30 दिनों में पूरी हों मांगें नहीं तो रेल-सड़क जाम

Published at :04 Jul 2017 5:22 AM (IST)
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30 दिनों में पूरी हों मांगें नहीं तो रेल-सड़क जाम

आंदोलन. मांगों को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने भरा हुंकार कहा-युवाओं के भविष्य से नहीं करें खिलवाड़, वरना भुगतना पड़ेगा अंजाम सासाराम शहर : जनहित मोरचा के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने सोमवार को शहर में विरोध प्रदर्शन किया. हजारों की संख्या में बाल विकास मैदान में जुटे छात्रों का सैलाब जब एक […]

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आंदोलन. मांगों को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने भरा हुंकार

कहा-युवाओं के भविष्य से नहीं करें खिलवाड़, वरना भुगतना पड़ेगा अंजाम
सासाराम शहर : जनहित मोरचा के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने सोमवार को शहर में विरोध प्रदर्शन किया. हजारों की संख्या में बाल विकास मैदान में जुटे छात्रों का सैलाब जब एक साथ सड़क पर उतरा, तो शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग गया. प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी भी हुई. हालांकि, पुलिस-प्रशासन की चुस्ती के कारण प्रदर्शनकारी उपद्रव की घटना को अंजाम देने में सफल नहीं हो सके. पिछले तीन वर्षों से विभिन्न विभागों में बंद बहाली के विरोध में मोरचा के छात्र नेता रुद्र कुमार मिश्र के नेतृत्व में प्रतियोगी छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर अपनी शक्ति का एहसास कराया.
छात्र नेता रुद्र कुमार मिश्र ने कहा कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाये. सरकारी संस्थानों का निजीकरण हो जाने से देश में बेरोजगारी की स्थिति प्रबल होती जा रही है. रेलवे देश की सबसे बड़ी नियोक्ता है, लेकिन रेलवे कुछेक शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देकर ही अपने कर्तव्यों का इतिश्री कर दे रही है. किसी भी हाल में रेलवे का निजीकरण बंद हो एवं नियुक्ति फॉर्म को शीघ्र ही प्रकाशित किया जाये, ताकि शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिल सके.
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा नियुक्तियां नहीं निकाले जाने के कारण प्रतियोगी छात्रों की सारी तैयारी धरी की धरी रह जा रही है. कई छात्र प्रतियोगी परीक्षा को पास करने के बाद भी दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं. सरकार की उदासीनता के कारण जी-तोड़ मेहनत करने के बाद छात्रों को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल रहा है.
छात्रों ने कहा कि तीस दिन के अंदर अगर हमारी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो सड़क व रेल जाम कर व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जायेगा. आंदोलन में मोरचा के संस्थापक अध्यक्ष छोटेलाल सिंह, अखिलेश पाठक, सुनील चौधरी, सरदार मंजीत सिंह, राकेश वर्मा, जेपी कुमार, मनीष कुमार, सुनील यादव, अरविंद पासवान, राहुल यादव, चंदन आदि शामिल थे.
तीन वर्षों से बंद बहाली के कारण प्रतियोगी छात्रों में उबाल
शहर की रफ्तार पर लगाया ब्रेक
सोमवार की सुबह छात्रों ने आंदोलन निकाल कर शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया. छात्रों की संख्या जैसे-जैसे बढ़ती गयी. वैसे-वैसे शहर में की स्थिति बदलती गयी. छात्रों की भीड़ के कारण जगह-जगह पर जाम की स्थिति बनती गयी. देखते ही देखते पुरान जीटी रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग गयी. फजलगंज बैंक कॉलोनी मोड़ से लेकर बौलिया तक घंटो तक जाम लगा रहा. सड़कों पर वाहन रेंगते हुए नजर आये. इस दौरान एंबुलेंस वाहन भी जाम में फंस गये. हालांकि, पुलिस व लोगों की मदद से किसी तरह एंबुलेंस को निकाल दिया गया. लेकिन अन्य वाहन जाम के झाम में घंटों फंसे रहे. हालत यह हो गयी थी कि राहगीरों को जाम में से पैदल निकलने में भी काफी परेशानी हुई.
चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस
छात्रों के आंदोलन को ले शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात थी. पहले की घटनाओं को ले जिला व रेल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क था. प्रदर्शनकारी छात्रों पर नजर रखने के लिए वर्दीधारी के अलावा सादे लिबास में भी सुरक्षा बलों की टीम शहर के विभिन्न जगहों पर मुस्तैद रही. प्रदर्शन के दौरान छात्रों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी करायी गयी. शहर के बाल विकास मैदान में जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही थी. वैसे-वैसे पुलिस-प्रशासन की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. कलेक्ट्रेट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के अलावा अन्य सभी सरकारी कार्यालयों पर पुलिस बल के जवान सुबह से ही सुरक्षा को लेकर तैनात दिखे.
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