पूर्णिया में बारिश झेलने को तैयार नहीं बिजली का सप्लाई सिस्टम

Updated at : 19 Jul 2024 5:56 PM (IST)
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नहीं हो सकी है माॅनसून पूर्व की तैयारी

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तेज हवा शुरू होते ही गुल हो जाती है बिजली, नहीं हो सकी है माॅनसून पूर्व की तैयारी

पूर्णिया. जिले में बिजली आपूर्ति का सिस्टम मौसम की गरमाहट और बारिश की बौछार झेलने की स्थिति में नहीं है. बारिश की रिमझिम फुहारों के साथ यहां आपूर्ति ठप हो जाती है. अगर सिर्फ बारिश हुई तो उसके खत्म होते ही बिजली आ जाती है पर यदि बारिश के साथ तेज हवा भी चली तो बिजली कब आयेगी इसकी गारंटी नहीं. आलम यह है कि शहर का हर मुहल्ला बिजली की कटिंग और ट्रिपिंग से परेशान है. बिजली की आपूर्ति नहीं होने से जेनरेटर का इस्तेमाल बढ़ रहा है जिससे न केवल अतिरिक्त खर्च हो रहा है बल्कि प्रदूषण का भी फैलाव हो रहा है. दरअसल, पूर्णिया के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में विद्युतापूर्ति की व्यवस्था लगभग चरमरा गई है. हालांकि मानसून का आगाज हो गया है पर अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है पर यह माना जा रहा है कि इस स्थिति में लोगों को परेशानी झेलनी पड सकती है. ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि विभागीय स्तर पर इस साल मानसून पूर्व की तैयारी पूरी नहीं हो सकी है. तकनीकी जानकारों का मानना है कि बारिश में विद्युतापूर्ति के बार बार ब्रेक डाउन करने की संभावना अधिक हो जाती है. यही वजह है कि जगह जगह घंटों बिजली गुल हो जाती है. शहर के कई हिस्सों में तो पूरी रात बिजली गायब हो जाती है. पूछे जाने पर कभी लोड शेडिंग तो कभी कोई तकनीकी बहाना बना दिया जाता है. बीती रात भी गुलाबबाग के साथ रामबाग, खुश्कीबाग, शांति नगर समेत कई मोहल्लों में भी लोगों को बिजली की किल्लत झेलनी पड़ी जबकि उमस भरी गर्मी उफान पर है.

चरमराने लगी है बिजली आपूर्ति व्यवस्था

पूर्णिया के शहरी एवं ग्रामीण फीडरों की ढुलमुल व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग पहले से होती रही है पर कंपनी इस मामले में उदासीन नजर आ रही है. इसी का नतीजा है कि गर्मी के इस मौसम में विद्युतापूर्ति व्यवस्था चरमराने लगी है. नतीजतन यहां के उपभोक्ता बिजली संकट झेलने को विवश हो रहे हैं. जानकारों का कहना है कि ट्रांसमिशन लास के अलावा डिस्ट्रीब्यूसन लास एवं कामर्शियल लास के कारण भी बिजली की आपूर्ति बाधित हो जाती है. जानकारों की मानें तो अक्सर तार हिट हो जाता है या फिर कहीं लूज कॉन्टेक्ट रह जाता है तो वैसी स्थिति में पावर लास होता है और इसके कारण बिजली की आपूर्ति बाधित हो जाती है. उर्जा क्षरण को रोकने के लिए प्री मानसून की तैयारी का प्रावधान है. इसके तहत बरसात आने से पहले सिस्टम को दुरूस्त रखने के उपाय भी नहीं किए जा सके हैं.

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