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हमलोगों ने बिजली के क्षेत्र में इतना काम कर दिया है कि अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा: नीतीश

Updated at : 01 Nov 2025 1:43 AM (IST)
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हमलोगों ने बिजली के क्षेत्र में इतना काम कर दिया है कि अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा: नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने एक्स हैंडल पर शुक्रवार को लिखा है कि हमलोगों ने बिजली के क्षेत्र में इतना काम कर दिया है कि अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा.

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संवाददाता, पटना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने एक्स हैंडल पर शुक्रवार को लिखा है कि हमलोगों ने बिजली के क्षेत्र में इतना काम कर दिया है कि अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा. अब बिहार का भविष्य रोशनी से भरा है. हमारी सरकार ने बिजली के क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनाकर ‘ऊर्जस्वित बिहार‘ के संकल्प को पूरा किया है. इसे याद रखियेगा. आगे भी हमलोग ऐसे ही काम करते रहेंगे. हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं. राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए हम निरंतर कार्य करते रहेंगे. हमलोगों ने यह भी तय किया है कि अगले तीन वर्षों में सभी घरेलू उपभोक्ताओं से सहमति लेकर उनके घर की छतों पर अथवा नजदीकी सार्वजनिक स्थल पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर लाभ दिया जायेगा.

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है कि हमलोग शुरू से ही उपभोक्ताओं को अनुदानित दर पर बिजली उपलब्ध करा रहे हैं. इसके लिये वर्ष 2024-25 में बिजली उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा 15 हजार 343 करोड़ रुपये का विद्युत अनुदान दिया गया है. इस अनुदान के अतिरिक्त अब तो हमारी सरकार राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही है, जिसका फायदा हर बिहारवासी को मिल रहा है. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध बिजली की आपूर्ति हो रही है. अब राज्य में बिजली की अधिकतम आपूर्ति 700 मेगावाट से बढ़कर आठ हजार मेगावाट से भी अधिक हो गयी है. बिजली उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट से बढ़कर 8 हजार 850 मेगावाट से भी अधिक हो गयी है. प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत 5 गुणा से भी ज्यादा बढ़कर 363 यूनिट हो गयी है. विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 12 गुणा से भी ज्यादा बढ़कर करीब सवा दो करोड़ हो गयी है.

””””””””वर्ष 2005 से पहले पूरा प्रदेश अंधेरे में डूबा रहता था””””””””

अपने एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री ने लिखा है कि आप सभी को पता है वर्ष 2005 से पहले बिहार में बिजली की क्या हालत थी? पूरा प्रदेश अंधेरे में डूबा रहता था। राज्य के गांवों की बात तो दूर, राजधानी पटना में मुश्किल से लोगों को सात से आठ घंटे ही बिजली मिल पाती थी. कभी-कभी रात में बिजली आने पर सोये हुये लोग जल्दी से उठकर पानी का मोटर चलाने के लिये दौड़ पड़ते थे क्योंकि लोगों को यह भरोसा नहीं रहता था कि बिजली फिर कितने घंटे बाद आयेगी. बिजली के खंभों पर जो तार थे, वह भी बेहद जर्जर अवस्था में थे. ट्रांसफार्मर जले रहते थे. राज्य के ग्रामीण इलाकों में नहीं के बराबर बिजली की आपूर्ति होती थी. ऐसे में खंभों पर बिजली की तारों को लोग कपड़े सुखाने के उपयोग में लाते थे. थोड़ी-बहुत बिजली की आपूर्ति होती भी थी, तो इतना कम वोल्टेज होता था कि बल्ब भी ठीक से नहीं जल पाते थे.

700 मेगावाट होती थी बिजली की अधिकतम आपूर्ति

वर्ष 2005 से पहले राज्य में बिजली की अधिकतम आपूर्ति 700 मेगावाट तक होती थी, जबकि राज्य में बिजली का उत्पादन नगण्य था. किसानों के लिए बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी. कृषि कार्य के लिए कोई डेडिकेटेड फीडर नहीं थे. बिजली के अभाव में उद्योग-धंधे दम तोड़ चुके थे एवं राज्य का आर्थिक विकास पूरी तरह थम गया था. वर्ष 2005 में राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत मात्र 75 यूनिट थी तथा उपभोक्ताओं की संख्या मात्र 17 लाख 31 हजार थी. ऐसे में बिजली से सरकार को राजस्व भी बहुत कम मिल पाता था. राज्य में सौर ऊर्जा की भी व्यवस्था नहीं थी तथा राज्यवासी पूरी तरह से लालटेन युग में जीने को मजबूर थे. तत्कालीन सरकार की प्रशासनिक अक्षमता के कारण बिजली की चोरी आम बात थी.

24 नवंबर 2005 को सरकार बनने पर हुआ सुधार

एक्स हैंडल पर उन्होंने लिखा है कि 24 नवंबर 2005 को राज्य में जब हमलोगों की सरकार बनी तो बिजली व्यवस्था में सुधार के संकल्प के साथ अनेक काम किये गये. 15 अगस्त 2012 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के गांधी मैदान में मैंने कहा था कि ‘हम बिजली की स्थिति सुधारेंगे. अगर बिजली की स्थिति में हम सुधार नहीं लायेंगे तो 2015 के चुनाव में मैं वोट मांगने लोगों के बीच नहीं आऊंगा’. इसके लिए 31 अक्टूबर 2012 को तत्कालीन बिहार राज्य विद्युत बोर्ड को समाप्त कर पांच विद्युत कंपनियां बनायीं गयीं तथा बिजली के क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार किये गये. हमारी सरकार ने वर्ष 2015 में ‘हर घर बिजली‘ निश्चय की शुरुआत की. इसके तहत निर्धारित समय के दो माह पूर्व ही अक्टूबर 2018 में सभी इच्छुक घरों को विद्युत कनेक्शन दे दिया गया.

किसानों को मिल रही 55 पैसे प्रति यूनिट बिजली

किसानों के खेत तक सस्ती बिजली पहुंचाने के लिए डेडीकेटेड कृषि फीडर का निर्माण कराया गया है. किसानों को अनुदानित दर पर मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली मिल रही है. कृषि के लिए निःशुल्क बिजली कनेक्शन दिये गये हैं. इसके लिए हमारी सरकार ने वर्ष 2024-25 में चार हजार 395 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है. राज्य के सरकारी एवं निजी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की व्यवस्था की गयी है. सोलर पावर प्लांट लगाये जा रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH RANJAN

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By RAKESH RANJAN

RAKESH RANJAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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