पीएचडी कोर्सवर्क की कक्षाओं में शोधार्थियों की कम उपस्थिति पर विवि हुआ सख्त

नियम को कड़ाई से लागू करने का दिया हुक्म
– कुलपति ने 75 प्रतिशत उपस्थिति के नियम को कड़ाई से लागू करने का दिया हुक्म पूर्णिया. कुलपति प्रो विवेकानंद सिंह के आदेश पर पूर्णिया विश्वविद्यालय ने पीएचडी सत्र 2023 के कोर्स वर्क की कक्षाओं के नियमित, समयबद्ध एवं प्रभावी संचालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. साथ ही शोधार्थियों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया है. अध्यक्ष, छात्र कल्याण कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार पीएचडी. सत्र 2023 के कोर्स वर्क की कक्षाएं चल रही हैं. इन कक्षाओं के संचालन हेतु संबंधित संकायाध्यक्षों एवं विषय-सम्बद्ध विभागाध्यक्षों को अधिकृत किया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में यह बात आयी है कि कुछ कक्षाओं में शोधार्थियों की उपस्थिति अत्यंत कम पायी जा रही है, जो शैक्षणिक अनुशासन, यूजीसी विनियम-2016 तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा पीएचडी. उपाधि प्रदान करने से संबंधित समान अध्यादेश एवं विनियम 2017 की भावना के प्रतिकूल है. विवि मीडिया पदाधिकारी प्रो. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं. इसके तहत सभी संबंधित संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष यह सुनिश्चित करेंगे कि पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाएं नियमित, प्रभावी एवं निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित हों. पीएचडी सत्र 2023 के कोर्स वर्क में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी. निर्धारित उपस्थिति से कम रहने वाले शोधार्थियों को कोर्स वर्क परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी. शोधार्थियों की दैनिक उपस्थिति पंजी संधारित की जाएगी तथा उसका विधिवत सत्यापन किया जाएगा. विषय-सम्बद्ध कक्षाओं का संचालन यूजीसी विनियम-2016 तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालयों के समान अध्यादेश एवं विनियम-2017 के अनुरूप सुनिश्चित किया जाएगा. पीएचडी. सत्र 2022 एवं उससे पूर्व के शोधार्थियों की विभागीय उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक विभागीय आदेश निर्गत किए जाएंगे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि उपर्युक्त निर्देशों के अनुपालन से संबंधित प्रतिवेदन एवं निर्गत विभागीय आदेशों की प्रतिलिपि अनिवार्य रूप से अध्यक्ष, छात्र कल्याण कार्यालय में जमा करायी जाए. साथ ही शोधार्थियों की उपस्थिति से संबंधित सभी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि शोध की गुणवत्ता, अकादमिक अनुशासन एवं नियामक संस्थाओं के दिशानिर्देशों के पालन के प्रति कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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