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जननायक के प्रतिमा स्थल को विवादित बनाने का नहीं करें प्रयास

Updated at : 24 Aug 2019 8:33 AM (IST)
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जननायक के प्रतिमा स्थल को विवादित बनाने का नहीं करें प्रयास

डेहरी कार्यालय : शहर के कर्पूरी चौक पर जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के संबंध में वर्तमान समय में अनावश्यक रूप से कुछ लोगों द्वारा जानकारी के अभाव में विवाद खड़ा किया जा रहा है. इसके लिए काफी संघर्ष हुआ है, तब जाकर कर्पूरी चौक पर प्रतिमा लगी है. उक्त बातें जननायक कर्पूरी ठाकुर प्रतिमा […]

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डेहरी कार्यालय : शहर के कर्पूरी चौक पर जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के संबंध में वर्तमान समय में अनावश्यक रूप से कुछ लोगों द्वारा जानकारी के अभाव में विवाद खड़ा किया जा रहा है. इसके लिए काफी संघर्ष हुआ है, तब जाकर कर्पूरी चौक पर प्रतिमा लगी है.

उक्त बातें जननायक कर्पूरी ठाकुर प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक इंजीनियर विनय चंचल ने शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की एक बैठक में निर्णय लिए जाने के बाद 1993 में प्रतिमा लगाने के लिए शिलान्यास कराया गया था. बाद में 1994 में यहां प्रतिमा स्थापित की गयी, जिसका अनावरण तत्कालीन मंत्री मो इलियास हुसैन द्वारा किया गया.
उसी क्रम में उनके विभाग के माध्यम से इस चौक को जो पूर्व में थाना चौक के नाम से जाना जाता था जननायक कर्पूरी ठाकुर चौक के रूप में अधिसूचित किया गया. तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी एच एन राम की पहल पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आदमकद प्रतिमा बनायी जाये. साथ ही एनीकट जाने वाले रास्ते के पास छठ के लिए भी एक विशाल स्थायी गेट बनाया जाये.
उसी दिन जब उसका निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, तो कुछ सामंती विचार के लोगों ने कुत्सित भावनाओं से प्रेरित होकर एक वाद माननीय उच्च न्यायालय में दायर कर दिया. उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय में लंबे समय तक मामला चला. याचिकाकर्ताओं को कोई लाभ नहीं मिल पाया. विधान परिषद के सदस्य पूर्व मंत्री भीम सिंह के स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रतियुक्त विधान समिति ने तत्कालीन जिला पदाधिकारी वसीम उद्दीन अंजुम को नोटिस किया और उनकी हाजिरी हुई.
उस दौरान सुनवाई के बाद संयुक्त विधान समिति ने तत्कालीन जिलाधिकारी को यह निर्देश दिया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक कर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाये. जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, तत्कालीन चेयरमैन, पार्षदों और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक करायी गयी.
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जननायक की प्रतिमा स्थापित की जाये. उसके बाद जननायक कर्पूरी ठाकुर प्रतिमा निर्माण समिति ने इसका बीड़ा उठाया और सारे लोगों के सहयोग से प्रतिमा का निर्माण कराया गया. इस बीच अनेक तरह की बाधाएं आती रहीं, जो सामान्य तौर पर किसी सामाजिक कार्य में आती है.
अब अनावश्यक विवाद की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री और तत्कालीन प्रभारी मंत्री सुखदा पांडेय की उपस्थिति में दिसंबर 2012 में जिस प्रतिमा का अनावरण किया जा चुका है, उसके बाद सरकारी तौर पर यहां स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के दिन भी झंडोत्तोलन कार्यक्रम होता रहा है. फिर मैं नहीं समझता हूं कि कोई अधिकारी उस प्रतिमा का फिर से अनावरण करेगा.
मेरी यह स्पष्ट मान्यता है कि इसमें अनावश्यक रूप से जिला अधिकारी का नाम कुछ लोग अपने प्रचार के लिए उपयोग कर रहे हैं. वर्तमान परिस्थिति में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. यह सार्वजनिक स्थल है और कोई भी सफाई या मरम्मत का कार्य कर सकता है, इस पर किसी को आपत्ति नहीं है. किंतु अनावरण कराने की बात को लेकर आपत्ति है.
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