने के रोकने के लिए मंगलवार को प्रखंड क्षेत्र के पंचायत भवनों पर ग्रामसभा का आयोजन हुआ. इसमें ग्रामीणों को पराली जलाने से होनेवाले नुकसान के बारे में समझाया गया. तेतराढ़ स्थित गांधी आश्रम पर आयोजित कार्यक्रम में कुंदन कुमार ने कहा कि जीवन में स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण को स्वच्छ रखना जरूरी है.

पराली जलाने से धरती में मौजूद मिट्टी के रक्षक कीट भी मर जाते हैं, जिससे फसल को भी नुकसान होता है. पराली को नष्ट करने के लिए यंत्रों पर सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है. पराली जलाने से प्रदूषण की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है. पराली का उपयोग जैविक खाद एवं पशुओं के चारा में किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जायेगी.
पराली नहीं जलाने को लेकर निकली जागरूकता रैली :कोचस . प्रखंड के सभी मध्य विद्यालयों में जिला पदाधिकारी रोहतास के निर्देशानुसार सोमवार को पराली न जलाने को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए गांवों में जागरूकता रैली निकाली गयी.
क्षेत्र के मध्य विद्यालय कोचस, सावन डेहरी, चितांव, सोरठी, रेडिया अंहारी, नरवर भगीरथा आदि विद्यालयों में रैली का नेतृत्व वहां के प्रधानाध्यापकों ने किया. विद्यार्थियों ने ‘धरतीपुत्र आगे बढ़ो, मां की कोख बचाओ’ ‘चलो चलें हाथ मिलाएं-पराली प्रदूषण को जड़ से मिटाएं’ के नारों से पराली जलाने से होनेवाले नुकसान के बारे में ग्रामीणों में जागृति लाने का प्रयास किया.
मध्य विद्यालय सोरठी के छात्र रितेश कुमार ने कार्यक्रम में कहा कि पराली जला कर किसान अपना ही नुकसान करता है. प्रधानाध्यापक भरत प्रसाद सिंह ने कहा कि ‘यही संदेश फैलाओ खेतों में पराली न जलाओ’. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, विद्यार्थी, ग्रामीण अभिभावक एवं शिक्षक उपस्थित थे.
पराली जलाने से उर्वरा शक्ति व जल संचयन होता है प्रभावित
संझौली. चांदी इंग्लिश पंचायत के चांदी गांव में पराली नहीं जलाने व प्रबंधन को लेकर मुखिया मिथलेश सिंह की अध्यक्षता में चौपाल का आयोजन किया गया. चौपाल में कृषि एसएमएस नवनीत किशोर सिंह ने चौपाल में उपस्थित किसानों को खेत में पराली (अवशेष) जलाने से होने वाले नुकसान के संबंध में बताते हुए कहा कि खेत में पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल संचयन प्रभावित होने के साथ ही फसलों को स्वस्थ्य रखने में सहायक होने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं.
इस कारण फसल व उपज प्रभावित होता है. वहीं दूसरे तरफ पराली जलाने से पर्यावरण पर प्रभावित होता है. पर्यावरण प्रभावित होने से मानव ही नहीं अपितु जीव जंतु, पशु पक्षी व पेड़ पौधे भी प्रभावित होते हैं. मुखिया मिथलेश सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पराली जलाने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया है.
पराली जलाने से होनेवाले नुकसान
एक टन धान की पराली जलाने से हवा में तीन किलोग्राम, कार्बन कण, 513 किलो ग्राम, कार्बनडाई-ऑक्साइड, 92 किलो ग्राम, कार्बनमोनो- ऑक्साइड, 3.83 किलोग्राम, नाइट्रस-ऑक्साइड, 2 से 7 किलो ग्राम, मीथेन, 250 किलो ग्राम राख घुल जाती है.
एक टन धान की पराली जलाने से 5.5 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो ग्राम फॉस्फोरस और 1.2 किलो ग्राम सल्फर जैसे मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं.
किसानों के पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है. इस कारण भूमि में 80 प्रतिशत तक नाइट्रोजन, सल्फर तथा 20 प्रतिशत तक अन्य पोषक तत्वों में कमी आयी है. कीट नष्ट होने से शत्रु कीटों का प्रकोप बढ़ा है, जिससे फसलों में विभिन्न प्रकार की नयी बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं.
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