CIMP सर्वे में छात्रों ने कहा- फिल्मों और OTT पर नशे के दृश्य डालते हैं गलत असर, सख्त नियमों की मांग

AI द्वारा बनया गया सांकेतिक तस्वीर
ड्रग फ्री इंडिया सर्वे में छात्रों ने फिल्मों और ओटीटी पर नशे के चित्रण पर चिंता जताई है. 86.4% छात्रों का मानना है कि यह युवाओं के व्यवहार को प्रभावित करता है, और उन्होंने सख्त नियमों की मांग की है.
पटना से अमृता सिंह की रिपोर्ट
Patna News: देश को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से किए गए ड्रग फ्री इंडिया सर्वे में फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नशे के चित्रण को लेकर छात्रों ने सख्त नियम बनाने की मांग की है. यह सर्वे सीआईएमपी (CIMP) में किया गया, जिसमें छात्रों ने नशे से जुड़े कंटेंट के सामाजिक प्रभाव पर अपनी राय रखी.
86.4% छात्रों ने बताया व्यवहार पर पड़ता है असर
सीआईएमपी के विजिटिंग प्रोफेसर उत्सव सिंह ने बताया कि 2,799 प्रतिभागियों पर आधारित सर्वे में 86.4 प्रतिशत छात्रों का मानना है कि फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नशे के दृश्य युवाओं और छात्रों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं. वहीं 13.6 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इस बात से असहमति जताई.
नशे वाले दृश्यों पर सख्त नियम की मांग
सर्वे में यह भी पूछा गया कि फिल्मों और ओटीटी पर नशे के दृश्यों को लेकर किस तरह की नीति होनी चाहिए. इस पर 38.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ऐसे दृश्यों के साथ अनिवार्य वैधानिक चेतावनी (Statutory Warning) दिखाने का समर्थन किया.
31.2% ने दृश्य हटाने, 17.9% ने ब्लर करने की दी सलाह
सर्वे के अनुसार 31.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने फिल्मों और ओटीटी से नशे वाले दृश्यों को पूरी तरह हटाने की मांग की. वहीं 17.9 प्रतिशत ने ऐसे दृश्यों को ब्लर करने का सुझाव दिया. जबकि 12.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए किसी भी तरह की नई नीति लागू नहीं करने का समर्थन किया.
नशामुक्त भारत अभियान को मिल सकता है बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सर्वे युवाओं की सोच और समाज पर मीडिया के प्रभाव को समझने में मदद करते हैं. छात्रों की राय भविष्य में नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ी नीतियों और जनजागरूकता कार्यक्रमों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
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