पटना से गुजरने वाली यह ट्रेन LHB कोच से लैस हुई, अब 17 बोगियों साथ ही चलेगी
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 29 Dec 2025 8:11 PM
सांकेतिक फोटो
Patna Junction: रामबाग से हावड़ा के बीच पटना जंक्शन होकर चलने वाली विभूति एक्सप्रेस अब आधुनिक एलएचबी कोच से लैस हो गई है. सोमवार को एलएचबी कोच के साथ ट्रेन का परिचालन शुरू हुआ. नई रेक से सुरक्षा, आराम और रफ्तार में सुधार हुआ है.
Patna Junction: पटना जंक्शन के रास्ते रामबाग से हावड़ा के बीच में चलने वाली विभूति एक्सप्रेस अब अत्याधुनिक एलएचबी कोच से लैस हो गयी है. सोमवार को 12334 विभूति एक्सप्रेस पटना जंक्शन के रास्ते हावड़ा रवाना हुई, जो एलएचबी से लैस थी. अब यह ट्रेन नियमित रूप से एलएचबी कोच के साथ ही चलेगी. विभूति एक्सप्रेस में अब 19 की जगह 17 कोच ही हैं और सीटों की संख्या भी 50 कम हो गयी है. इसमें स्लीपर के सात, एसी थ्री के तीन, एसी टू के दो और फर्स्ट एसी के एक और जेनरल के चार कोच को शामिल किया गया है.
एसी थ्री और स्लीपर के एक-एक कोच कम
वर्तमान में इसमें एसी थ्री व स्लीपर के एक-एक कोच को कम किया गया है. रेलवे का कहना है कि भविष्य में इसकी संख्या बढ़ा दी जायेगी. एसी थ्री में पहले चार कोचों में 256 यात्री सफर करते थे. अब सिर्फ तीन कोच होंगे, जिनमें कुल 216 सीटें होंगी. यानी 40 सीटों की कमी. हालांकि, सेकेंड एसी में एक कोच में पहले 46 सीटें थीं, जो एलएचबी में बढ़ कर 52 हो गयी हैं.
यहां छह सीटों की वृद्धि हुई है. पहले इस ट्रेन में स्लीपर के आठ कोच थे, जिनमें कुल 576 सीटें मिलती थीं. अब कोचों की संख्या घटा कर सात कर दी गयी है. एलएचबी के एक कोच में 80 सीटें होती हैं, तो अब कुल सीटें 560 होंगी. यानी स्लीपर क्लास में 16 सीटें कम हो गयी हैं. जेनरल कोच की संख्या पहले की तरह चार ही है.
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क्या है खासियत
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने कहा कि एंटी-टेलिस्कोपिक फीचर से लैस यह एलएचबी कोच दुर्घटनाग्रस्त होने पर एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते हैं. ये डिब्बे झटकों को रोक लेते हैं और तेज रफ्तार में भी पटरी पर इनकी पकड़ बेमिसाल रहती है. झटके नहीं लगते और शोर कम होता है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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