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पूर्णिया विवि में महज 24 घंटे में पत्र निकाल शोधार्थी का हुआ पीएचडी वाइवा

Updated at : 19 Jan 2025 5:23 PM (IST)
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पूर्णिया विवि  में महज 24 घंटे में पत्र निकाल शोधार्थी का हुआ पीएचडी वाइवा

डीन साइंस और परीक्षा नियंत्रक हुए आमने-सामने

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– मामले में डीन साइंस और परीक्षा नियंत्रक हुए आमने-सामने – कुलपति को लिखे पत्र में डीन साइंस ने परीक्षा नियंत्रक पर लगाये गंभीर आरोप – विवि परीक्षा नियंत्रक ने कहा- डीन साइंस ने मेरे आत्मसम्मान को पहुंचायी ठेस अभिषेक भास्कर, पूर्णिया. पूर्णिया विवि में आनन-फानन में पीएचडी वाइवा कराये जाने का मामला सामने आया है. आलम यह रहा कि केवल एक दिन पहले शाम में चिट्ठी निकली और अगले दिन दिन में पीएचडी शोधार्थी का वाइवा संपन्न हो गया. महज 24 घंटे में पत्र निकाल शोधार्थी का पीएचडी वाइवा कराये जाने का यह मसला तब उजागर हो गया जब मामले में पूर्णिया विवि के डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार और परीक्षा नियंत्रक प्रो एके पांडेय आमने-सामने हो गये. जहां डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने कुलपति को पत्र देकर अपनी आपत्ति जतायी है तो वहीं परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके पांडे ने डीन साइंस पर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है. जानकारी के अनुसार, पूर्णिया विवि में बीते 18 जनवरी को स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग की शोधार्थी पायल कुमारी की पीएचडी मौखिकी के लिए विवि परीक्षा विभाग ने 17 जनवरी को एक पत्र जारी किया. इस मामले में डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार का दावा है कि इस पीएडी मौखिकी के लिए विवि परीक्षा विभाग ने विहित प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया. और तो और संकायाध्यक्ष को ही बायपास कर पीएचडी वाइवा करा लिया. डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने कुलपति को लिखे पत्र में बताया कि पीजी जंतु विज्ञान विभाग की एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने उन्हें 17 जनवरी की शाम 4 बजे विवि परीक्षा विभाग का पत्र वाट्सएप किया जिसमें बताया कि 18 जनवरी को उक्त शोधार्थी का पीएचडी वाइवा है. डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने वीसी को लिखे पत्र में बताया कि यह पत्र विवि परीक्षा नियंत्रक द्वारा मुझे सीधे प्रेषित किया जाना चाहिए था. मगर परीक्षा नियंत्रक ने ऐसा नहीं किया. डीन साइंस ने दिया नियम का हवाला, पूछा- क्यों आयी जल्दबाजी की नौबत पूर्णिया विवि के कुलपति को लिखे पत्र में डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने नियमों का भी हवाला दिया है और यह जानना चाहा कि आखिर एक शोधार्थी का पीएचडी वाइवा कराने की जल्दबाजी क्यों आन पड़ी. इसमें बताया कि किसी भी शोधार्थी द्वारा अंतिम रूप से शोध प्रबंधक जमा करने के बाद परीक्षा विभाग द्वारा बाह्य परीक्षा नियंत्रक एवं अंत: परीक्षक की नियुक्त करने हेतु विशेषज्ञों की सूची संकायाध्यक्ष की सहमति से बनायी जाती है. उनकी सहमति प्राप्त होने के बाद ही शोध प्रबंध बाह्य परीक्षक एवं अंत: परीक्षक के मूल्यांकन हेतु प्रेषित किया जाता है. परीक्षकों की रिपोर्ट आने के बाद पुन: नामित परीक्षक से उनकी सुविधा के अनुसार आगमन की तिथि की सहमति प्राप्त होने के बाद ही मौखिकी के लिए तिथि निर्धारित की जाती है. स्वाभाविक रूप से सारी प्रक्रिया पूरी करने में लंबी अवधि लगती है. डीन साइंस ने लिखा – विवि की प्रतिष्ठा को लगी ठेस कुलपति को लिखे पत्र में डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने बताया कि 17 जनवरी को पत्र देकर 18 जनवरी को आनन-फानन में पीएचडी वाइवा करा लेना हास्यास्पद है. ऐसा करने से विवि की प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है. डीन साइंस का आरोप- विवि अधिनियम का उल्लंघन कर रहे परीक्षा नियंत्रक कुलपति को भेजे पत्र में डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार ने लिखा है कि इस मामले में परीक्षा नियंत्रक प्रो. ए के पांडेय द्वारा विवि अधिनियम का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और मनमाने ढंग से अपने स्तर से निर्णय लिया जा रहा है. डीन साइंस का पक्ष 18 जनवरी को स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग की शोधार्थी पायल कुमारी का पीएचडी वाइवा आनन-फानन में कराया गया है जिसकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी. इस प्रक्रिया में डीन साइंस की अहम भूमिका होती है. मगर परीक्षा नियंत्रक ने डीन साइंस के पद व अधिकार की अनदेखी करते हुए यह पीएचडी वाइवा संचालित कराया. इस प्रकार से आनन-फानन में पीएचडी वाइवा संचालित करना संदेह के घेरे में है. मैंने इस बारे में कुलपति को पत्र देकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है. – प्रो संजीव कुमार, डीन साइंस सह प्रधानाचार्य, मारवाडी कॉलेज फोटो. 19 पूर्णिया 7 ——————- परीक्षा नियंत्रक का पक्ष डीन साइंस ने मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाया है. पीएचडी मौखिकी के लिए डीन साइंस की जितनी भूमिका होनी चाहिए, उसका परीक्षा विभाग ने निर्वहन किया है. शोधार्थी को कुछ समस्या थी जिसके कारण उसने पीएचडी वाइवा जल्द कराने का आग्रह किया. इसी आग्रह पर बाह्य परीक्षक से संपर्क करने पर 18 जनवरी की तारीख मिल गयी. इसके बाद मैंने व्यक्तिगत रूप से मोबाइल पर डीन साइंस प्रो. संजीव कुमार से बात कर उन्हें 18 जनवरी पीएचडी वाइवा लिये जाने के बारे में सूचना दी. हालांकि इस बातचीत के क्रम में डीन साइंस ने अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. मुझपर पैसे खाने का भी आरोप लगाया. – प्रो एके पांडेय, परीक्षा नियंत्रक, पूर्णिया विवि

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