पूर्णिया में चमकी बुखार से पीड़ित एक बच्ची की गयी जान, सदर अस्पताल से दो बच्चे रेफर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jun 2019 6:37 AM (IST)
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पूर्णिया : पूर्णिया में चमकी के लक्षण से ग्रसित एक बच्ची की मौत हो गयी, जबकि दो बच्चे को सदर अस्पताल से रेफर किया गया है. मृत बच्ची साजिया (7)अमौर के खाडी बासो गांव के शकी अहमद की बेटी है. सदर अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था. जबकि पूर्णिया पूर्व के बेलौरी लालबाड़ी के […]
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पूर्णिया : पूर्णिया में चमकी के लक्षण से ग्रसित एक बच्ची की मौत हो गयी, जबकि दो बच्चे को सदर अस्पताल से रेफर किया गया है. मृत बच्ची साजिया (7)अमौर के खाडी बासो गांव के शकी अहमद की बेटी है.
सदर अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था. जबकि पूर्णिया पूर्व के बेलौरी लालबाड़ी के प्रमोद दास की 8 वर्षीय बेटी बेटी नैना कुमारी और अररिया जिले के मो तबरेज आलम की 7 वर्षीय पुत्री इजवर परवीन को सदर अस्पताल से रेफर किया गया है. जानकारी के मुताबिक पिछले 48 घंटे में सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में सात ऐसे बच्चों को भर्ती किया गया है जिनमें चमकी के लक्षण पाये गये हैं.
मंगलवार की दोपहर तक केनगर के सबूतर के मो़ राजा के 6 वर्षीय बेटे मो़ इबरार, अररिया के फरौटा के दिलीप ऋषि की 7 वर्षीया बेटी सोनावती, बीकोठी के जयनगर के सुनील कुमार के डेढ़ वर्षीय बेटे आदित्य कुमार, धमदाहा के कोनमा के रोहित ऋषि की दो वर्षीया बेटी पूजा कुमारी का शिशु वार्ड में उपचार चल रहा था. इन सभी बच्चों में बुखार, ऐंठन और चमकी की शिकायत अभिभावकों ने डॉक्टर को बतायी. इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. मधुसूदन प्रसाद ने एक बच्ची की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि मृत बच्ची में चमकी के लक्षण पाये गये थे.
चमकी के लक्षण पर प्राइवेट डॉक्टर भेज रहे सदर अस्पताल
पिछले 8 दिन से बीमार चल रही डेढ़ साल की खुशी कुमारी को मंगलवार को सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती कराया गया. मधेपुरा के रहुआ निवासी खुशी के पिता राहुल कुमार साह ने बताया कि कुछ देर पहले वे एक प्राइवेट डॉक्टर की क्लीनिक पर थे. जब प्राइवेट डॉक्टर जांच कर रहे थे तभी खुशी को चमकी हुई. इसके बाद डॉक्टर ने फौरन खुशी को सदर अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कह दिया. जबकि राहुल साह ने डॉक्टर को यह समझाने की कोशिश की कि पिछले 8 दिन में पहली बार खुशी को चमकी हुई है. बीमार पड़ने से पहले बच्चों ने नहीं खायी लीची .
चमकी के लक्षण के लीची कनेक्शन को लेकर भी बीमार बच्चों के अभिभावकों से पड़ताल की गयी. मगर अभिभावकों ने बीमार पड़ने से पहले बच्चों के लीची के सेवन से इनकार कर दिया. नैना के पिता प्रमोद दास ने बताया कि आम तो खायी थी पर लीची नहीं खायी. मो़ राजा ने बताया कि उसके बेटे मो़ इबरार ने चूड़ा और आम का सेवन किया था. जबकि सोनावती, आदित्य, पूजा के अभिभावकों ने बताया कि वे गरीब लोग हैं. भात-रोटी मिल जाता है, यही बहुत है. आम-लीची बच्चे को कहां से खिलाएंगे.
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