पूर्णिया के गुलाबबाग का बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, जहां हर भक्त की पूरी होती है मुराद
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 15 May 2026 7:10 AM
पूर्णिया आज का दर्शन
Aaj Ka Darshan पूर्णिया के गुलाबबाग का बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में सावन और शिवरात्रि में दिखता है ‘मिनी बाबाधाम’ जैसा नजारा
Aaj Ka Darshan: पूर्णिया के गुलाबबाग स्थित Baba Siddheshwar Nath Temple श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. व्यापारिक नगरी गुलाबबाग के बीचोंबीच स्थित यह मंदिर दूर से ही अपनी भव्यता और ऊंचे गुंबद के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से माथा टेकने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.
मंदिर में सुबह और शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर आरती के समय पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा सिद्धेश्वर नाथ हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं, यही वजह है कि यहां हर दिन जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए लोगों का तांता लगा रहता है.
सुनौली चौक से दिख जाती है मंदिर की भव्यता
गुलाबबाग व्यापारियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है और यहां का सुनौली चौक इलाके की पहचान है. इसी चौक के समीप स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर वर्षों पुराना है. हाल के वर्षों में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद इसकी भव्यता और भी बढ़ गई है.
मंदिर का ऊंचा गुंबद दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. जैसे-जैसे लोग मंदिर के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे उनके भीतर श्रद्धा और भक्ति का भाव और गहरा होता जाता है.
राधा-कृष्ण समेत कई देवी-देवताओं का दरबार
इस मंदिर की खासियत सिर्फ भगवान शिव की पूजा तक सीमित नहीं है. मंदिर परिसर में Radha-Krishna समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. सभी देवी-देवताओं की नियमित रूप से अलग-अलग पूजा-अर्चना की जाती है.
श्रद्धालुओं के अनुसार यहां का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहता है. शाम के समय भजन-कीर्तन और आरती पूरे माहौल को भक्तिमय बना देते हैं.
सावन और शिवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
शिवरात्रि और सावन के दौरान मंदिर परिसर में देवघर के बाबाधाम जैसा दृश्य देखने को मिलता है. गंगा नदी नहीं होने के बावजूद श्रद्धालु Saura River से जल लेकर पदयात्रा करते हुए बाबा सिद्धेश्वर नाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.
मंत्रोच्चार के साथ बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है और मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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