शराब-ताड़ी का धंधा छोड़ने वाले 96 हजार से अधिक परिवारों की गरीबी हुई दूर, सरकार की इस योजना से सुधरी स्थिति
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 20 Jan 2025 4:30 AM
फाइल फोटो
Patna News: बिहार में शराब और ताड़ी बंद होने के बाद इन व्यवसायों में जुड़े परिवारों की आजीविका बाधित हो गयी थी. सरकार की ओर से रोजगार के लिए इन्हें ऋण दिया गया, जिससे शराब-ताड़ी का धंधा छोड़ने वाले 96 हजार से अधिक परिवारों की गरीबी दूर गयीी है.
मनोज कुमार/ Patna News. शराब व ताड़ी का धंधा छोड़ने वाले वाले राज्य के 96693 परिवारों की अत्यंत निर्धनता दूर हो गयी है. राज्य सरकार की सतत् जीविकोपार्जन योजना से इन परिवारों की आर्थिक तरक्की हुई है. कटिहार, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सहरसा, दरभंगा, गया, मधेपुरा, नालंदा, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक परिवार निर्धनता से बाहर आये हैं. इनमें एससी-एसटी व अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुक सबसे अधिक हैं. ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, राज्यभर में इस योजना के कुल 2 लाख 1 हजार 218 लाभार्थी हैं. इनमें 1 लाख 83 हजार 084 ग्रामीण और 18 हजार 134 शहरी लाभार्थी हो गये हैं.
ऋण के पैसे से सुधारी अपनी स्थिति
बिहार में शराब और ताड़ी बंद होने के बाद इन व्यवसायों में जुड़े परिवारों की आजीविका बाधित हो गयी थी. सरकार की ओर से रोजगार के लिए इन्हें ऋण दिया गया. ऋण के पैसे से इन परिवार के सदस्यों ने किराना, शृंगार की दुकानें खोलीं. मवेशी व मुर्गीपालन किया. आटा व चक्की मिल चलायी. इससे उनकी तत्काल प्रभावित आजीविका पटरी पर आयी.
2027 के लिए योजना विस्तारित, 30 अरब होंगे खर्च
वर्ष 2018-19 में तीन वर्षों के लिए योजना लागू की गयी थी. अब इस साल इस योजना को 2024-27 तक के लिए विस्तारित कर दी गयी है. इस योजना पर कुल 30 अरब 32 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है. सरकार की ओर से वर्षवार खर्च के लिए राशि आवंटित की जा रही है.
रोजगार के लिए अब दो लाख रुपये मिलेंगे
इस योजना के तहत चिह्नित परिवारों को अब रोजगार के लिए दो लाख रुपये मिलेंगे. पहले ये राशि एक लाख रुपये ही थी. वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं. इस राशि की निकासी और व्यय की भी स्वीकृति दे दी गयी है.
जिला – इतने परिवार गरीबी से बाहर निकले
| अररिया | 2252 |
| अरवल | 1343 |
| औरंगाबाद | 2045 |
| बांका | 1788 |
| बेगूसराय | 2960 |
| भागलपुर | 2377 |
| भोजपुर | 2200 |
| बक्सर | 2022 |
| दरभंगा | 4005 |
| गया | 3955 |
| गोपालगंज | 2082 |
| जमुई | 1168 |
| जहानाबाद | 2043 |
| कैमूर | 1809 |
| कटिहार | 5146 |
| किशनगंज | 1343 |
| लखीसराय | 1081 |
| मधेपुरा | 2473 |
| मधुबनी | 5674 |
| मुंगेर | 2148 |
| मुजफ्फरपुर | 4644 |
| नालंदा | 2534 |
| नवादा | 2315 |
| पश्चिम चंपारण | 1772 |
| पटना | 2453 |
| पूर्वी चंपारण | 2746 |
| पूर्णिया | 2723 |
| रोहतास | 2034 |
| सहरसा | 4833 |
| समस्तीपुर | 3046 |
| सारण | 2530 |
| शेखपुरा | 846 |
| शिवहर | 1394 |
| सीतामढ़ी | 2701 |
| सीवान | 2022 |
| सुपौल | 3338 |
| वैशाली | 3009 |
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By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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