Push Start-Stop फीचर वाली कार खरीदने से पहले जान लें फायदे और नुकसान

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 26 May 2026 1:17 PM

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कार में पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

नयी कारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा Push Start-Stop फीचर सुविधा और सिक्योरिटी देता है, लेकिन स्मार्ट की, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कुछ परेशानियां भी पैदा कर सकता है.

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कारों में मिलने वाला पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर अब सिर्फ महंगी लग्जरी गाड़ियों तक सीमित नहीं रहा. आज छोटे हैचबैक से लेकर कॉम्पैक्ट एसयूवी तक में यह फीचर तेजी से आम हो चुका है. बिना चाबी लगाए सिर्फ एक बटन दबाकर इंजन स्टार्ट करना लोगों को प्रीमियम फील देता है. खासकर शहरों में रोजाना ड्राइव करने वालों के लिए यह काफी सुविधाजनक माना जाता है. लेकिन जितना यह फीचर आधुनिक और आसान लगता है, उतने ही इसके कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिनके बारे में जानना जरूरी है. कई बार यही स्मार्ट फीचर मुश्किल की वजह भी बन सकता है.

बिना चाबी कार स्टार्ट करने का आसान तरीका

पुश स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है. ड्राइवर को बार-बार जेब या बैग से चाबी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. जैसे ही स्मार्ट की कार के अंदर होती है, ब्रेक या क्लच दबाकर एक बटन प्रेस करते ही इंजन स्टार्ट हो जाता है. ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान यह फीचर काफी आराम देता है.

आजकल ज्यादातर नई कारों में यह फीचर कीलेस एंट्री के साथ आता है, जिससे कार लॉक और अनलॉक करना भी आसान हो जाता है. यही वजह है कि युवाओं और फैमिली कार खरीदारों के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.

सुरक्षा में भी करता है मदद

यह फीचर सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं है. इसमें सिक्योरिटी का भी बड़ा रोल होता है. कार तभी स्टार्ट होती है जब स्मार्ट की आसपास मौजूद हो. ऐसे में पारंपरिक तरीके से वायर जोड़कर कार चोरी करना काफी मुश्किल हो जाता है.

ज्यादातर कंपनियां इसके साथ इंजन इमोबिलाइजर सिस्टम भी देती हैं. यानी गलत चाबी या बिना ऑथराइजेशन के इंजन स्टार्ट नहीं होगा. यही कारण है कि यह फीचर न्यू जेनरेशन की कारों में तेजी से स्टैंडर्ड बनता जा रहा है.

कम घिसावट, लेकिन खर्च हो सकता है ज्यादा

पारंपरिक चाबी वाले सिस्टम में कई मैकेनिकल पार्ट्स लगातार इस्तेमाल से घिसते रहते हैं. पुश स्टार्ट सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक बेस्ड होता है, इसलिए इसमें मूविंग पार्ट्स कम होते हैं. लंबे समय में इससे कुछ हद तक मेंटेनेंस कम हो सकता है.

हालांकि, अगर स्मार्ट की खो जाए या सिस्टम में खराबी आ जाए तो खर्च काफी बढ़ सकता है. नयी स्मार्ट की बनवाने के लिए अक्सर डीलरशिप पर जाना पड़ता है और री-प्रोग्रामिंग भी करनी होती है. वारंटी खत्म होने के बाद रिपेयर बिल कई लोगों को चौंका सकता है.

कई बार बन जाता है परेशानी की वजह

इस फीचर की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता है. अगर कार की बैटरी कमजोर हो जाए या पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाए, तो कई बार कार स्टार्ट ही नहीं होती. हालांकि कंपनियां बैकअप स्टार्टिंग सिस्टम देती हैं, लेकिन अधिकतर लोगों को उसके इस्तेमाल की जानकारी नहीं होती.

इसके अलावा कई ड्राइवर इंजन बंद करना भी भूल जाते हैं. खासकर हाइब्रिड और बेहद शांत कारों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. चाबी निकालने की जरूरत नहीं होने की वजह से कई बार लोग कार छोड़कर चले जाते हैं और इंजन चालू रह जाता है.

क्या यह फीचर वाकई जरूरी है?

पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर निश्चित तौर पर ड्राइविंग अनुभव को ज्यादा आधुनिक और आसान बनाता है. लेकिन इसके फायदे तभी पूरी तरह मिलते हैं जब ड्राइवर इसकी बेसिक जानकारी रखे. स्मार्ट फीचर्स के साथ थोड़ी सावधानी भी जरूरी है. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह फीचर रोजाना ड्राइविंग को काफी आरामदायक बना सकता है.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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