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मुर्दा नहीं, जिंदा लोगों का बना ठिकाना वार्डों में सड़ते हैं मुर्दे

पूर्णिया : आपातकाल स्थिति के मुर्दे या फिर अज्ञात मुर्दे अस्पताल के विभिन्न वार्डों में ही पड़े रहते हैं. मुर्दों पर मक्खियां तो भिनभिनाती ही है. साथ ही मुर्दों के सड़ांध से वहां मौजूद मरीजों व स्वास्थ्य कर्मियों का भी बुरा हाल हो जाता है. ऐसे में जब लाशों से काफी बदबू आने लगती है […]

पूर्णिया : आपातकाल स्थिति के मुर्दे या फिर अज्ञात मुर्दे अस्पताल के विभिन्न वार्डों में ही पड़े रहते हैं. मुर्दों पर मक्खियां तो भिनभिनाती ही है. साथ ही मुर्दों के सड़ांध से वहां मौजूद मरीजों व स्वास्थ्य कर्मियों का भी बुरा हाल हो जाता है. ऐसे में जब लाशों से काफी बदबू आने लगती है तो अस्पताल प्रशासन द्वारा बिना शिनाख्त के अंतिम संस्कार करा दिये जाते हैं. बाद में जब मृतक के परिजन लाश लेने आते है तो उसे निराशा हाथ आती है. इसके कई उदाहरण भी हैं.अस्पताल में मुर्दा को ले कर भागने वाले गिरोह भी सक्रिय हैं. जो आपराधिक मामलों के मृतकों के शव को सहजता से उड़ा ले जाते हैं. जिससे अपराधी बाल बाल बच जाते हैं.

हाइकोर्ट के निर्देश की अनदेखी
वर्ष 2014 में जमुई की फरीदा परवीन की ओर से जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम घर बनाने का निर्देश दिया था. दरअसल श्रीमती परवीन की ओर से बदहाल पोस्टमार्टम घर के बाबत याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया था कि अमानवीय परिस्थिति में शव का पोस्टमार्टम हो रहा है. उसके बाद ही राज्य सरकार की ओर से जिलों में नये पोस्टमार्टम घर व मुर्दा घर बनाने की कवायद शुरू हुई.पूर्णिया में तो न्यायालय के आदेश के आलोक में दोनों भवन बन कर तैयार भी हो चुका है.लेकिन इसका काम में न आना एक नहीं कई सवालों को जन्म दे रहा है.
सार्वजनिक शौचालय निर्माण का रास्ता साफ
तीन करोड़ से बनेंगे 56 शौचालय
शहर में बनने वाले शौचालय की योजना राशि तीन करोड़ की है. जिसमें कुछ यूनिट आठ लाख और कुछ 15 लाख की लागत से बनना है. शौचालय निर्माण का यह प्रोजेक्ट प्रमंडलीय मुख्यालय और स्वस्थ शिक्षा, कारोबार, कोर्ट-कचहरी, व्यापार इत्यादि से जुड़े भीड़ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. जिस कदर शहर में बदलाव हुए हैं और मॉल संस्कृति विकसित हुई है तथा जीवन स्तर बदला है, उस लिहाज से मॉडल शौचालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. जिसको ध्यान में रखकर निगम ने इस योजना बनायी है. इसके लागू होने से स्वच्छता के साथ-साथ स्मार्ट सिटी की स्पर्धा में भी पूर्णिया को शामिल होने के रास्ते खुलेंगे.
3.50 करोड़ के पार्क को हरी झंडी
सूत्रों के मुताबिक गुलाबबाग में अमृत योजना के तहत बनने वाले पार्क निर्माण पर फंसा पेच अब खत्म हो गया है. बल्कि इसकी फाइल विभाग के दफ्तर पहुंच गयी है. अब महज स्वीकृति की मुहर लगनी बाकी है. सूत्र बताते हैं कि अगले चार दिनों तक की छुट्टी की वजह से फिलहाल पार्क से जुड़ी फाइल पर स्वीकृति की मुहर नहीं लगी है. बाकी सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. कार्यालय खुलने के साथ ही पार्क निर्माण की योजना की स्वीकृति पर मुहर लगेगी और साढ़े तीन करोड़ के इस योजना के तहत गुलाबबाग में पार्क निर्माण का रास्ता साफ हो जायेगा.
शहर बनेगा स्वच्छ व सुंदर
शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने को लेकर निगम प्रतिबद्ध है. शौचालय निर्माण की आवश्यकता शहर को वर्षो से थी. प्रमंडलीय मुख्यालय होने की वजह से यहां पड़ोसी जिलों के लाखों लोग आते हैं. मॉडल शौचालय की स्वीकृति मिलते ही शौचालय निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. शहर को समस्याओं से मुक्त कर सुंदर और सुसज्जित करना हमारा उद्देश्य है.
विभा कुमारी, मेयर, नगर निगम, पूर्णिया
Prabhat Khabar Digital Desk
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