पूर्णिया को सीधे मिलेगी मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी

पूर्णिया पहुंच चुका है राडार से जुड़ा तकनीकी उपकरण
खुशखबरी
1874 में बने पूर्णिया मौसम केंद्र मे लगाया जा रहा सूबे का दूसरा डॉप्लर वेदर राडार
पूर्णिया पहुंच चुका है राडार से जुड़ा तकनीकी उपकरण, जल्द आयेगी टीम
पूर्णिया. जिले में मौसम विज्ञान केंद्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए यह बेहद अच्छी खबर है कि बहुप्रतीक्षित डॉपलर वेदर रडार की पहली खेप पूर्णिया पहुंच चुकी है. सीमांचल और कोसी क्षेत्र में अब मौसम की मार से होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा. पूर्णिया स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में अत्याधुनिक डॉपलर वेदर रडार लगाने का काम तीव्र गति से चल रहा है. रडार की पहली खेप, जिसमें विशालकाय एंटीना और कुछ अन्य महत्वपूर्ण यूनिट यहां पहुंच चुकी है.बताते चलें कि जिले के मौसम विज्ञान केंद्र में करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा यह रडार बिहार की राजधानी पटना के बाद दूसरा सबसे आधुनिक वेदर रडार होगा. मौसम विज्ञान केंद्र परिसर में पहली खेप के तहत रडार का मुख्य एंटीना, ट्रांसमीटर रिसीवर यूनिट, बैट्री सहित अन्य तकनीकी उपकरण विशेष वाहनों से लाए गए हैं. जबकि दूसरी खेप में रडार का टावर और पोर्टा केबिन की सामग्री सहित अन्य सामग्री अगले हफ्ते आने वाली है. सभी उपकरण बेल के तहत बेंगलोर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं. वहीं रडार प्लेटफ़ॉर्म के निकट ही डिजिटल जेनरेटर भी स्थापित की जा चुकी है. 250 किमीटर तक मौसम के मिजाज पर रखी जा सकेगी नजर
इस रडार के लग जाने के बाद आंधी, तूफान, भारी बारिश और वज्रपात की सटीक जानकारी 2 से 3 घंटे पहले ही प्राप्त हो जायेगी. इस रडार की रेंज लगभग 250 किलोमीटर तक होगी, जिससे पूर्णिया के अलावा कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा और भागलपुर जैसे पंद्रह से अधिक जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इतना ही नहीं नेपाल की तराई और हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का सटीक आकलन होने से कोसी क्षेत्र में आने वाली अचानक बाढ़ की सूचना भी समय पर मिल सकेगी. मौसम विज्ञान केंद्र में स्थापित हो रहे रडार को जमीन से करीब 60 फीट की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है ताकि सिग्नल में कोई बाधा न आए. इसके लिए विशेष प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है. मौसम विज्ञान केंद्र परिसर में रडार और अन्य उपकरणों के आ जाने के बाद विशेषज्ञों की टीम जल्द ही एंटीना असेंबली और कैलिब्रेशन का काम शुरू करेगी. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले मार्च आखिरी सप्ताह में यह पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा.किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
मौसम केंद्र में इस रडार के पूर्ण क्रियाशील हो जाने के बाद किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. सीमांचल एक कृषि प्रधान क्षेत्र है. समय पर बारिश और तूफान की जानकारी न मिलने के कारण मक्का, जूट, केला सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान होता है, इस रडार के शुरू होने से किसान मौसम के मिजाज को देखते हुए अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकेंगे. मौसम विज्ञान केंद्र में रडार लगने के बाद पूर्णिया एअरपोर्ट को भी मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी. वहीं मौसम केंद्र में रडार के साथ 59 लाख की लागत से चहारदीवारी निर्माण का काम युद्ध स्तर पर जारी है. रडार उपक्रम को लेकर इसके प्लेटफॉर्म निर्माण का काम पूरा हो गया है. यह परियोजना भारत मौसम विज्ञान विभाग की ””””मिशन मौसम”””” योजना का हिस्सा है. जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति देश को अधिक सतर्क बनाना है.कहते हैं अधिकारीपूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र में रडार उपक्रम लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. इसके तहत रडार निर्माण की पहली खेप पहुंच गयी है. इसमें रडार की एंटीना सहित अन्य सामग्री शामिल है. इसके अलावा मौसम विज्ञान केंद्र के चारों तरफ चाहरदीवारी का निर्माण कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है. यह रडार तूफान के साथ आंधी और बारिश का सटीक अनुमान लगाकर लोगों को तीन घंटा पहले आगाह करेगा. बिहार के पटना के बाद पूर्णिया दूसरा जिला है जहां रडार स्थापित हो रहा है.फोटो परिचय: 4 पूर्णिया 17- बीरेंद्र कुमार, प्रभारी मौसम विज्ञान केंद्र पूर्णिया……………….
एक नजर57 करोड़ की लागत से हो रहा मौसम के रडार का निर्माण
59 लाख की लागत से बनायी जा रही विभाग की चहारदीवारी10 फीट तक की गहराई तक रडार के लिए हुई है खुदाई
60 फीट ऊंचाई पर लगाए जाएंगे रडार के उपक्रम250 किमी से अधिक दायरे तक का मौसम बताएगा रडार
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