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बढ़ रहा है छोटे पशुओं में वायरस जनित लंपी चर्मरोग

एक सप्ताह के अंदर पहुंचे एक दर्जन से अधिक मामले

एक सप्ताह के अंदर पहुंचे एक दर्जन से अधिक मामले

पूर्णिया. जिले में एक बार फिर से वायरस द्वारा पशुओं में फैलने वाला चर्मरोग लंपी अपने अस्तित्व में आ गया है. मिली जानकारी के अनुसार बीते एक सप्ताह के अन्दर इसके दर्जन भर से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. धीरे धीरे इसका असर स्वस्थ पशुओं में भी फ़ैल रहा है. पशु चिकित्सकों ने इसे एक प्रकार का वायरस जनित संक्रामक रोग बताया है तथा पीड़ित पशु को अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग रखते हुए उपचार और देखभाल की सलाह दी है. जिले में फिलहाल इस रोग का असर छोटे पशुओं में मुख्य रूप से बाछा बाछियों में मिल रहे हैं. हालांकि इस रोग के खिलाफ पशुओं के टीकाकरण कराये जाने से इस रोग के होने की संभावना खत्म हो जाती है लेकिन पशुपालकों द्वारा पशुओं के टीकाकरण के प्रति उदासीन रवैया रोग की संभावना को कायम रखे हुए है.

क्या है वायरस जनित चर्मरोग लंपी

लंपी वायरस से फैलने वाला एक चर्म रोग है. इस रोग में मवेशियों के पूरे शरीर में बड़े बड़े फोड़े जैसी गांठें बन जाती हैं. प्रभावित पशु खाना पीना कम कर देते हैं जिससे उनमें शारीरिक कमजोरी आने लगती है. हालांकि लगभग दो हफ्ते में बेहतर प्रबंधन से पशु स्वस्थ हो जाते हैं बावजूद इसके कुछ केस में पशुओं की मृत्यु की भी संभावना रहती है. इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण एक बेहतर उपाय है.

पशुओं में टीकाकरण के प्रति पशुपालकों का रवैया है उदासीन

जिले में पशु टीकाकरण को लेकर पशुपालकों का रवैया लगभग उदासीन ही है. विभाग द्वारा समय समय पर निःशुल्क पशु टीकाकरण चलाए जाने के बावजूद अमूमन किसान भाई इसे नजरअंदाज कर देते हैं. टीकाकरण अभियान को लेकर प्रभारी पशुचिकित्सक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि निःशुल्क पशु टीकाकरण के लिए टीकाकर्मी जब पशुपालकों के घर जाते हैं तो उनके द्वारा किसी न किसी प्रकार का बहाना बनाया जाता है और टीकाकर्मियों को बार बार बाद में आने को कहा जाता है. वहीँ टीकाकरण के दरम्यान पशुपालक का निबंधन एवं ओटीपी के मामले में भी लोग आनाकानी करते हैं.

यह रोग वायरस की वजह से फैलता है. फिलहाल लगभग 20 की संख्या में छोटे बछड़ों व बाछियों में इसकी शिकायत आई है. प्रभावित पशु को अलग रखते हुए उसके खानपान, आसपास की साफ़ सफाई का ध्यान रखें. टीकाकरण से बचाव संभव है. उचित रखरखाव से कुछ दिनों में यह रोग स्वतः ठीक हो जाता है.

फोटो – 11 पूर्णिया 2- डॉ. राजीव कुमार, पशुचिकित्सा पदाधिकारीउपचार के साथ साथ बीमार पशुओं के शेड को सैनेटाईज करते रहने की जरुरत है. आसपास जल जमाव एवं गन्दगी न रहे. भोजन और पानी स्वच्छ एवं ताजे ही खाने पीने दें. बासी से परहेज करते हुए चारे में हरा एवं सूखा और पौष्टिक तत्वों व मिनरल्स का समावेश जरुरी है इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है.

फोटो – 11 पूर्णिया 3- डॉ. मनोहर कुमार, पशु शल्य चिकित्सक

पीड़ित पशुओं का रख रखाव

– प्रभावित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें- पीड़ित मवेशी को दिन में दोबार ठन्डे पानी से स्नान करायें

– धुप और वर्षा से उन्हें बचाकर रखें- साफ़ सफाई का बेहतर प्रबंधन करें- घाव हो जाने पर नारियल तेल और कपूर का मिश्रण लगाएं- पशु चिकित्सक से परामर्श लें- भोजन में पौष्टिकता बनाए रखें

फोटो – 11 पूर्णिया 4- चर्मरोग लंपी से पीड़ित पशु

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Prabhat Khabar News Desk
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