17 साल की तपस्या, न नौकरी न राजनीति... 1.57 लाख पेड़ लगाकर बिहार के दो भाइयों ने कर दिखाया कमाल
Published by : Vikas Jha Updated At : 05 Jun 2026 4:17 PM
AI जेनरेटेड तस्वीर
World Environment Day: बिहार के अमित और सुमित कुमार ने 17 वर्षों में 1.57 लाख से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है. 'ब्रदर्स ऑफ बिहार' के नाम से प्रसिद्ध दोनों भाइयों की मुहिम अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है. विश्व पर्यावरण दिवस पर उनकी कहानी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है.
Patna News (बिहटा से मोनु कुमार मिश्रा): जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते तापमान और पर्यावरण संकट को लेकर चिंता कर रही है, तब बिहार के दो भाइयों ने अपने कर्म से यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े संगठन से नहीं, बल्कि एक मजबूत संकल्प से होती है. ‘ब्रदर्स ऑफ बिहार’ के नाम से पहचान बनाने वाले अमित कुमार और सुमित कुमार पिछले 17 वर्षों से लगातार वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं. उनकी मेहनत का परिणाम है कि अब तक वे 1 लाख 57 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं.
2008 में शुरू हुई थी हरित यात्रा
अमित और सुमित ने वर्ष 2008 में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधे लगाने की शुरुआत की थी. शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन समय के साथ यह एक जनआंदोलन का रूप लेता गया. दोनों भाइयों ने गांवों, स्कूलों, सरकारी संस्थानों, सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर हजारों पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने का काम किया.
फलदार, छायादार और औषधीय पौधों को दी प्राथमिकता
इनके द्वारा लगाए गए पौधों में आम, अमरूद, नीम, पीपल, बरगद, शीशम और कई औषधीय प्रजातियां शामिल हैं. इन पौधों ने न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाया है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ एक मिशन
दोनों भाइयों का मानना है कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने का काम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है. बढ़ते तापमान, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच उनका अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है.
लोगों की सोच में आया बड़ा बदलाव
अमित और सुमित बताते हैं कि जब उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत की थी, तब बहुत कम लोग इसके महत्व को समझते थे. लेकिन वर्षों तक लगातार किए गए प्रयासों ने लोगों की सोच बदल दी. अब आसपास के गांवों और शहरों में लोग जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों पर पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं.

युवा और महिलाएं भी बन रहे भागीदार
दोनों भाइयों के प्रयासों से प्रेरित होकर अब बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठन वृक्षारोपण अभियान से जुड़ रहे हैं. सामूहिक भागीदारी के कारण यह अभियान लगातार विस्तार पा रहा है और हर साल हजारों नए पौधे लगाए जा रहे हैं.
नहीं रुकेगा अभियान
अमित और सुमित का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है. वे आने वाले वर्षों में इस अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
युवाओं के लिए मिसाल बने दो भाई
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अमित और सुमित कुमार की कहानी यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी मजबूत इच्छाशक्ति होती है. दो भाइयों द्वारा शुरू की गई यह मुहिम आज हजारों लोगों को प्रेरित कर रही है और यह साबित कर रही है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर धरती को हरा-भरा बना सकते हैं.
एक पौधा सिर्फ पेड़ नहीं बनता, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, छांव और जीवन का आधार बनता है. इसी सोच के साथ अमित और सुमित कुमार पिछले 17 वर्षों से हरियाली की अलख जगा रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने में जुटे हैं. World Environment Day
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