पूर्णिया के इस मंदिर में एक साथ विराजते हैं राधा-कृष्ण और भगवान शिव, गुरुवार को उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

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महामाया मंदिर

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Aaj ka Darshan: क्या आपने कभी ऐसा मंदिर देखा है जहां भगवान शिव और राधा-कृष्ण एक ही परिसर में विराजमान हों और दोनों की एक साथ आराधना होती हो? पूर्णिया का यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ‘हर’ और ‘हरि’ की एकता का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है.

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पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट.

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Aaj ka Darshan: पूर्णिया शहर के लाइन बाजार स्थित महामाया मंदिर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं को एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति होती है. यहां भगवान शिव और राधा-कृष्ण एक ही मंदिर परिसर में विराजमान हैं. वर्षों से यह मंदिर शहरवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. गुरुवार को विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा-कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि सावन, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है.

जहां ‘हर’ और ‘हरि’ का एक साथ होता है दर्शन

सनातन परंपरा में भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण के संबंध को विशेष महत्व दिया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव श्रीकृष्ण के परम भक्त हैं, वहीं श्रीकृष्ण भी भगवान शिव की आराधना करते हैं. इसी कारण ‘हर’ और ‘हरि’ को एक ही परम शक्ति के दो स्वरूप माना जाता है.

पूर्णिया का महामाया मंदिर इसी आध्यात्मिक विचार को साकार करता है. यहां श्रद्धालु एक ही परिसर में भगवान शिव और राधा-कृष्ण के दर्शन कर अपनी पूजा-अर्चना पूरी करते हैं.

पांच दशक पुराना है महामाया मंदिर का इतिहास

लाइन बाजार के गंगा-दर्जिलिंग रोड के किनारे स्थित महामाया मंदिर का इतिहास करीब पांच दशक पुराना माना जाता है. घनी आबादी के बीच स्थित यह मंदिर आज भी शहर के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है.

स्थानीय लोग इस क्षेत्र को ‘नया टोला’ के नाम से भी जानते हैं. हर दिन यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन गुरुवार को राधा-कृष्ण की विशेष पूजा के कारण मंदिर में अधिक भीड़ देखने को मिलती है.

एक ही परिसर में विराजमान हैं कई देवी-देवता

महामाया मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां केवल भगवान शिव या राधा-कृष्ण ही नहीं, बल्कि देवी दुर्गा सहित कई अन्य देवी-देवताओं की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं.

मंदिर में सभी देवी-देवताओं की नियमित पूजा-अर्चना होती है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अलग-अलग देवताओं के दर्शन और पूजा करते हैं.

जन्माष्टमी और सावन में बदल जाता है मंदिर का स्वरूप

सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने के बावजूद जन्माष्टमी और सावन के महीने में यहां का माहौल पूरी तरह बदल जाता है.

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है. वहीं सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में वैसा ही वातावरण दिखाई देता है जैसा बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में देखने को मिलता है.

इन अवसरों पर मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था करती है और शाम के समय नियमित रूप से भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता है.

Aaj ka Darshan: पूर्णिया की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र

महामाया मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि पूर्णिया की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. यहां हर उम्र के श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं.

शहर की भागदौड़ के बीच यह मंदिर लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था लगातार मजबूत बनी हुई है.

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