फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ को दर्शकों ने काफी सराहा

Published by : ARUN KUMAR Updated At : 06 Feb 2026 5:55 PM

विज्ञापन

पूर्णिया

विज्ञापन

पूर्णिया. बेगूसराय बीहट में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता तथा कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के समापन के दिन फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ की सफल प्रस्तुति नाटक के निर्देशक विश्वजीत कुमार सिंह नेतृत्व में की गयी. फणीश्वरनाथ ”रेणु” की यह कहानी बिहार के आंचलिक परिवेश और ग्रामीण टोलों के बीच की आपसी खींचतान को खूबसूरती से दर्शाती है. कहानी की शुरुआत तब होती है जब गांव के महतो टोले के पंच पिछले 15 महीनों से दंड-जुर्माने का पैसा जमा करके रामनवमी के मेले से एक पेट्रोमैक्स (पंचलाइट) खरीदकर लाते हैं. दरअसल, गांव के अलग-अलग टोलों में आपसी होड़ लगी रहती थी; बाभन टोले (ब्राह्मण टोले) के पास पहले से ही अपनी पंचलाइट थी और वे हमेशा महतो टोले को नीचा दिखाने की ताक में रहते थे. ऐसे में महतो टोले के लिए यह पंचलाइट महज एक लालटेन नहीं, बल्कि बाभन टोले के सामने अपनी नाक ऊंची रखने और अपनी प्रतिष्ठा साबित करने का एक जरिया था. बड़े धूमधाम से पंचलाइट को गांव लाया गया और तय हुआ कि इसके उजाले में पहली बार कीर्तन और पूजा-पाठ होगा लेकिन ऐन वक्त पर महतो टोले की इज्जत मिट्टी में मिलती दिखने लगी, क्योंकि किसी को भी पंचलाइट जलाना नहीं आता था. बाभन टोले के लोग यह सुनकर मजाक उड़ाने लगे और ताना मारा कि “कान पकड़कर पांच बार उठो-बैठो तो पंचलाइट जलने लगेगी. ” टोले के सरदार और दीवान जी इस अपमान से तिलमिला उठे, लेकिन अपनी जाति की आन बचाने के लिए उन्होंने दूसरे टोले की मदद लेना स्वीकार नहीं किया. इसी संकट के बीच मुनरी नामक लड़की के जरिए पता चलता है कि टोले का बहिष्कार किया गया युवक गोधन पंचलाइट जलाना जानता है. गोधन को पंचायत ने इसलिए बिरादरी से निकाला था क्योंकि वह मुनरी को देखकर सिनेमा का गाना गाता था लेकिन जब टोले की प्रतिष्ठा दांव पर लगी, तो सरदार ने पुरानी रंजिश भुलाकर गोधन को बुलाने का फैसला किया. गोधन ने बड़ी चतुराई से बिना स्पिरिट के, सिर्फ नारियल के तेल से पंचलाइट जला दी. जैसे ही पंचलाइट की रोशनी चारों ओर फैली, महतो टोले के लोगों का चेहरा खिल उठा और बाभन टोले के व्यंग्य शांत हो गए. गोधन की इस सेवा से प्रसन्न होकर सरदार ने उसके सारे पिछले अपराध माफ कर दिए और बड़े प्यार से कहा – “तुम्हारा सात खून माफ, खूब गाओ सलीमा का गाना “. नाटक में निर्देशक विश्वजीत कुमार सिंह ने रेणु की कहानी को जीवंत कर दिया.नाट्य महोत्सव में पंचलाइट नाटक की प्रस्तुति को खूब पसंद किया दर्शकों ने सफल प्रस्तुति के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार का केंद्र पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता द्वारा निर्देशक विश्वजीत कुमार सिंह समेत दल के सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया. नाटक में सूत्रधार सूचित कुमार पप्पू, गुलरी: गरिमा कुमारी,बाभनसरपंच: सुमित सिंह, महतोटोला सरपंच: अजीत कुमार सिंह, दीवान: अभिनव कुमार, बिलवा/नितिन: अंजनी कुमार श्रीवास्तव, अनूप/कल्लू-शिवाजी राम राव, गोधन- प्रवीण कुमार, मुनरी -अदिति सिंह,सरपंचनी -मिताली भौमिक,कनेली/निकिता: साक्षी झा,काका की भूमिका में कुंदन कुमार सिंह,आकाश की भूमिका में वैभव कुमार, ग्रामीण की भूमिका में दक्ष-साहिल कुमार,संतोष कुमार. इस नाटक में संगीत-रामपुकर टूटू,लाइट: रजनीश कुमार, निर्देशक : विश्वजीत कुमार सिंह.

विज्ञापन
ARUN KUMAR

लेखक के बारे में

By ARUN KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन