शराबबंदी फेल या सिस्टम ? तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार से पूछा सवाल- 40 हजार करोड़ की काली कमाई का जिम्मेदार कौन?

Updated at : 06 Apr 2026 3:36 PM (IST)
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Tejashwi Yadav 6 April 2026.

तेजस्वी यादव

Tejashwi Yadav : आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शराबबंदी कानून को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आंकड़ों और तर्कों के जरिए दावा किया है कि यह कानून अपने मूल उद्देश्य में असफल रहा है और इसके पीछे सिस्टम और माफिया के गठजोड़ की भूमिका है.

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Tejashwi Yadav : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर हमला बोलते हुए शराबबंदी को सबसे बड़ा ‘सांस्थानिक भ्रष्टाचार’ करार दिया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है, जिसका सीधा फायदा शराब माफिया और शासन-प्रशासन के नापाक गठजोड़ को मिल रहा है.

10 साल में क्या बदला? तेजस्वी का सीधा सवाल

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि शराबबंदी लागू हुए एक दशक बीत चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई देती है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के बावजूद बिहार में अवैध शराब का नेटवर्क मजबूत हुआ है और एक समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है.

तेजस्वी ने दावा किया कि अब तक 11 लाख से अधिक केस दर्ज हुए और 16 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इसके साथ ही 5 करोड़ लीटर से ज्यादा शराब जब्त की गई है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद हो रही है, तो आखिर इसकी सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है.

गिरफ्तारी गरीबों की, माफिया आजाद

अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून का सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग पर पड़ा है. तेजस्वी के अनुसार, बड़े तस्कर और नेटवर्क से जुड़े लोग अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं, जबकि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हो रही है.

तेजस्वी यादव ने शासन-प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर रोज हजारों लीटर शराब पकड़ी जा रही है, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम के भीतर कहीं न कहीं गड़बड़ी है. उन्होंने सरकार से मांग की कि सिर्फ जब्ती नहीं, बल्कि खपत के वास्तविक आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएं.

58 साल बनाम 10 साल

शराबबंदी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने इतिहास के पन्ने पलटे हैं. उन्होंने बताया कि 2005 तक पूरे बिहार में केवल 3000 शराब की दुकानें थीं, लेकिन 10 वर्षों के भीतर यह संख्या बढ़कर 6000 हो गई.

जिस बिहार में प्रतिवर्ष औसतन 51 दुकानें खुलती थीं, वहां मौजूदा सरकार हर साल 300 दुकानें खुलने लगीं. तेजस्वी का आरोप है कि पहले बिहार सरकार ने हर घर तक शराब पहुंचाई और अब सुधारक बनने का ‘स्वांग’ रच रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार का नया रास्ता खुल सके.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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