पीयू : सात माह में भी सेंट्रल लाइब्रेरी का ऑटोमेशन कार्य पूरा नहीं, नयी मशीनें भी हैं बंद

Published by : AMBER MD Updated At : 11 Oct 2025 6:13 PM

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सेंट्रल लाइब्रेरी के आधुनिकीकरण के सात माह बाद भी विद्यार्थी आधुनिक सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित हैं.

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संवाददाता, पटना

पटना यूनिवर्सिटी सेंट्रल लाइब्रेरी को विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हाइटेक बनाया गया था. मगर विद्यार्थी इस हाइटेक लाइब्रेरी का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. सेंट्रल लाइब्रेरी के आधुनिकीकरण के सात माह बाद भी विद्यार्थी आधुनिक सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित हैं. लाइब्रेरी में रखी किताबें इश्यू और जमा करने के लिए लगायी मशीनें उद्घाटन के बाद से ही बंद पड़ी हैं. कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से किताबों की जानकारी प्राप्त करने के लिए तैयार किये सिस्टम भी ठप पड़े हुए हैं. लाइब्रेरी के गेट पर लगायी गयी आरएफआइडी स्कैनर का भी उपयोग नहीं किया जा रहा है. इसके अलावा लाइब्रेरी की 20 प्रतिशत किताबों की बारकोडिंग और ऑटोमेशन कार्य पूरा नहीं हुआ है. विद्यार्थियों की सुविधा के लिए मीडिया लैब में विद्यार्थियों को बैठने की सुविधा नहीं प्रदान की गयी है. इसके अलावा लाइब्रेरी के स्टडी हॉल में लगाये गये कुल आठ एसी भी महीनों से बंद पड़े हैं. इसके अलावा लाइब्रेरी के गेट पर किताबों को जमा करने के लिए ड्रॉप बॉक्स भी महीनों से बंद है. विद्यार्थी चाह कर भी आधुनिक लाइब्रेरी का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.

टूट कर गिर रही फॉल्स सीलिंग

लाइब्रेरी के विभिन्न सेक्शन में लगायी गयी फॉल्स सीलिंग की भी हालत खस्ता हो गयी है. लाइब्रेरी के स्टाफ सेक्शन की फॉल्स सीलिंग भी खराब होने की वजह से झुक गयी है. हाल ही लाइब्रेरी डायरेक्टर कक्ष की सीलिंग का कुछ हिस्सा टूट कर गिर गया था. लाइब्रेरी में रखी किताबों को खोजने के लिए लायी गयी हैंडलर मशीन का भी उपयोग नहीं किया जा रहा है. लाइब्रेरी के ऑटोमेशन कार्य और आधुनिकीकरण के लिए जिस एजेंसी को कार्य सौंपा गया था. उसने कार्य पूरा किये बगैर ही बीच में काम छोड़ दिया है. लाइब्रेरी में जितनी भी मशीनें लगायी गयी हैं, उसे हैंडल करने का राइट भी एजेंसी ने लाइब्रेरी को नहीं सौंपा है. लाइब्रेरियन मिथिलेश सिंह ने बताया कि नये सत्र के विद्यार्थियों की आइडी जेनरेट करने के बाद सभी मशीनें चालू कर दी जायेंगी. ऑटोमेशन और विद्यार्थियों की आइडी जेनरेट करने के लिए एजेंसी से संपर्क किया गया है. अगले माह से बची हुई किताबों का ऑटोमेशन और विद्यार्थियों की फ्रेश आइडी जेनरेट करने का काम शुरू किया जायेगा.

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