सासाराम : बंद मुहाने वाले नालों की होगी उड़ाही नगर पर्षद खर्च करेगी सवा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 May 2018 7:17 AM (IST)
विज्ञापन

सासाराम कार्यालय : बकौल सभापति कई वर्षों से नाले की मुकम्मल सफाई नहीं हुई है. पिछली नगर सरकारें नाले की सफाई तो करायी थी, लेकिन उन्हें मुकम्मल नहीं कहा जा सकता. हां, इतना जरूर हुआ कि नाला सफाई के दौरान कई-कई दिनों तक सड़क पर कीचड़ फैला रहा. उसी कीचड़ से आने-जाने में लोग इतना […]
विज्ञापन
सासाराम कार्यालय : बकौल सभापति कई वर्षों से नाले की मुकम्मल सफाई नहीं हुई है. पिछली नगर सरकारें नाले की सफाई तो करायी थी, लेकिन उन्हें मुकम्मल नहीं कहा जा सकता. हां, इतना जरूर हुआ कि नाला सफाई के दौरान कई-कई दिनों तक सड़क पर कीचड़ फैला रहा. उसी कीचड़ से आने-जाने में लोग इतना भर सुकून करते थे कि नाले की सफाई हुई है.
लेकिन, इस बार लोगों में एक खुशी की लहर है कि अन्य वर्षों की अपेक्षा नगर पर्षद नाले की उड़ाही में बकौल उप सभापति चार गुना अधिक रुपया खर्च कर रही है़ रुपये भी लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में खर्च होगा. कई नालों को टुकड़ों में बांट 49 नालों की उड़ाही की योजना बनी है. उड़ाही पर 2.22 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इन नालों की सफाई के लिए साढ़े तीन सौ के करीब ठेकेदार तैयार हैं, जो बाजाप्ता टेंडर डाल चुके हैं. सशक्त स्थायी समिति के सदस्य वीरेन्द्र चौरसिया के अनुसार शनिवार की शाम तक करीब 340 निविदा के फाइलों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. दस-बीस फाइलें बची हैं. इसके बाद ठेकेदार का चयन कर एक-दो दिन में वर्क ऑर्डर दिया जायेगा.
बंद मुहाने वाले नालों से परेशानी : शहर में नालों के जाम होने का सबसे प्रमुख कारण है, नालों के मुहाने का बंद होना. शहर के उत्तर व पश्चिम दिशा में बहने वाले अधिकांश नालों के मुहाने बंद हैं. जिसके कारण पानी की निकासी नहीं होती. जब पानी बहेगा नहीं, तो नाला जाम होगा ही. इस दिशा में न तो पूर्वती नगर सरकारों ने कुछ किया और न अब तक नयी सरकार कुछ करती नजर आ रही है. हां, इतना जरूर है कि पूर्व की सरकारों से कुछ भिन्न 11 महीने पुरानी कहें या नयी सरकार नालों की सफाई की भारी भरकम बजट बनायी है. शहर के निवासी राजेंद्र कुमार, गीता कुमारी, अनिल शर्मा आदि की माने तो नालों के रुके बहाव को खोले बिना उड़ाही का कोई फायदा नहीं होगा. नगर सरकार को नालों पर से अतिक्रमण को हटा उसके मुहाने को साफ कराना चाहिए. इतने भर से नालों का आधा कीचड़ कम हो जायेगा. उसके बाद सफाई होने से नालों में पानी बहता नजर आयेगा.
खुले नालों को होगा ढकना : शहर की छोटी नालियां हो या बड़े नाले प्राय: जगहों पर ये खुले हैं. नाला-नालियों के खुले होने से अधिकांश लोग इन्हें कूड़ेदान के रूप में प्रयोग करते हैं. जो नालियों व नालों के जाम होने का कारण बनते हैं. पॉलीथिन में कचरा भर कर फेंकने का असर होता है कि नालों के प्रवाह वहीं रुक जाते हैं. ऐसे में नगर पर्षद को शहर के नालों व नालियों को पूर्ण रूप से ढकना होगा. तभी नालों को जाम से मुक्ति मिल सकती है.
नगर पर्षद के पास हैं करीब तीन सौ स्थायी व अस्थायी सफाई कर्मी : नगर पर्षद में नालों की सफाई का टेंडर हुआ, तो अधिकतर निर्माणकर्ता सफाई के ठेकेदार बनने को उतावले दिखे. वर्तमान समय में नगर पर्षद के पास करीब तीन सौ स्थायी व अस्थायी सफाई कर्मी हैं. अगर एक साथ सभी 49 नालों की सफाई में काम लगेगा, तो इतनी बड़ी संख्या में मजदूर कहां से आयेंगे? इसकी चर्चा शहर में होने लगी है. अधिकतर ठेकेदार बड़ी रकम देख टेंडर तो भर दिये, लेकिन उनके पास संसाधन कितने और कैसे हैं, यह भी देखना होगा. कहीं ऐसा न हो कि शहर की सड़कें व गलियां एक साथ कीचड़ से सन जाएं और लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाये.
पॉलीथिन बना नालों के जाम होने का कारण
किस नगर सरकार की बात करें. प्राय: सभी पूर्वर्ती नगर सरकारों की बोर्ड ने पॉलीथिन पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया है. लेकिन, इस पर कभी मुकममल तरीके से रोक नहीं लग पाया. इसे नगर पर्षद की कार्यशैली कहें या नगरवासियों की किस्मत. यही पॉलिथीन नालों के जाम होने में बड़ा कारण बनते हैं. लोगों का कहना है कि पॉलीथिन पर रोक लगने से नगर पर्षद की सफाई की दिशा में बड़ा धन व समय दोनों की बचत होगी. नालों के जाम होने की संभावना भी कम हो जायेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




