Waqf Bill: वक्फ बिल पर सीएम नीतीश ने पीएम मोदी को क्यों दिया समर्थन, मुस्लिम नेताओं ने कर दिया खुलासा

पटना में जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की प्रेस वार्ता
Waqf Bill: सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने वक्फ बिल पर बीजेपी का समर्थन क्यों किया इसे लेकर पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने खुलासा किया है. शनिवार को जेडीयू के मुस्लिम नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी चल रहीं सभी कयासों को दूर किया. प्रेस कांफ्रेंस ने गुलाम गौस और अहमद अशफाक करीम जैसे कई नेता मौजूद रहे.
Waqf Bill: वक्फ बिल (Waqf Bill) के संसद से पारित होने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में उठे विवाद को लेकर पार्टी ने स्थिति साफ कर दी है. जेडीयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने बताया कि वक्फ बिल पर नीतीश कुमार के द्वारा दिए गए पांच सुझावों को मानने के बाद पार्टी ने इसका समर्थन किया. पार्टी के मुस्लिम नेताओं ने शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने पार्टी में बगावत की अफवाहों का खंडन किया.
कौन-कौन नेता रहे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमएलसी गुलाम गौस और पूर्व सांसद अहमद अशफाक करीम जैसे नेता भी मौजूद थे, जिन्होंने पहले वक्फ बिल का विरोध किया था, हालांकि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई बयान नहीं दिया. जेडीयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी और प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हमेशा मुस्लिम समाज के विकास के लिए बड़े कदम उठाए हैं और उनके नेतृत्व में अल्पसंख्यक समाज के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ संशोधन बिल को लेकर उनकी पार्टी ने जो पांच सुझाव दिए थे, उन सभी को स्वीकार कर लिया गया है.
प्रेस कांफ्रेंस बीच में छोड़ गए कुछ नेता
जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के तीन एमएलसी और दो पूर्व सांसद मौजूद रहे, लेकिन किसी ने अपना विचार नहीं रखा. कुछ नेता बीच में ही उठकर चले गए.
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क्या थे जदयू के 5 सुझाव
जदयू ने बीजेपी सरकार को पांच सुझाव दिया था
- जमीन राज्य का मामला है, इस पर कोई छेड़छाड़ न की जाए.
- वक्फ बिल को पूर्व प्रभावी तरीके से यानी पिछली डेट में लागू नहीं किया जाए.
- वक्फ की गैर-पंजीकृत संपत्ति जिस पर कोई दरगाह, ईदगाह, कब्रिस्तान या कोई अन्य धार्मिक भवन बना हुआ है, उससे कोई छेड़छाड़ न की जाए
- वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए डीएम से ऊपर के अधिकारी को अधिकृत किया जाए
- वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा को 6 महीने से बढ़ाया जाए.
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लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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