बिहार में 2.37 लाख लोगों का राशन कार्ड आधार लिंक बाकी, 31 मार्च के बाद रुक सकता है राशन

सांकेतिक तस्वीर
Ration Card : बिहार में अभी भी 2.37 लाख लोगों का राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं हो पाया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक ई-केवाईसी और आधार लिंकिंग अनिवार्य है, वरना पीडीएस दुकानों से मिलने वाला राशन बंद हो सकता है.
Ration Card : बिहार सरकार ने आधार लिंकिंग की डेडलाइन 31 मार्च तय की है. इसके बाद केवल उन्हीं लाभार्थियों को राशन मिलेगा, जिनका आधार वेरिफिकेशन पूरा होगा. ऐसे में लाखों लोगों के लिए समय कम बचा है और अगर जल्द प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो मुफ्त अनाज का लाभ मिलना बंद हो सकता है.
केवासी और आधार कार्ड क्यों जरूरी?
सरकार का मकसद सिस्टम को पारदर्शी बनाना और फर्जी राशन-कार्ड को हटाना है. इसी वजह से राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी और आधार से लिंकिंग किया जा रहा है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि सही व्यक्ति को ही सरकारी अनाज मिल रहा है.
सिर्फ आधार लिंकिंग ही नहीं, बल्कि विभाग अब ‘सस्पेक्टेड’ यानी संदेहास्पद राशन कार्डों की भी गहनता से छंटनी कर रहा हैं, कुल 2.07 लाख ऐसे कार्डों की पहचान की गई थी, जिनमें से 1.25 लाख का निपटारा पहले ही किया जा चुका है. अब बचे हुए 82 हजार संदिग्ध राशन कार्डों की बारी है, जिनकी जांच टीम घर-घर जाकर कर रही है. यदि जांच के दौरान कोई जानकारी गलत निकलती है, तो उस कार्ड को तुरंत रद्द कर दिया जाएगा.
2.37 लाख लोग अब भी बाकी
बिहार के कई जिलों में अभी बड़ी संख्या में लोग अब भी आधार लिंक नहीं करा पाए हैं. विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए पीडीएस दुकानदारों को कहा है कि वे लाभार्थियों को जागरूक करें और जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कराएं.
सभी पीडीएस दुकानदारों को निर्देश दिया गया है कि वो अपने क्षेत्र के लाभार्थियों को आधार लिंकिंग करें. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि बिना वेरिफिकेशन के किसी को राशन न दिया जाए.
कैसे कराएं केवाईसी और लिंकिंग
राशन कार्ड को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सभी जन वितरण प्रणाली (PDS) केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई है. कार्डधारकों को अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ नजदीकी राशन दुकान पर जाना होगा, जहां पोस (e-PoS) मशीन के माध्यम से अंगूठे का निशान लेकर ई-केवाईसी पूरी की जाएगी.
विभाग ने चेतावनी दी है कि अंतिम समय में सर्वर की समस्या से बचने के लिए लोग जल्द से जल्द इस काम को पूरा कर लें. एक छोटी सी लापरवाही कई लोगों के रसोई के बजट को बिगाड़ सकती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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