32 करोड़ से ज्यादा भू-लगान बकाया है जिले के भूधारियों पर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Jun 2019 7:00 AM

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पूर्णिया : जिले के 246 पंचायतों के भूधारियों पर 32 करोड़ 48 लाख 40 हजार का बकाया है. बकाये की वसूली के लिए अभियान तेज कर दिये गये हैं. हठी व बड़े बकायेदारों की सूची बनायी जा रही है. सभी सीओ को वसूली के लिए कड़ी हिदायत दी गयी है. यूं तो जिले के सभी […]

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पूर्णिया : जिले के 246 पंचायतों के भूधारियों पर 32 करोड़ 48 लाख 40 हजार का बकाया है. बकाये की वसूली के लिए अभियान तेज कर दिये गये हैं. हठी व बड़े बकायेदारों की सूची बनायी जा रही है. सभी सीओ को वसूली के लिए कड़ी हिदायत दी गयी है. यूं तो जिले के सभी 14 अंचलों में भू-लगान के मद में एक करोड़ से कम बकाया नहीं है. लेकिन इनमें से तीन अंचल ऐसे हैं जहां तीन करोड़ से अधिक का बकाया है.

इन अंचलों में बनमनखी, रूपौली और धमदाहा हैं. धमदाहा के भूधारियों पर तीन करोड़ 49 लाख 2 हजार 970 रुपये, रूपौली में तीन करोड़ आठ लाख 92 हजार 284 रुपये व बनमनखी में सात करोड़ बकाया है. आंकड़े बताते हैं कि सबसे कम बकाया भवानीपुर अंचल में है.
लक्ष्य के विरुद्ध एक फीसदी वसूली : दरअसल, जिले में भू-लगान की वसूली काफी हास्यास्पद हो गयी है. भू-लगान मांग व वसूली संबंधी मई माह के मासिक प्रगति प्रतिवेदन (वित्तीय वर्ष 2019-20) का आंकड़ा बताता है कि डगरूआ में 3.22 फीसदी, केनगर में 3.73 फीसदी, भवानीपुर में 1.15 फीसदी, श्रीनगर में 1.53 फीसदी, बीकोठी में 0.75 फीसदी, कसबा में 1.67 फीसदी, रूपौली में 1.49 फीसदी, धमदाहा में 0.62 फीसदी, जलालगढ़ में 0.43 फीसदी, बैसा में 0.97 फीसदी और अमौर में 1.07 फीसदी वसूली हुई है. दूसरी ओर पूर्णिया पूर्व, बनमनखी व बायसी में राजस्व वसूली का टोटा है. वहां भू-लगान वसूली का प्रतिशत 0.00 फीसदी है. इन तीनों अंचलों के सीओ को कड़ी हिदायत दी गयी है.
अब नहीं दिखते लाल पोथी वाले कर्मचारी : आज से करीब 30-40 साल पूर्व राजस्व कर्मचारी रजिस्टर-टू की लाल पोथी अपने साइकिल की पिछले कैरियर पर बांध कर डोर टू डोर जाते थे और लगान वसूली करते थे. बताया जा रहा है कि पिछले 30 वर्षों में जमाबंदी की संख्या बढ़ कर दस गुनी अधिक हो गयी है और राजस्व कर्मचारियों की संख्या घट कर मात्र 74 रह गयी है. यहां यह भी बताना जरूरी है कि जिले में पहले 251 पंचायत थे. वर्ष 2011 में जिले के पांच पंचायत नगर निगम में शामिल कर दिये गये. इसके बाद 246 पंचायत शेष रह गये.
अभी वर्तमान पंचायतों में कम से कम एक राजस्व कर्मचारी की जरूरत महसूस की जा रही है. लेकिन एक राजस्व कर्मचारी के माथे पर तीन-चार पंचायतों का भार दे दिया गया है. ऐसी स्थिति में राजस्व कर्मचारियों की भी परेशानी काफी बढ़ी हुई है. इसके अलावा इन्हें कई तरह के सरकारी कार्यों में भी लगाया जा रहा है. जिससे भू-लगान वसूली व नामांतरण के कार्य प्रभावित होकर रह गये हैं.
वसूली में दिलचस्पी नहीं ले रहे राजस्व कर्मचारी : ऐसा नहीं कि बकायेदार भूधारी भू-लगान देना नहीं चाहते. उनसे भू लगान वसूली भी नहीं की जा रही है. ऐसे में 32 करोड़ से अधिक का बकाया हो गया है.
दरअसल राजस्व कर्मचारी इस मामले में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. कई जगह नामांतरण को लेकर भी मामला फंसा हुआ है. जिस भी लोगों के पास थोड़ी सी भी जमीन है वे न सिर्फ जमीन का कागजात फ्रेश करना चाहते हैं बल्कि राजस्व अदा कर राजस्व रसीद भी ले लेना उचित समझते हैं.
लेकिन लोगों का काम राजस्व कर्मचारियों व अंचल अधिकारियों के उदासीनता के कारण जस का तस है. राजस्व रसीद के एवज में भी लगातार निश्चित बकाया राशि से अधिक वसूली की बात आती है और लोग इससे विमुख हो रहे हैं. इसके अलावा आपसी बंटवारा पंचनामा का मोटेशन नहीं हो रहा है. इस कारण भी कई बार राजस्व प्रभावित हो रहा है.
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