मुजफ्फरपुर के औराई में मछली और जैविक सब्जी पर होगा रिसर्च, पूसा के छात्र के लिए बनेगा प्रयोगशाला

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सूबे के प्रतिष्ठित डॉ राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के छात्र जैविक सब्जी, मछली, इमारती लकड़ी, गौ पालन, कम्पोस्ट उत्पादन के गुर सीखेंगे और शोध करेंगे.

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प्रभात कुमार, मुजफ्फरपुर. हर साल बाढ़ की मार झेलने वाला औराई जल्द ही देश-दुनिया में जैविक कृषि रिसर्च सेंटर के रूप में जाना जायेगा. इसके लिए पहल शुरू हो गयी है. सूबे के प्रतिष्ठित डॉ राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के छात्र जैविक सब्जी, मछली, इमारती लकड़ी, गौ पालन, कम्पोस्ट उत्पादन के गुर सीखेंगे और शोध करेंगे.

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राजखंड स्थित देववती उद्यान में यूनिवर्सिटी के छात्रों को शोध कराने के लिए जिला कृषि कार्यालय ने यूनिवर्सिटी के उप कुलपति को पत्र लिखा है. इसमें बताया है कि उद्यान के संरक्षक गोपाल प्रसाद शाही द्वारा आधुनिक एकीकृत जैविक उत्पादन किया जा रहा है. इनके जैविक उद्यान में मछली पालन, गौ पालन, वर्मी कंपोस्ट, इमारती लकड़ी, फल, फूल व धान का जैविक उत्पादन किया जा रहा है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आये थे राजखंड

इसी साल फरवरी में बिहार के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार को औराई प्रखंड के राजखंड गांव में देववती जैविक उद्यान में जैविक खेती देखने पहुंचे थे. यहां पहुंचने पर उन्होंने किसान गोपाल प्रसाद शाही से मुलाकात कर जैविक खेती की जानकारी ली थी.

2014 में हुई थी देववती जैविक उद्यान की स्थापना

2014 में देववती जैविक उद्यान की स्थापना की गयी थी. पौधारोपण, फल, सब्जी, इमारती लकड़ी उगाने के साथ मछली पालन शुरू किया. वर्मी कंपोस्ट बनाना शुरू किया. साहिवाल नस्ल की एक बछिया बाहर लेकर आये.

इसी अलग -अलग प्रदेश से मछली का प्रजाति जुटाया. हालांकि बाढ़ में इनकी एकीकृत खेती को काफी क्षति पहुंची. नौजवान व किसानों के प्रेरणास्रोत बने गोपाल शाही की इच्छा है कि मछली उत्पादन से जुड़ी फैक्ट्री औराई में स्थापित हो. मछली का तेल व उर्वरक का काफी डिमांड है. इसके लिए वे अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं.

12.5 एकड़ में जैविक उत्पादन

गोपाल प्रसाद शाही पुश्तैनी 12.5 एकड़ खेत में एकीकृत कृषि प्रणाली के तहत जैविक खेती कर रहे ���ैं. ये इलाके के लोगों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं. इनके उद्यान में साढ़े तीन एकड़ में पोखर है. 4700 महोगनी, 1500 नींबू, 461 आम व 1450 सतावर के पेड़ हैं. प्रत्येक वर्ष 20 हजार इमारती लकड़ी के पौधे तैयार कर वन विभाग को देते हैं. तेलहन, दलहन व सब्जी की खेती करते हैं.

Posted by Ashish Jha

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