कैदी की मौत के बाद रात भर सदर अस्पताल में किया हंगामा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Jul 2017 10:06 AM (IST)
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आक्रोश. परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया लापरवाही का रोप पत्नी की हत्या के आरोप में 16 जून से ही जेल में बंद था सुनील गिरि सासाराम नगर : विचाराधीन कैदी की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों सदर अस्पताल में गुरुवार रात भर हंगामा किया. गौरतलब है कि गुरुवार को एक विचाराधीन कैदी […]
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आक्रोश. परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया लापरवाही का रोप
पत्नी की हत्या के आरोप में 16 जून से ही जेल में बंद था सुनील गिरि
सासाराम नगर : विचाराधीन कैदी की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों सदर अस्पताल में गुरुवार रात भर हंगामा किया. गौरतलब है कि गुरुवार को एक विचाराधीन कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गयी. मृतक सुनील गिरि (25) तिलौथू थाना क्षेत्र के महाराजगंज गांव का निवासी था.
पत्नी की हत्या के आरोप में 16 जून से ही वह मंडलकारा में बंद था. कैदी को पेशाब रूकने की शिकायत पर इलाज के लिए जेल प्रशासन ने सदर अस्पताल में बुधवार की शाम भेजा. उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गयी और गुरुवार की शाम उसने दम तोड़ दिया. कैदी की मौत कि सूचना जैसे ही परिजनों को मिली वे काफी संख्या में गांव के लोगों के साथ सदर अस्पताल पहुंचे. शव को देखते ही मृतक की मां दौलत देवी चित्कार उठी कि मेरे बेटे कि हत्या हुई है. अभी दो दिन पहले मैं जेल में मुलाकात करने गयी थी तो वह भला चंगा था. दो दिनों कौन सी बीमारी हो गयी कि वह मर गया.
पिता विपिन विहारी गिरि ने बिखलते हुए कहा कि मैं चार बेटों का पिता हूं. दो बड़े बेटे अलग रहते हैं. यह तीसरे नंबर पर था. सबसे छोटा अभी पढ़ रहा है. मेरा बेटा बहुत सेवा करता था.
वर्ष 2014 में इसकी शादी औरंगाबाद के कुशा निवासी विनोद गिरि की बेटी प्रियंका से हुई. वह जब घर में आयी कलह ही करती थी. इसी वर्ष 10 फरवरी को जहर खा ली. जिससे उसकी मौत हो गयी. इसी दिन से मेरे परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा. उसके पिता ने मेरे बेटे के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कराया. 16 जून को बेटा कोर्ट में सरेंडर कर दिया. इसकी एक बेटी है, जो अपने नाना के घर में रहती है. मेरे बेटे की बीमारी से मौत नहीं हुई है, बल्कि इसकी हत्या हुई है. अब इसका इंसाफ भगवान करेगा.
भाई ने लगाया जेल में मारने का आरोप
मृतक के बड़े भाई संतोष गिरि ने कहा कि सूचना मिली की उसका पेशाब रूक गया है. उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया जा रहा है. यह बात बुधवार की सुबह सात बजे की है. जेल प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल में लाने के बाद इलाज में देर हुई. स्थिति बिगड़ते गयी.
आखिरकार मेरे भाई की मौत हो गयी. पेशाब रूकने के बाद तत्काल उसे इलाज के लिए क्यों नहीं लाया गया. मेरे भाई को जेल में मारा गया है. उसके गरदन व पीठ पर जख्म का निशान है और सूजन भी है. पेशाब बंद होने की शिकायत पर पीठ व गरदन पर चोट का निशान कैसे हुआ.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी स्थिति
परिजनों ने जेल प्रशासन पर हत्या करने का आरोप लगा सदर अस्पताल में डीएम व जेल अधीक्षक को बुलाने पर अड़े थे. जेल प्रशासन डीएम के निर्देश पर गुरुवार कि रात में पोस्टमार्टम कराना चाहता था. परिजन इसके लिए तैयार नहीं थे. परिजनों की मांग पर मेडिकल बोर्ड का गठन कर शव का पोस्टमार्टम किया गया. प्रभारी डीएस डॉ श्रीभगवान सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम डॉ एस प्रसाद, डाॅ संजय पासवान व डॉ पुष्कर ने पोस्टमार्टम किया. उन्होंने कहा कि कैदी को बुधवार की शाम सात बजे लाया गया था. इसकी स्थिति गंभीर थी. पोस्टमार्टम के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि मौत कैसे हुई है.
लापरवाही का आरोप बेबुनियाद
कैदी की तबीयत खराब होने पर जेल के डॉक्टरों द्वारा इलाज किया गया. सुधार नहीं होने पर सदर अस्पताल लाया गया. यहां भी जब स्थिति बिगड़ने लगी तो पीएमसीएच ले जाने कि प्रक्रिया पूरी की जा रही थी. तभी उसकी मौत हो गयी. लापरवाही का आरोप बेबुनियाद है.
संजीव कुमार, जेल अधीक्षक
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