महालया आज, धरती पर उतरेंगी मां दुर्गा

Updated at : 01 Oct 2024 6:01 PM (IST)
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महालया आज, धरती पर उतरेंगी मां दुर्गा

शारदीय नवरात्र

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शारदीय नवरात्र

अहले सुबह से आज गूंजेंगे ”जागो तुमि जागो” के बोल

चंडी पाठ से भक्तिमय हो जाएगा पूर्णिया का वातावरण

नौ दिनों तक प्रज्ज्वलित रहेगी आस्था की ज्योति, भोग लगेंगे

कलश स्थापना के साथ कल से शुरू होगा शारदीय नवरात्र

मंदिरों व पंडालों में अंतिम चरण में है पूजन अनुष्ठान की तैयारी

पूर्णिया. दुर्गा पूजा का त्योहार यानी शारीदय नवरात्र बुधवार को महालया के बाद शुरू हो जाएगा. गुरुवार तीन अक्टूबर को कलश स्थापित कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन अनुष्ठान किया जाएगा. 12 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर मां की प्रतिमा के विसर्जन के साथ त्योहार का समापन होगा. नवरात्र का त्योहार मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है. नौ दिन तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा आराधना करेंगे. इससे पहले बुधवार की सुबह रेडियो पर महालया सुनने की होड़ रहेगी.

गौरतलब है कि महालया को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आती हैं. देवी के इसी क्रम को महालया कहते हैं. वहीं इस दिन को बुराई पर अच्छाई के रूप में भी देखा जाता है. इसके अगले दिन शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है और कलश स्थापना की जाती है. पूर्णिया के बंगाली समाज द्वारा इसकी तैयारी कर ली गयी है. वे लोग ””””जागो तुमि जागो”””” (तुम जागो) कहकर अलसुबह उठेंगे और ”””” चंडी पाठ सुनेंगे. इसके लिए रेडियो के साथ ही घर-घर में मोबाइल पर भी देवी से संबंधित श्लोक व गीत सुनने की व्यवस्था की गयी है. चंडी पाठ के महिषासुर मर्दिनी अध्याय में मां दुर्गा के जन्म और राक्षस राजा महिषासुर पर उनकी अंतिम विजय का वर्णन है. इसे सुनने के बाद ही लोग अन्न-जल ग्रहण करेंगे.

दुर्गा पूजा के उत्सव को ले उत्साहित हैं शहरवासी

मां दुर्गा की उपासना को लेकर पूर्णियावासी काफी उत्साहित हैं. शहर से लेकर गांव तक पूरे जोर-शोर से दुर्गा उत्सव की तैयारियां चल रही हैं. कल यानी बुधवार को महालया मनाया और परसों यानी गुरुवार को ग्रह गोचरों के शुभ संयोग में घरों, दुर्गा मंदिरों से लेकर पूजा पंडालों तक में कलश स्थापना होगी. कलश स्थापना के साथ नौ देवियों की पूजा शुरू की जायेगी. यह नवरात्र प्रतिपदा से शुरू होकर विजयादशमी 12 अक्तूबर को समाप्त होगा. कलश स्थापना को लेकर इन दिनों पूजन सामग्री, मां की पोशाक, चुनरी और कलश आदि की मांग बढ़ी है. भक्त कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं.

देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की होगी आराधना

शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा में तीन अक्तूबर (गुरुवार) को हस्त नक्षत्र, ऐंद्र योग एवं जयद् योग के साथ बुध प्रधान कन्या राशि में चंद्र व सूर्य की उपस्थिति में शुरू होगा. नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होगी. शारदीय नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की उपासना की जायेगी. सनातन धर्मावलंबी निराहार या फलाहार रहते हुए अपने घर, मंदिर व पूजा पंडालों में घट स्थापना के बाद दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामरक्षा स्त्रोत्र, दुर्गा सहस्त्र नाम, अर्गला, कवच, कील, सिद्ध कुंजिका स्त्रोत्र आदि का पाठ आरंभ करेंगे.

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कलश स्थापना : शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि सुबह से देर रात तकहस्त नक्षत्र शाम 03:30 बजे तकशुभ योग मुहूर्त प्रातः 05:44-07:12 बजे तकचर मुहूर्तसुबह 10:10-11:38 बजे तकलाभ मुहूर्तदोपहर 11:38- 01:07 बजे तकअमृत मुहूर्तदोपहर 01:07-02:35 बजे तकअभिजीत मुहूर्तदोपहर 11:15-12:02 बजे तकशुभ मुहूर्तशाम 04:04-05:33 बजे तक(अलग-अलग पंचांग के अनुसार समय में कुछ फेरबदल संभव )

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मां दुर्गा के नौ रूपों की जानें खासियत

1. शैलपुत्री : दुर्गा के इस रूप से हमें स्वाभिमानी बनने की प्रेरणा मिलती है. 2. ब्रह्मचारिणी : मां का यह यह रूप तपस्या का प्रतीक है. 3. चन्द्रघण्टा : संदेश मिलता है कि संसार में सदा प्रसन्न होकर जीवन यापन करना चाहिए. 4. कूष्माण्डा : मां का यह स्वरूप हमें संसार में स्त्री का महत्व समझाता है. 5. स्कंद माता : मां का यह रूप हमें बताता है कि स्त्री हो या पुरुष, हर कोई ज्ञान प्राप्त करने का अधिकारी है. 6. कात्यायनी : यह रूप घर-परिवार में बेटी की महत्ता को बताता है. 7. काल रात्रि : मां का यह रूप हमें स्त्री के भीतर विद्यमान अपार शक्ति का भान कराता है. 8. महागौरी : मां का यह रूप हमें हर परिस्थिति में संयमित रहने की सीख देता है. 9. सिद्धिदात्री : मां सिद्धिदात्री यानी हर सिद्धि को देने वाली हैं. स्त्रियों में भी यह गुण विद्यमान होता है.

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पूजन सामग्रियों का सजा बाजार, खरीदारी भी शुरू

दुर्गा उत्सव को लेकर शहर के बाजार पूजन सामग्रियों से सज गये है. पूजा के लिए मिट्टी के कलश, नारियल, चुनरी, रोली, घी, धूप बत्ती, अगरबत्ती, हुमाद, सुपारी, जौ, कपूर सहित पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री की लोग खरीदारी कर रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि महंगाई के कारण लोगों के घर का बजट भले ही गड़बड़ा रहा है, लेकिन देवी की आराधना करने में भक्त कोई कमी नहीं करते दिख रहे हैं. श्रद्धालुओं के बजट के अनुसार पूजन सामग्री मौजूद हैं. नौ दिन के व्रत में अन्न से परहेज किया जाता है, इसलिए बाजार में कुट्टू, सिंघाड़ा और साबूदाना अन्य सामग्रियों के भी स्टॉक दुकानदारों ने कर रखा है.

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फोटो. 1 पूर्णिया 4- सांकेतिक तस्वीर

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