खोटा तो खोटा खरा सिक्का के चलन पर भी आफत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Sep 2019 6:27 AM
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पूर्णिया : खोटा सिक्का नहीं चलता है यह तो जानते थे पर अब तो बाजार में खरा सिक्का भी नहीं चल रहा. दुकानदार सिक्का लेने में आनाकानी करते हैं और बैंक भी लेने से कतराते हैं. नतीजा यह है कि छोटे-छोटे व्यापारियों का जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है वहीं आमलोगों को रोजमर्रे के सामान […]
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पूर्णिया : खोटा सिक्का नहीं चलता है यह तो जानते थे पर अब तो बाजार में खरा सिक्का भी नहीं चल रहा. दुकानदार सिक्का लेने में आनाकानी करते हैं और बैंक भी लेने से कतराते हैं. नतीजा यह है कि छोटे-छोटे व्यापारियों का जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है वहीं आमलोगों को रोजमर्रे के सामान खरीदने में परेशानी हो रही है.
हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी बैंक भारतीय सिक्के लेने से इंकार नहीं कर सकते. इस आदेश के कारण बैंक प्रबंधन सीधे तौर पर सिक्का लेने से मना तो नहीं करते पर तमाम तरीके की लाचारी बता ग्राहकों को वापस लौटने के लिए मजबूर कर देते हैं.
इधर, बाजार में सिक्के को लेकर आम लोग परेशान पिछले दिनों मधुबनी में सब्जी दुकानदार और ग्राहक के बीच सिक्के को लेकर काफी देर तक नोंकझोंक होती रही. सब्जी वाले का कहना था कि उन्हें ग्राहकों से सिक्का लेने में कोई गुरेज नहीं पर वे जब बाजार में खरीदने जाते हैं तो उनसे कोई सिक्का नहीं लेता. आखिर हम सिक्का कहां खपायेंगे.
सब्जी वाले की मानें तो अधिकांश सब्जी के पास पांच से दस हजार के सिक्के जमा हो गये हैं. उनका कहना है कि बैंक में एकमुश्त सिक्के लिये नहीं जाते इसलिए वहां नहीं जाते. कमोवेश यही हाल पान विक्रेताओं की है. अखबार विक्रेताओं भी इससे कम परेशान नहीं हैं.
कहते हैं अधिकारी
बैंक को सिक्का लेने से कोई परहेज नहीं है. बशर्ते कोई भी ग्राहक एक दिन में अधिकतम एक हजार के सिक्के ही जमा करे. इससे अधिक के सिक्के जमा करवाने के लिए वरीय अधिकारियों से गाइड लाइन लेना जरूरी है.
अमित कुमार, चीफ मैनेजर स्टेट बैंक मेन ब्रांच, पूर्णिया
मंदिरों में जमा सिक्के
शहर के मंदिरों की दान पेटी में जमा हो रहे सिक्कों को लेकर मंदिर प्रबंधक कम परेशान नहीं हैं. पंचमुखी मंदिर के पुजारी पंडित प्रमोद कुमार झा कहते हैं कि बाजार की परेशानी को देखते हुए उन्होंने जमा सिक्के को मंदिर के ही काम में लगाने का फैसला कर लिया है. वे कहते हैं कि जो भी सिक्का जमा होता है उससे मंदिर के सामान आदि अन्य खुदरा कामों मेन खर्च कर देते हैं.
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