Purnia News: ‘थाना का कोई राज जानता था ललित’, परिजनों ने जताई साजिश की आशंका, जख्म के निशान खड़े कर रहें हैं कई सवाल
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Jun 2025 9:33 PM
Purnia News: पूर्णिया के सरसी थाना में कार्यरत कार्यपालक सहायक ललित कुमार की संदिग्धावस्था में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. उसका शव शनिवार की देर शाम थाने से महज सौ मीटर दूर एक क्वार्टर में फंदे से लटका मिला था. पुलिस इसे सुसाइड का केस मान रही है जबकि परिजनों का आरोप है कि यह मामला आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का है. पुलिस अफसरों ने उसकी पीट-पीट हत्या कर दी फिर मामले को रफा-दफा करने के लिए उसे सुसाइड का रूप दे दिया.
Purnia News: परिजनों द्वारा लगाये गये गंभीर आरोपों के बीच पूर्णिया के एसपी कार्तिकेय शर्मा ने सरसी थानाध्यक्ष मनीष चन्द्र यादव को तत्काल लाइन हाजिर कर दिया है और उसकी जगह कटिहार मोड़ टीओपी प्रभारी अभय रंजन को नया थानाध्यक्ष बनाया है. बनमनखी के एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि मृतक के बड़े भाई के आवेदन पर सरसी थाने में थानाध्यक्ष रहे मनीष चंद्र यादव एवं एसआइ आयुष राज के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जायेगा.
परिजनों ने जमकर हंगामा किया
रविवार की सुबह जीएमसीएच के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर परिजनों ने जमकर हंगामा किया. परिजन सरसी थानाध्यक्ष मनीष चन्द्र यादव, एसआइ आयुष राज समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग पर अडिग थे. बाद में काफी समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हुआ.
हंगामा की सूचना पर सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार, सहायक खजांची थानाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार, फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी प्रभारी शबाना आजमी सदल बल पहुंचे. तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड में प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम कराया गया.
पूरे पोस्टमार्टम का वीडियोग्राफी भी करायी गयी. इसबीच, सूचना मिलने पर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव, पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा, पूर्व मंत्री सह कसबा विधायक अफाक आलम, पूर्व विधायक प्रदीप दास आदि पोस्टमार्टम पहुंचकर मृतक के परिजनों से मिलकर घटना की जानकारी ली. जिले के जलालगढ़ थाना के भठेली गांव का निवासी 28 वर्षीय ललित पिछले दो सालों से सरसी थाना मे कार्यरत था.
मृतक ललित के शरीर पर मिले गहरे जख्म
मृतक के शरीर पर गहरे जख्म के निशान पाये गये हैं. ललित के शरीर के पिछले हिस्से के कमर से लेकर घुटने के ऊपर तक गहरे जख्म पाये गये हैं. परिजनों का आरोप है कि पुलिसवालों ने लोहे के रड से उसकी काफी पिटाई की जिससे उसकी मौत हो गयी. मृतक का बड़ा भाई पप्पू कुमार, लाल बहादुर, पंकज कुमार ने बताया कि जख्म के निशान देखकर साफ प्रतीत होता है कि उसने सुसाइड नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या की गयी है. इनलोगों ने शनिवार को मृतक ललित कुमार थाना में डयूटी पर शाम तक नहीं पहुंचा तो पुलिस द्वारा इसका पता तक नहीं लगाया गया जबकि थाना से उसके सरकारी क्वार्टर की दूरी महज 100 मीटर होगी.
शनिवार को सुबह से फोन नहीं उठा रहा था ललित
मृतक के भाई पप्पू कुमार ने बताया कि ललित रोज घर फोन करता था. शनिवार को जब वह सुबह से दोपहर तक घर फोन नहीं किया था. जब उनलोगों ने ललित के मोबाइल पर फोन किया तो रिंग होने के बावजूद कॉल रिसिव नहीं हो रहा था. कई बार फोन करने के बाद भी जब ललित ने फोन नहीं उठाया तो देर शाम को उसकी खबर लेने सरसी थाना पहुंचे. देखा कि उसके क्वार्टर का दरवाजा बंद था.
दरवाजे को धक्का देते ही खुल गया. जहां देखा कि ललित फंदे से मृत लटका हुआ था और उसके शरीर के पैर का ठेहूना जमीन से लगा हुआ है. इसके बाद घटना की तत्काल सूचना सरसी थाना की पुलिस को दी गयी. सूचना के बाद एफएसएल एवं डॉग स्क्वायड टीम पहुंच कर घटनास्थल एवं शव की बारीकी से जांच पड़ताल की. पुलिस डॉग से घटना में मदद नहीं मिली.
परिजन पूछ रहे सवाल?
पूर्णिया. सरसी थाने में कार्यरत कार्यपालक सहायक ललित कुमार की संदिग्धावस्था में हुई मौत से एक दिन पूर्व यानि शुक्रवार को आखिर थाना परिसर में ललित के साथ क्या हुआ कि वह दूसरे दिन ड्यूटी पर वापस नहीं आया. इस सवाल का जवाब परिजन ढूंढ़ रहे हैं. परिजनों ने बताया कि बीते 30 मई को शाम 4 बजे ललित को थाना में काफी प्रताड़ित किया गया था.
इसके बाद ही वह अपने आवास गया, जहां से दूसरे दिन शनिवार को उसका शव निकला. परिजनों ने बताया कि सरसी थाना में ललित कुमार विगत डेढ़ वर्ष से कार्यरत था. इससे पूर्व वह भवानीपुर थाना में था. सरसी थाना में कार्य करने के दौरान ललित पूर्णिया के जनता चौक पर रह कर आना जाना करता था. लेकिन थानाध्यक्ष के दबाव में आकर उसने डेढ़ महीना पहले सरसी थाना परिसर स्थित कोशी कॉलोनी के क्वार्टर में आकर रहने लगा.
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ललित ने परिजनों को बताया था परेशानी का वजह
परिजनों ने बताया कि ललित हर दिन घरवालों से बात करता था. अक्सर वह परेशान रहता था. परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले ललित घर आया था और बता रहा था कि सरसी थानाध्यक्ष मनीष चन्द्र यादव एवं एसआई आयुष राज उसे विभिन्न कारणों से प्रताड़ित किया करते थे. इस वजह से वह नौकरी छोड़ना चाहता है. परिजनों को शक है कि थाना का कोई ऐसा राज है, जो ललित जानता था. इस वजह से उसे रास्ते से हटा दिया गया.
परिजनों ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व ललित को कार्यपालक सहायक की नौकरी मिली. 28 वर्षीय ललित कुमार अविवाहित था. ललित मूल रूप से जिले के जलालगढ़ थाना के भठेली गांव का निवासी था. उसके पिता परमेश्वर लाल दास श्रीनगर अंचल में राजस्व कर्मी थे. मृतक पांच भाई एवं तीन बहन में वह सबसे छोटा था. घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया है.
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घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग
परिजनों के अलावा कार्यपालक सहायक सेवा संघ के जिलाध्यक्ष मनु कुमार ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. इसके अलावा लाइन हाजिर किये गये सरसी थानाध्यक्ष मनीष चन्द्र यादव को अविलंब सस्पेंड कर विभागीय कार्रवाई की मांग की है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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