शहर में जांच के नाम पर डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शोषण का खेल

Updated at : 22 Aug 2018 4:53 AM (IST)
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शहर में जांच के नाम पर डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शोषण का खेल

पूर्णिया : शहर में जांच के नाम पर डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शोषण का खेल लंबे समय से चल रहा है. डॉक्टरों के शह पर शहर में मानक विहीन अल्ट्रासाउंड सेंटर फल फूल रहे हैं. जहां रोजाना खुलेआम पीएनडीटी एक्ट की धज्जियां उड़ायी जा रही है. शहर में मौजूद रेडियोलॉजिस्ट की तुलना में कई गुणा […]

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पूर्णिया : शहर में जांच के नाम पर डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शोषण का खेल लंबे समय से चल रहा है. डॉक्टरों के शह पर शहर में मानक विहीन अल्ट्रासाउंड सेंटर फल फूल रहे हैं. जहां रोजाना खुलेआम पीएनडीटी एक्ट की धज्जियां उड़ायी जा रही है. शहर में मौजूद रेडियोलॉजिस्ट की तुलना में कई गुणा अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं. जाहिर है कि सभी सेंटर विभागीय सांठ-गांठ से ही संचालित हैं. लाइन बाजार में लगभग पांच दर्जन से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं. शहर में धड़ल्ले से चल रहे पांच दर्जन अल्ट्रासाउंड सेंटर के बारे में जानकार बताते हैं कि शहर में बमुश्किल एक दर्जन भी रेडियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अल्ट्रासाउंड सेंटर कैसे संचालित हो रहा है. स्पष्ट है कि अधिकांश सेंटरों पर जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है.

अल्ट्रासाउंड का धंधा है चोखा: अब सवाल यह है कि बिना रेडियोलॉजिस्ट के मानक विहीन सेंटर का संचालन किस प्रकार हो रहा है. जानकार बताते हैं कि विभागीय सांठ-गांठ से अल्ट्रासाउंड सेंटर आबाद है. इन मानक विहीन सेंटरों पर सड़क छाप तकनीशियनों से काम लिया जाता है. जानकार बताते है कि इन सेंटरों में जो आज तकनीशियन बन कर जांच कर रहे हैं, वे कल तक किसी नर्सिंग होम में कंपाउंडर थे, या फिर किसी अल्ट्रासाउंड सेंटर का पुरजा काटने का काम किया करते थे. दरअसल हर कोई इस धंधे को चोखा मान कर इससे जुड़ना चाहता है.
ऐसे ऐरे-गैरे तकनीशियनों के माध्यम से जांच एवं रिपोर्ट तैयार की जाती है. कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि मरीज की बीमारी कुछ होती है और रिपोर्ट कुछ और दी जाती है. इन्हीं अधकचरे रिपोर्ट पर इलाज शुरू होता है, जो मरीजों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है.
यह है नियम: पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटरों में जांच के समय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, प्रशिक्षित तकनीशियन की मौजूदगी जरूरी है. वहीं शौचालय, निर्धारित दर तालिका, चिकित्सक का नाम व योग्यता बोर्ड, पीसी, पीएनडीटी एक्ट पुस्तिका व जांच कराने की संधारण पंजी होनी भी जरूरी है. जांच के समय एफ फार्म भरा जाना चाहिए,
जिसे प्रत्येक माह की पांच तारीख तक सिविल सर्जन कार्यालय में जमा कराना होता है. उस फार्म में जांच कराने वाले का नाम, पता, उम्र, फोन नंबर, बच्चों की संख्या एवं लिंग नहीं जांच करने का आश्वासन डॉक्टर द्वारा दिया जाता है.
एफ फार्म को निर्धारित तारीख तक जमा नहीं करने पर पीएनडीटी एक्ट के अनुच्छेद के तहत तीन माह की सजा एवं दस हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है.
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