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संपूर्ण क्रांति दिवस पर विशेष : संपूर्ण क्रांति यानी गांव की जनता सरकार

Updated at : 05 Jun 2020 4:57 AM (IST)
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संपूर्ण क्रांति दिवस पर विशेष : संपूर्ण क्रांति यानी गांव की जनता सरकार

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जब जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया, तो इसे मैदान में मौजूद लाखों की भीड़ ही नहीं देश और दुनिया ने भी हाथों हाथ लिया.

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मिथिलेश, पटना : पांच जून, 1974. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जब जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया, तो इसे मैदान में मौजूद लाखों की भीड़ ही नहीं देश और दुनिया ने भी हाथों हाथ लिया. लोकनायक के आह्वान पर मैदान में जमा युवाओं ने जनेऊ तोड़ दिये थे. जेपी के नेतृत्व में सिंहासन खाली करो कि जनता आती है के नारे लिखे करीब 30 लाख कागजात को लेकर आंदोलनकारी एक ट्रक से राजभवन पहुंचे थे. इसके बाद जेपी ने गांधी मैदान में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया.

इस दौरान एक अनोखी घटना हुई. मीसा के तहत बांकीपुर जेल में बंद सुशील मोदी, शिवानंद तिवारी, विक्रम कुंवर आदि तत्कालीन छात्र नेताओं ने जेपी के जुलूस को देखने की मांग की. उनके अनुरोध पर तत्कालीन डीएम वीएस दुबे ने उन लोगों को आयकर दफ्तर के पोर्टिको से उनके देखने की व्यवस्था की. संपूर्ण क्रांति को याद करते हुए जेपी आंदोलन के दिनों में तत्कालीन युवा नेता व अधिकारी से बातचीत के कुछ अंश.

जेपी ने छात्र आंदोलन को जन आंदोलन में बदल दिया: सुशील मोदी

जेपी ने संपूर्ण क्रांति की विचारधारा से छात्र आंदोलन को एक जन आंदोलन में बदल दिया. अपनी बीमारी का इलाज कराने के बाद पहली बार जेपी गांधी मैदान में पांच जून को पहुंचे थे. इलाज के बाद यह उनकी पहली पब्लिक मीटिंग थी, जिसमें उन्होंने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से पूरे आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान किया. अब तक आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा समेत चार बिंदुओं पर चल रहा था, लेकिन, पांच जून को संपूर्ण क्रांति का नारा देकर उन्होंने डाॅ लोहिया के सप्तक्रांति को परिभाषित किया. कोई भी आंदोलन तभी लंबा चलता है, जब इसका वैचारिक आधार हो. यह निर्णायक दिन था. गांधी मैदान पहुंची भीड़ उनकी लोकप्रियता और समर्थन का ही परिणाम था.

भगवान बुद्ध और गांधी के विचारों की तरह है लोकनायक की संपूर्ण क्रांति :वीएस दूबे

जेपी के संपूर्ण क्रांति को नजदीक से देखने और समझने वालों में मैं भी रहा हूं. संपूर्ण क्रांति का विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश, पूरे राष्ट्र, समाज के लिए था. गांधी और भगवान बुद्ध के विचारों की तरह आज भी उसी तरह प्रासंगिक हैं, जितना उन दिनों रहा था. उन दिनों भी संपूर्ण क्रांति के विचारधारा पर कोई सवाल व संदेह नहीं था और आज भी नहीं है. पर, सरकारें बदलती गयी, जेपी के संपूर्ण क्रांति पर कोई अमल नहीं हुआ. संपूर्ण क्रांति का नारा उन्होंने किसी एक चीज के लिए नहीं दिया था, बल्कि राजनीतिक, प्रशासनिक, विधायी और समाज के संपूर्ण बदलाव के लिए दिया था.

उनकी समझ थी कि समाज में चौतरफा जितनी भी खराबी आयी है, इसके लिए जरूरी है सभी संस्थाओं में बदलाव का होना. जेपी ने कहा था चुनाव महंगे होते जा रहे हें, इसके लिए लोग उद्योगपतियों से चंदा लेते हैं. उन्होंने सांसदों- विधायकों को री काल यानी वापस बुलाने का रास्ता सुझाया था. प्रशासनिक हलकों में बदलाव की जरूरत बताते हुए सबों की रिस्पांसबिलिटी निर्धारित करने की बात कही थी. कहा था कि काम नहीं करने वाले सरकारी कर्मी को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए.

गांव में जनता सरकार का दिया था कनसेप्ट : वशिष्ठ

जयप्रकाश नारायण ने समाज के विभिन्न आयामों सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों को समाप्त कर एक संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया था. जेपी समझ रहे थे कि राजनीतिक जमात में भी समाज का नया स्वरूप दिखायी पड़े. पूरी व्यवस्था में आमूल- चूल परिवर्तन ही सभी समस्याओं के समाधान के लिए मूल मंत्र माना था. गांव में जनता सरकार की उन्होंने बात कही थी. यह आज पूरी तरह परिलक्षित हो रहा है. जेपी का मानना था कि संपूर्ण क्रांति के दायरे में गांव भी होगा, जहां वहां के लोग अपनी समस्या का हल खुद निकाल सकेंगे. गांवों में जनता सरकार होने से लोकतंत्र निचले स्तर पर भी मजबूत होगा. जेपी का समाजवादी दायरा रहा था. उन्होंने अमेरिका और रूस को भी करीब से देखा था. 1942 के क्रांतिकारी भी वे रहे थे.

छात्र आंदोलन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई संपूर्ण क्रांति : शिवानंद

जेपी ने कहा था यह संपूर्ण क्रांति है मित्रों. उन दिनों मैं मीसा के तहत गिरफ्तार हो गया था. पांच जून को ही गांधी मैदान में आंदोलन की रूपरेखा तय हो गयी थी. जेपी ने कहा था, यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई मात्र नहीं है,यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है. जेपी की संपूर्ण क्रांति छात्र आंदोलन की टर्निंग प्वाइंट साबित हुई.

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