पोस्ट कोविड मरीजों को अब हार्मोनल समस्याएं, मित्र बैक्टीरिया के कमजोर होने से बढ़ रही समस्या

Updated at : 11 Aug 2021 12:22 PM (IST)
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पोस्ट कोविड मरीजों को अब हार्मोनल समस्याएं, मित्र बैक्टीरिया के कमजोर होने से बढ़ रही समस्या

कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में इन दिनों हार्मोनल समस्याएं बढ़ गयी हैं. मरीजों में वायरस के हमले से इंसुलिन, कार्टिसोल और थायरॉयड समेत कई हार्मोंस का संतुलन बिगड़ चुका है.

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आनंद तिवारी, पटना. कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में इन दिनों हार्मोनल समस्याएं बढ़ गयी हैं. मरीजों में वायरस के हमले से इंसुलिन, कार्टिसोल और थायरॉयड समेत कई हार्मोंस का संतुलन बिगड़ चुका है. कोरोना को मात दे चुके लोग खासकर डायबिटीज, थायरॉयड और पैरा थायरॉयड, रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटने, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, डायरिया समेत आधा दर्जन रोगों की चपेट में आ रहे हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक इलाज के दौरान मरीजों ने एंटीबायोटिक व स्टेरॉइड दवाओं का खूब इस्तेमाल किया है, जिससे यह समस्या खड़ी हो गयी है. यह खुलासा शहर के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के ओपीडी में आने वाले मरीजों पर किये गये अध्ययन में हुआ है. डॉक्टरों ने पोस्ट कोविड के करीब 250 से अधिक मरीजों के अध्ययन कर संबंधित रोगों का खुलासा किया है. डॉक्टरों के मुताबिक, अब तक ऐसे 735 मरीज आ चुके हैं.

होम आइसोलेशन में हाइ एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल : विशेषज्ञों के मुताबिक, गंभीर स्थिति वाले कोरोना संक्रमितों के इलाज में हाइ ग्रेड एंटीबायोटिक दवाइयों का तो खूब इस्तेमाल हुआ ही, होम आइसोलेशन वालों ने भी इनका सेवन किया. इससे शरीर में रोगों से लड़ने वाले हमारे मित्र बैक्टीरिया पर प्रभाव पड़ा है. जबकि मित्र बैक्टीरिया पाचक एंजाइम के रिसाव और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक होते हैं.

आइजीआइएमएस गैस्ट्रो विभाग के प्रोफेसर डॉ आशीष कुमार झा ने बताया कि शरीर के अंदर रोगों से लड़ने वाले हमारे मित्र बैक्टीरिया के कमजोर होने या उनके मरने से एंटीबायोटिक जनित डायरिया, शरीर में पोषक तत्व के अवशोषण की प्रक्रिया बाधित होने से कुपोषण, इंफ्लामेट्री बॉवल डिजीज और अचानक से मोटापा बढ़ने की समस्याएं हो रही हैं. पैंक्रियाज से इंसुलिन कम होता है.

एड्रिनल से कार्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है. आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि कोविड से उबरने के साथ समय पर समस्याओं को पहचान कर नियमित इलाज से समाधान संभव है. ओपीडी में रोज 10 से 15 मरीज आ रहे हैं, जिन्हें संक्रमण के बाद डायबिटीज, थायरॉइड, बाल झड़ना, पेट की गड़बड़ी समेत हार्मोन से जुड़ी बीमारियां हो गयीं.

Posted by Ashish Jha

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