लक्ष्य 1672 मीट्रिक टन, खरीदारी हुई महज 110 क्विंटल गेहूं

Updated at : 10 May 2024 6:24 PM (IST)
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चयनित कुल 47 पैक्सों में महज 19 पैक्स आगे आये, सरकारी खरीद को ले हांफ रहे अधिकारी

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चयनित कुल 47 पैक्सों में महज 19 पैक्स आगे आये, सरकारी खरीद को ले हांफ रहे अधिकारीपूर्णिया. रबी मौसम की गेहूं खरीद को लेकर जिले में सरकारी क्रय केन्द्रों पर इस बार किसानों की संख्या बेहद कम दिखायी दे रही है. हालात ऐसे हैं कि जितनी संख्या में निबंधित किसान हैं उनमें 10 फीसदी से भी कम किसान अबतक सरकारी क्रय केंद्रों तक पहुंचे हैं और अपनी गेहूं की फसल की बिक्री की है. सहकारिता विभाग के पैक्सों में अनिश्चितता का दौर शुरू से ही बना हुआ है. तमाम कोशिशों के बावजूद अबतक निर्धारित लक्ष्य 1672 मीट्रिक टन की तुलना में मात्र 110 क्विंटल ही गेहूं की खरीद सुनिश्चित हो पायी है जबकि जिले में चयनित कुल 47 पैक्सों में गेहूं की खरीददारी की जानी है जिनमें से मात्र 19 पैक्सों में ही किसानों ने ही अपनी गेहूं की बिक्री की है. वहीं, इन पैक्सों में कुल निबंधित किसानों की संख्या 305 है.

अधिकारियों को बहाने पड़ रहे हैं पसीने :

आलम यह है कि गेहूं की खरीद को बढाने के लिए अधिकारियों को पसीने बहाने पड़ रहे हैं. वे किसानों के घर घर पहुंचकर उनसे सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी गेहूं की पैदावार को बेचने का अनुरोध कर रहे हैं. भारतीय खाद्य निगम मंडल कार्यालय पूर्णिया द्वारा चारो जिले में की गयी गेहूं की खरीद का आंकड़ा देखने पर पता चलता है कि वे अपने निर्धारित लक्ष्य से कोसों दूर हैं. एक ओर उनके द्वारा जिले में अबतक कुल 8.9 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गयी है वहीं कटिहार में 6.1, किशनगंज में 8.05 और अररिया में 7.89 मीट्रिक टन यानि कुल मिलाकर भारतीय खाद्य निगम ने 31.3 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है.

गेहूं की सरकारी खरीद को ले हांफ रहे अधिकारी :

सामान्य तौर पर गेहूं की सरकारी खरीदारी के मामले में आए दिन सरकारी एजेंसियों की उदासीनता की चर्चा होती है पर यहां स्थिति विपरीत है. गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर अधिकारी ही हांप रहे हैं जबकि किसान ही उदासीन नजर आते हैं. मालूम हो कि गेहूं की खरीद को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों की एजेंसियां यहां काम कर रही हैं और लगभग दोनों के ही हालात एक जैसे नजर आ रहे हैं. हालांकि भारतीय खाद्य निगम द्वारा रबी सीजन की खरीद को लेकर किसानों के बीच गांव गांव तक पहले से ही प्रचार प्रसार के कार्य कराये गये लेकिन जब गेहूं की खरीद का वक्त आया तो किसानों का रुझान ही नदारद रही. जिले के गांवों से किसान सरकारी क्रय केन्द्रों तक पहुंचे ही नहीं जबकि अब मात्र एक माह का ही समय शेष रह गया है जो आगामी 15 जून को समाप्त हो जायेगी. अभी भी अधिकारी किसानों के घर जाकर बेचने का अनुरोध कर रहे हैं.

सरकारी दर से ऊंचे मिल रहे हैं बाजार भाव :

इस दफा खुले बाजार में किसानों को बढे हुए मूल्य मिल रहे हैं. इस वजह से भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं. एक ओर जहां सरकार द्वारा 2275 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रखा गया है तो वहीं खुले बाजार में इसकी कीमत लगभग 2400 से 2600 रूपये प्रति क्विंटल है. दूसरी ओर कई किसानों ने बताया कि गेहूं की तुलना में मक्का की खेती उनके लिए ज्यादा मुनाफे का सौदा है इस वजह से भी लोगों का रुझान प्रायः मक्का की पैदावार को लेकर ज्यादा है. कुछ किसानों ने यह भी बताया कि अगर सरकार द्वारा समर्थन मूल्य के ऊपर कुछ अतिरिक्त बोनस की सुविधा देकर उसे बाजार भाव के करीब लाया जाय तो शायद किसानों का ध्यान सरकारी क्रय केंद्रों की ओर जाय.

इस साल बढ़ा है गेहूं उत्पादन का रकवा :

जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 के रबी सीजन की तुलना मे इस दफा 2023-24 में गेहूं का रकवा बढ़ा है. गेहूं की खेती के लिए बीज वितरण कार्य में भी प्रति किसान निर्धारित लक्ष्य 40 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की दर से वितरित किये गये. विभाग के अनुसार हालिया रबी सीजन के पूर्व वर्ष 2022-23 में कुल 13,889 हेक्टेयर भूभाग में गेहूं की खेती की गयी थी जबकि वर्ष 2023-24 में इसके आच्छादन का क्षेत्रफल बढ़कर 14,052 हेक्टेयर किया गया. इसी क्रम में दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह गेहूं में पहली सिचाई के बाद अधिकतम तापमान 20 डिग्री से नीचे नहीं आ पाया था जिसे किसान उसके 18 डिग्री तक रहने का अनुमान लगा रहे थे. जिस वजह से पौधों के अच्छे आने के बावजूद उनके बढ़ने की गति थोड़ी धीमी रही थी. इस वजह से गेहूं उत्पादन पर असर के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन बाद में सबकुछ सामान्य रहा.

कहते हैं अधिकारी :

जितने भी निबंधित किसान हैं उनसे अनुरोध किया जा रहा है. प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी तथा कार्यपालक सहायक भी किसानों से समन्वय स्थापित कर उनसे अपनी गेहूं की पैदावार अपने पैक्सों में बेचने का अनुरोध कर रहे हैं. रणजीत कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी.

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