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Cyber Crime: इंस्टाग्राम पर 10 लाख फॉलोअर्स, डिजिटल वॉलेट में 1.94 लाख डॉलर, साइबर क्राइम की दुनिया का किंगपिन निकला पूर्णिया का राकेश

Updated at : 17 Dec 2025 9:25 AM (IST)
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सांकेतिक

Cyber Crime: आइटी एक्ट एवं बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसके साथ ही आरोपी के विरुद्ध द बेनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम एक्ट 2019 एवं इंडियन टेली कम्युनिकेशन एक्ट की विभिन्न धारा लगायी गयी है.

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Cyber Crime: पूर्णिया. साइबर फ्रॉड के जरिये करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने के आरोप में गिरफ्तार युवक से पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना अंतर्गत डिमिया छतरजान पंचायत के श्रीनगर सहनी टोला निवासी दीपक मंडल के सबसे छोटा पुत्र राकेश कुमार को गहन पूछताछ के बाद साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस ने राकेश के घर से नौ मोबाइल, 01-01 एप्पल टैब, एप्पल का मेक बुक, लैपटॉप, विभिन्न बैंकों के पासबुक, एटीएम कार्ड के अलावा 2.80 लाख रुपये नकद बरामद किये हैं. प्रारंभिक जांच के दौरान साइबर पुलिस को राकेश के ट्रस्ट वॉलेट में 87,809 यूएस डॉलर मिला है. इसके बाद उसके सभी डिजिटल वॉलेट खंगाले गये. इसमें कुल 1,94,670 डालर क्रिप्टो करेंसी द्वारा जमा पाये गये.

खास बातें

  • रील से क्रिप्टो तक. पूर्णिया में साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा
  • प्रतिबंधित गेम, फर्जी वेबसाइट के नेटवर्क का पर्दाफाश
  • क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल वॉलेट के 1.94 लाख डॉलर जब्त
  • मोबाइल, मैकबुक और क्रिप्टो साम्राज्य
  • ऑनलाइन गेम प्रमोशन कर करोड़ों कमाये

प्रतिबंधित गेमिंग एप को प्रमोट करता था राकेश

राकेश द्वारा साइबर क्राइम से जुड़े पैसे पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज थाना के लोरिया निवासी रोहन कुमार के खाते में मंगाने और फिर एटीएम से रुपये निकाल लेने की जानकारी मिली है. 24 घंटे से अधिक समय तक की गयी गहन छानबीन के बाद मंगलवार को पूर्णिया के अपर पुलिस अधीक्षक आलोक रंजन ने बताया कि गिरफ्तार युवक के खिलाफ प्रतिबंधित गेमिंग एप को प्रमोट करने और फर्जी वेबसाइट बनाकर अवैध धन अर्जित करने के आरोप में आइटी एक्ट एवं बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसके साथ ही आरोपी के विरुद्ध द बेनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम एक्ट 2019 एवं इंडियन टेली कम्युनिकेशन एक्ट की विभिन्न धारा लगायी गयी है.

यह भी जानें

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?
क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल मुद्रा है, जिसका लेन-देन इंटरनेट के माध्यम से बिना बैंक या सरकार के सीधे नियंत्रण के होता है.

ट्रस्ट वॉलेट क्या है?
ट्रस्ट वॉलेट मोबाइल आधारित डिजिटल वॉलेट है, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी सुरक्षित रखी जाती है और वहीं से भेजी व प्राप्त की जाती है.

क्रिप्टो कहां रखी जाती है?
डिजिटल वॉलेट में जैसे ट्रस्ट वॉलेट, मेटामास्क आदि.

क्रिप्टो का इस्तेमाल कहां होता है?
निवेश, ऑनलाइन लेन-देन, अंतरराष्ट्रीय भुगतान और कई मामलों में साइबर ठगी व अवैध गतिविधियों में.

पुलिस के लिए चुनौती क्यों?
क्रिप्टो लेन-देन में बैंक खाता जरूरी नहीं होता, जिससे पैसे की ट्रैकिंग कठिन हो जाती है.

कैसे हुआ रैकेट का खुलासा

एएसपी आलोक रंजन ने बताया कि एएसपी ने बताया कि ‘शर्ट-इन’ नामक जांच एजेंसी की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी थी कि ‘प्रॉक्सी अर्थ डॉट ओआरबी’ वेबसाइट पर किसी भी भारतीय मोबाइल नंबर की पूरी जानकारी मिल जाती है. इसी आधार पर बिहार पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एसटीएफ पटना, आर्थिक अपराध इकाई पटना और साइबर थाना पूर्णिया की संयुक्त टीम से जांच शुरू करायी. जांच के क्रम में मुफस्सिल थाना के डिमिया निवासी दीपक मंडल का पुत्र राकेश मंडल का नाम सामने आया. पुलिस ने सबसे पहले राकेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की. इसके बाद पुलिस की जांच टीम ने दीपक मंडल एवं भाई हरिश्चंद्र से पूछताछ की.

रील बनाकर इंस्टाग्राम व टेलीग्राम पर करता था पोस्ट

पूछताछ में पता चला कि वर्ष 2024 से ही राकेश ऑनलाइन गेम, जिसमें तिरंगा, कैसीनो गेम जो प्रतिबंधित है, डीआईयू विन और द एक्ट आदि को प्रमोट करने वाले पोर्न हब शामिल हैं. इसका स्क्रीन रिकार्डिंग रील बनाकर इंस्टाग्राम एवं टेलीग्राम पर पोस्ट करता था. इससे वह पैसा कमा रहा था. उसके इंस्टाग्राम पर 10 लाख फॉलोअर हैं. इसी क्रम में उसे बहुत से लोगों से दोस्ती हुई. वह क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन करता था. ऑनलाइन गेम प्रमोशन में जो पैसा मिलता था, वह क्रिप्टो करेंसी में लगा देता था.

ऐसा ऐप, जिसमें कोई नंबर पर आ जाता था ओटीपी

इस धंधे में राकेश अकेला नहीं था. रौनक नाम का एक युवक उसका सहयोगी था. रौनक की संलिप्तता की जांच चल रही है. बताते हैं कि जब कमाई होने लगी, तब राकेश के साथ रौनक भी जुड़ गया. दोनों मिलकर ढेर सारे एप बनाकर टेलीग्राम में पोस्ट कर कमाई कर रहे थे. उन्होने बताया कि जांच के क्रम में पुलिस को एक ऐसा ऐप मिला, जिसमें किसी भी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डायल करने पर उसका ओटीपी आ जाता था. राकेश ने अपने वेबसाइट के चैनल को प्रमोट करने के लिए बहुत सारे लोगों से जुड़ने की योजना बनायी था. ‘कल्क डॉट एफ आई’ के नाम से इंवेस्टमेंट फ्रॉड ठगी के लिए राकेश एवं रौनक मिल कर क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए ऐप बना रहे थे.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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