डेंगू का कहर : कहीं फिर से कालापानी तो नहीं बनने जा रहा पूर्णिया
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Oct 2019 8:09 AM
पूर्णिया : जहर खाओ न माहुर खाओ, मरना है तो पूर्णिया जाओ. वर्ष 1955 में तत्कालीन मद्रास में आयोजित स्वास्थ्य सेमिनार में कुछ इस अंदाज में पूर्णिया को दुनिया के सामने पेश किया गया. उस वक्त तक मलेरिया के साए में पूर्णिया का जनजीवन था. यही वजह थी कि पूर्णिया को कालापानी कहा जाता था […]
पूर्णिया : जहर खाओ न माहुर खाओ, मरना है तो पूर्णिया जाओ. वर्ष 1955 में तत्कालीन मद्रास में आयोजित स्वास्थ्य सेमिनार में कुछ इस अंदाज में पूर्णिया को दुनिया के सामने पेश किया गया. उस वक्त तक मलेरिया के साए में पूर्णिया का जनजीवन था. यही वजह थी कि पूर्णिया को कालापानी कहा जाता था जहां सेहत को सही सलामत रखने के लिए जद्दोजहद थी. कालांतर में मलेरिया के उन्मूलन के बाद पूर्णिया क्षेत्र में आबादी का विकास हुआ.
- घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें
- अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें
- रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार बदल दें
- पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें
- अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें
- ऐसे कपड़े पहनें, जिससे शरीर का ज्यादा-से-ज्यादा हिस्सा ढका रहे. खासकर बच्चों के लिए यह सावधानी बहुत जरूरी है.
- रात को सोते समय मच्छरदानी लगाएं
- तेज़ बुखार: डेंगू में 102-103 डिग्री तक बुखार आना आम बात है
- बदन टूटना: डेंगू में ज़्यादातर जोड़ों, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है
- जी मिचलाना: यह भी एक लक्षण है. घबराहट महसूस होती है.
- चकत्ते या रैशेस: डेंगू में छोटे लाल चकत्ते या रैशेस हो जाते है. इन रैशेस में कभी कभी खुजली भी होती है.
- आंख के पीछे दर्द: ज्यादातर डेंगू से पीड़ित लोग आंख के पीछे दर्द
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