दिखने लगा तूफान फोनी का असर शनिवार को हो सकता है कड़ा तेवर
Updated at : 04 May 2019 7:52 AM (IST)
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पूर्णिया : पिछले 24 घंटे से उड़ीसा की तरफ से आने वाली तूफान फोनी को लेकर काफी चर्चा है. सोशल मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक टीवी पर भी अभी यही समाचार सुर्खियां बनी हुई हैं. इससे किसानों में थोड़ी बेचैनी जरूर हुई है और आमलोगों के मन में भी एक अनजानी दहशत सा हो गया है. हालांकि […]
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पूर्णिया : पिछले 24 घंटे से उड़ीसा की तरफ से आने वाली तूफान फोनी को लेकर काफी चर्चा है. सोशल मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक टीवी पर भी अभी यही समाचार सुर्खियां बनी हुई हैं. इससे किसानों में थोड़ी बेचैनी जरूर हुई है और आमलोगों के मन में भी एक अनजानी दहशत सा हो गया है.
हालांकि जिस तरीके से लोगों में डर का माहौल बना है वैसी कोई बात नहीं है. पूर्णिया समेत सीमांचल पहले से ही सीबीजोन बना हुआ है. यहां के लोग आंधी-तूफान से पहले से ही अभ्यस्त हैं. यह अलग बात है कि अभी फौनी की चर्चा है तो लोगों को लगता है कि बड़ी बात है.
लेकिन पूर्णिया में करीब साढ़े चार साल पहले फैलिन नामक साइक्लोन आया था. कई लोगों के घर उजड़ गये थे. यहां के लोगों ने उसे भी झेला है. जो भी हो अगर पूर्वानुमान के अनुसार भीषण वर्षा होती है तो किसानों की परेशानी बढ़ेगी. वैसे इस साइक्लोन का असर अब झारखंड और उड़ीसा पर ज्यादा होने की बात बतायी जा रही है.
मक्का-केला के किसान चिंतित. पूरा पूर्णिया समेत सीमांचल मक्का का केंद्र बन गया है. यहां अब बड़े पैमाने पर मक्का की खेती होती है. अभी मक्का कटनी का समय है. अगर वर्षा होगी तो मक्का के किसानों का फसल तैयार करने में काफी विलंब हो जायेगा. एक तो फसल नहीं कट पायेगी उपर से तैयार फसल को सुखाना मुश्किल हो जायेगा. एक बार यदि फसल भींग जायेगा तो उनके फसल की चमक चली जायेगी और बाजार मूल्य भी गिर सकता है.
मक्का के साथ-साथ केला के किसानों की भी चिंता बढ़ी हुई है. उन्हें लगता है कि उनके फसल बर्बाद हो जायेगी. अधिकांश केले की फसल में अभी खांदी आना शुरू है. इस खांदी में किसानों के अरमान हैं. किसानों को लगता है कि अगर वर्षा के साथ आंधी होगी तो केले के पौधे गिर सकते हैं और फसल भी बर्बाद हो सकती है.
फोनी का तेवर पूर्णिया के इलाके में कम होगा. मौसम विभाग के अनुसार इस साइक्लोन का सर्वाधिक असर उड़ीसा एवं झारखंड में होगा. इसके बावजूद सभी प्रखंडों के बीडीओ एवं सीओ को एहतियात बरतने कहा गया है.
मो तारिक इकबाल, अपर समाहर्ता, पूर्णिया
खीरा की बढ़ जायेगी पीड़ा. फोनी-साइक्लोन को लेकर पूर्णिया के खीरा किसानों की भी परेशानी बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए कि साइक्लोन को लेकर खीरा के खेत में खीरा के फूल झड़ जायेंगे. मूंग हो जायेगा चौपट . सीमांचल समेत पूर्णिया में अब अरहर अथवा चना की खेती नहीं होती. यही दोनों दलहन इस इलाके की चर्चित खेती में से थी.
क्या करें, क्या न करें
शांत रहे, घबराएं नहीं व अफवाहों पर ध्यान न दें.
संपर्क क्षेत्र में बने रहने के लिए अपने मोबाइल फोन चार्ज रखें.
अपने जरूरी कागजात व कीमती सामान एक जलरोधक थैले में रखें.
एक आपदा किट अवश्य तैयार करें जिसमें सुरक्षित रहने का आवश्यक सामान हो.
मवेशियों व पशुओं की सुरक्षा के लिए उन्हें बांध कर न रखें.
बिजली का मेन स्वीच व गैस सप्लाई बंद कर दें.
टूटे हुए बिजली के खंभों एवं तारों के नीचे न जायें.
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