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तेरी कटीली निगाहों ने मारा…

प्रेमचंद रंगशाला में शुक्रवार को ‘जश्न-ए-अदब’ संस्था के सहयोग से कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से ‘कल्चरल कारवां’ का रंगारंग आगाज हुआ. दो दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महोत्सव के पहले दिन देश के विभिन्न विधाओं के प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर पटनाइट्स का दिल जीत लिया. कलाकारों ने गीत, संगीत, नृत्य, वादन और गायन की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी. मालिनी अवस्थी ने जब लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति देना शुरू किया, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग थिकर उठे. कार्यक्रम के दूसरे दिन यानि आज ‘किस्सा-ए-हीर’ की संगीतमय मंचन किया जायेगा.

जब वो जख्मों से दवा बांधता है, दर्द कुछ और मजा बांधता है…

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कल्चरल कारवां. जश्न-ए-अदब संस्था के सहयोग से प्रेमचंद रंगशाला में सजी गीत, गजल व नृत्य की महफिल

– कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ ओर नामचीन कलाकारों ने दी प्रस्तुति

– फरहत अहसास, जावेद मुशीरी, पद्म भूषण पं साजन मिश्रा, पं स्वरांश मिश्रा व मालिनी अवस्थी ने झुमाया

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इंट्रो :

प्रेमचंद रंगशाला में शुक्रवार को ‘जश्न-ए-अदब’ संस्था के सहयोग से कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से ‘कल्चरल कारवां’ का रंगारंग आगाज हुआ. दो दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महोत्सव के पहले दिन देश के विभिन्न विधाओं के प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर पटनाइट्स का दिल जीत लिया. कलाकारों ने गीत, संगीत, नृत्य, वादन और गायन की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी. मालिनी अवस्थी ने जब लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति देना शुरू किया, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग थिकर उठे. कार्यक्रम के दूसरे दिन यानि आज ‘किस्सा-ए-हीर’ की संगीतमय मंचन किया जायेगा.

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लाइफ रिपोर्टर@पटना

कला संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से जश्न-ए-बिहार के तहत कल्चरल कारवां का दो दिवसीय कार्यक्रमों की शुरुआत हुई. इस आयोजन में जश्न-ए-अदब संस्था सहयोग रहा. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जश्न- ए- अदाब के फाउंडर कुंवर रंजीत चौहान ने कहा कि यह दो दिन आप सभी के लिए काफी खास रहेगा. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि यहां पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित कलाकारों को सुनने का मौका मिल रहा है. कला, संस्कृति व युवा विभाग के निदेशक रूबी ने सभी को शुभकामनाएं दी. इस अवसर पर गजलों की महफील में फरहत अहसास, रामायण धर द्विवेदी, कुंवर रंजीत चौहान, गौतम राजऋषि और जावेद मुशीरी ने प्रस्तुति दी.

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प्रस्तुतियों ने बांधा समां, गूंज उठी तालियां

कार्यक्रम की शुरुआत ‘अभी टुक रोते-रोते सो गया है’ के साथ हुई, जो एक रोमांटिक कवि सम्मेलन और मुशायरा है, जो महान शायर ‘मीर तकी मीर’ को उनके जन्म के 300 वर्ष पूरे होने पर समर्पित है. इसमें भारत के कुछ बेहतरीन तथा प्रसिद्ध शायर एवं कवि सम्मिलित रहे. जैसे- फरहत एहसास, अज्म शाकिरी, जावेद मुशीरी, रामायण धर द्विवेदी, गौतम राजऋषि, अश्विनी कुमार चांद, कुंवर रंजीत चौहान, अनस फैजी और शाकिर देहलवी.

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जब वो जख्मों से दवा बांधता है…

इसके बाद जावेद मुशीरी ने ‘जब वो जख्मों से दवा बांधता है, दर्द कुछ और मजा बांधता है’, कुंवर रंजीत चौहान ने ‘दिल ये तो जानता है गुनहगार कौन है आये

जो उसका नाम तो तैयार कौन है‘… और नज्म आखिरी सफर पढ़ा. जब फरहत अहसास ने कहा कि कविता, शेर सुनने वाले दो तरह के होते है पहला सुनकर वाह- वाह करते हैं, जबकि दूसरे खामोश होते हैं और वह खामोश वालों की भी हां होती है. उन्होंने अंदर के हादसों पे किसी की नजर नहीं हम मर चुके हैं और हमें इस की खबर नहीं, मैं बिछड़ों को मिलाने जा रहा हूं चलो दीवार ढाने जा रहा हूं…जैसी शेर और नज्म पढ़े. इस मौके पर अज्म शाकिरी, रामायण धर द्विवेदी, गौतम राजऋषि, अश्विनी कुमार , अनस फैजी ने अपनी कविता और शेर पढ़ा. इसके बाद विधा लाल एवं समूह द्वारा प्रदर्शित कथक नृत्य रक्स – घुंघरू बोल उठे प्रस्तुति दी गयी. शास्त्रीय गायन सुर संध्या में पद्म भूषण पं साजन मिश्रा एवं पं स्वरांश मिश्रा की शास्त्रीय प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया.

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तेरी कटीली निगाहों ने मारा.. गीत सुनते ही दर्शक झुमे

पहले दिन का समापन सुप्रसिद्ध लोक एवं शास्त्रीय गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के कार्यक्रम ‘सुर यामिनी’ के साथ हुआ. अंतिम में प्रतीक्षा खत्म करते हुए लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने जब मंच संभाला, तो दर्शकों ने तालियों से उनका जोरदार स्वागत किया. उन्होंने दर्शकों से मुखातिब होते हुए कहा- मैं शुक्रगुजार हूं कि आप सभी इतना धीरज के साथ मेरा इंतजार कर रहे हैं. पटना जब-जब बुलाया जाता है, मैं दौड़ी चली आती हूं. इसका कारण यहां के लोगों से मिलने वाला प्यार और सम्मान है, जो हर कलाकार की इच्छा होती है. वह यहां आकर पूरी होती है. पहली प्रस्तुति मैं ठुमरी से करूंगी. जिसे काशीबाई ने लिखा है. फिर उन्होंने ‘तेरे कटीली

निगाहों ने मारा’…, ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया हो’…, पूर्वी गीत ‘मोरे राम जोगिनी बनूंगी’… आदि की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी.

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प्रवेश है निःशुल्क, आज होगा कार्यक्रम का समापन

दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में सभी दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क है. दूसरे दिन दर्शक तीव्र गति का उर्दू काव्य खेल ‘बैतबाजी’ से रूबरू होंगे. किस्सा हीर रिस शाह- मनु सिकंदर ढींगरा की मूल कहानी की भी प्रस्तुति होगी. वहीं दर्शक एक दिलचस्प पैनल चर्चा ‘आज के दौर का सिनेमा ओटीटी की शक्ल में’ सुन सकते हैं. इसमें पंचायत वेब सीरीज के प्रसिद्ध अभिनेता फैजल मलिक कुंवर रंजीत चौहान के साथ बातचीत करेंगे. दिन का सर्वोच्च बिंदु कश्मीर के रबाब वादक पद्मश्री उस्ताद गुलफाम अहमद खान का वाद्य प्रदर्शन होगा. गायक चंदन दास की महफिल-ए-गजल दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने का वादा करती है. कार्यक्रम का समापन राजीव सिंह एंड ग्रुप के सूफी गायन से होगा.

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