रेलवे स्टेशनों पर 16 को पेंडिंग डिमांड बेज लगा काम करेंगे स्टेशन मास्टर

Updated at : 14 Oct 2024 6:04 PM (IST)
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रेलवे स्टेशनों पर 16 को पेंडिंग डिमांड बेज लगा काम करेंगे स्टेशन मास्टर

ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के आह्वान पर आगामी 16 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर जहां अनशन किया जाएगा वहीं पूर्णिया और आस पास के रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत स्टेशन मास्टर हंगर फास्ट के समर्थन में पेंडिंग डिमांड बेज लगा कर अपनी ड्यूटी करेंगे.

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दिल्ली के हंगर फास्ट के समर्थन में आवाज बुलंद करेंगे पूर्णिया के स्टेशन मास्टर

पूर्णिया. ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के आह्वान पर आगामी 16 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर जहां अनशन किया जाएगा वहीं पूर्णिया और आस पास के रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत स्टेशन मास्टर हंगर फास्ट के समर्थन में पेंडिंग डिमांड बेज लगा कर अपनी ड्यूटी करेंगे. इस माध्यम से तमाम स्टेशन मास्टर लंबित मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. वे यह सवाल उठाएंगे कि भारतीय रेलवे का प्रथम नागरिक भारतीय रेलवे का ब्रांड एंबेसडर आखिर भूख हड़ताल के लिए क्यों विवश हो गया. ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन की ओर से यह जानकारी देते हुए पूर्णिया जंक्शन के स्टेशन प्रबंधक मुन्ना कुमार ने बताया कि स्टेशन मास्टर सदैव देश के लिए काम करता है पर उनकी कुछ ऐसी समस्याएं अब तक लंबित पड़ी हैं जिन पर रेलवे बोर्ड द्वारा कोई भी समाधान करने का प्रयास नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से विवश होकर उन सबको हंगर फास्ट का रास्ता अपनाना पड़ा है. श्री कुमार ने बताया कि उनकी मांगों में एमएसीपी 01 जनवरी 2016 से लागू करने, एल 8 एवं एल 9 में सभी कर्मचारियों विशेषकर स्टेशन मास्टर्स को रात्रि ड्यूटी भत्ता देने, कैडर रिस्ट्रक्चरिंग और गजेटेड रैंक का बेहतर पैमाना करने, पदनाम परिवर्तन,स्टेशन मास्टरों को सुरक्षा-तनाव भत्ता प्रदान करने की मांगें लंबित हैं.

स्टेशन मास्टर एसोसिएशन की अन्य मांगों में सभी स्टेशनों पर सुपरवाइजरी स्टेशन मास्टर की पोस्टिंग, सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना लागू करनो, भारतीय रेलवे से 12 घंटे का ड्यूटी रोस्टर समाप्त करने आदि की मांगे मुख्य रुप से लंबित चली आ रही हैं. उन्होंने बताया कि इन मांगों के लिए रेलवे बोर्ड में कई बार प्रयास किए गए, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से कई बार फॉलो अप लिया लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिला. लेवर कोर्ट का भी सहारा लिया गया पर इसके चलते हमें लेबर कोर्ट का भी सहारा लेना पड़ा वहां भी रेलवे के अधिकारियों ने आश्वासन देकर जल्द समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया पर समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं किया गया.

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