ePaper

New Ad Policy in Patna: अब सीधे निगम से लेना होगा License, मनमानी पर 200 फीसदी तक Penalty; मेट्रो-एयरपोर्ट की कमाई में 25% शेयर

Updated at : 21 Feb 2026 12:11 PM (IST)
विज्ञापन
New Ad Policy in Patna: अब सीधे निगम से लेना होगा License, मनमानी पर 200 फीसदी तक Penalty; मेट्रो-एयरपोर्ट की कमाई में 25% शेयर

New Ad Policy in Patna: पटना नगर निगम ने राजस्व घाटे को रोकने के लिए विज्ञापन (संशोधन) विनियम 2025 पारित किया है. अब एजेंसियों को सीधे निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, वरना 200% तक जुर्माना लगेगा. नई नीति के तहत सड़कों को 4 जोन में बांटा गया है और मेट्रो-एयरपोर्ट विज्ञापन आय में निगम 25% हिस्सा मांगेगा. पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और सड़क सुरक्षा के लिए ट्रैफिक सिग्नल जैसे विज्ञापनों पर रोक लगा दी गई है.

विज्ञापन


New Ad Policy in Patna:
राजधानी में विज्ञापन से होने वाले राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए पटना नगर निगम ने सख्त कदम उठाया है. शुक्रवार को होटल मौर्या में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित निगम पर्षद की विशेष बैठक में साढ़े तीन घंटे की मैराथन चर्चा के बाद पटना नगर निगम विज्ञापन (संशोधन) विनियम प्रारूप 2025 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. हालांकि, अंतिम रूप से विज्ञापन की दरों का निर्धारण अब भी बाकी है. नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी विज्ञापन एजेंसी को पटना नगर निगम क्षेत्र में काम करने के लिए सीधे निगम से निबंधन (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा. इसके बिना किसी भी एजेंसी को शहर में विज्ञापन लगाने का कानूनी अधिकार नहीं मिलेगा.

ये भी पढ़ें: पटना नगर निगम की 10वीं बोर्ड बैठक: 200 करोड़ का Municipal Bond; 375 कचरा वाहन सहित कई प्रस्ताव को मंजूरी

बैठक के दौरान नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने शहर के विज्ञापन तंत्र की जर्जर स्थिति का कच्चा चिट्ठा सामने रखा. उन्होंने बताया कि स्पष्ट विज्ञापन नीति और नियमित वसूली न होने के कारण वर्ष 2014 से अब तक निगम को करीब 840 से 1440 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. अन्य बड़े शहरों की तुलना में पटना में विज्ञापन से होने वाली आय वर्तमान में लगभग शून्य है. इतना ही नहीं, वर्तमान में सक्रिय 54 एजेंसियों पर निगम का 108 करोड़ रुपये बकाया है, जिन्हें भुगतान के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है.बौठक में स्पष्ट किया गया कि अवैध विज्ञापनों के पुराने कुचक्र को तोड़ने और निगम की आय बढ़ाने के लिए ही यह नया विनियम लाया गया है.

ये भी पढ़ें: नए विद्युत शवदाहगृह में Online Slot Booking, सभी घाटों पर तय शुल्क में ही करेंगे Dom Raja अंतिम संस्कार; लकड़ी के लिए देना होगा इतना शुल्क

60 से 70 रुपये प्रति वर्ग फुट हो विज्ञापन की दर

नई नीति के अनुसार, अब पटना की सड़कों को चार मुख्य जोन में बांटा जाएगा. इसका उद्देश्य विज्ञापन बाजार में कुछ चुनिंदा एजेंसियों के मॉनोपोली को खत्म करना है. दरों के निर्धारण पर पार्षदों ने सुझाव दिया कि सरकार ने 10 रुपये प्रति वर्ग फीट की जो दर तय की है, वह न्यूनतम है. पार्षद आशीष कुमार सिन्हा ने सुझाव दिया कि पटना की क्षमता को देखते हुए विज्ञापन की दर 60 से 70 रुपये प्रति वर्ग फीट होनी चाहिए, जिससे निगम को बेहतर राजस्व मिल सके. उन्होंने सशक्त स्थायी समिति पर आरोप लगाते हुए कहा कि समिति ने विनियम प्रपत्र पर काम ही नहीं किया है. पटना नगर निगम को दर निर्धारण में कंजूसी नहीं करनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: दीघा गोलंबर के पास बनेगा 55 हजार वर्ग फुट में वेंडिंग जोन, JP Ganga Path गंगा पथ के दुकानदार होंगे शिफ्ट; FOB, पार्किंग सहित मिलेंगी कई सुविधाएं

उल्लंघन करने पर 200 फीसदी तक लगेगा जुर्माना

विज्ञापन माफिया और मनमानी करने वाली एजेंसियों पर लगाम कसने के लिए जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है. यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर विज्ञापन के उच्चतम मूल्य के 200 प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा. इसके अलावा, अवैध होर्डिंग्स पर भी कड़ी कार्रवाई होगी. पूर्व उपमहापौर विनय कुमार पप्पू ने अवैध होर्डिंग्स पर जनप्रतिनिधियों के चेहरे दिखने पर सवाल उठाए, जबकि पार्षद सतीश गुप्ता ने मांग की कि रेलवे की तर्ज पर पटना मेट्रो और एयरपोर्ट से होने वाली विज्ञापन आय में भी निगम की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए.

पारदर्शिता के लिए पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

भ्रष्टाचार और बिचौलियों को खत्म करने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है. विज्ञापन एजेंसियों को तीन साल के लिए केंद्रीकृत लाइसेंस लेना होगा, जिसके लिए निबंधन शुल्क 1.50 लाख रुपये और नवीकरण शुल्क 60 हजार रुपये तय किया गया है. आवेदन से लेकर इ-टेंडर, दस्तावेज सत्यापन और भुगतान तक के सभी चरण इ-प्रोक पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप में पूरे किए जाएंगे. निगम का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से केवल लाइसेंस शुल्क के रूप में ही सालाना 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी.

ये भी पढ़ें: राजधानी में 24 नए स्वचालित Traffic Signal लगेंगे, E-Toilet फिर से होंगे शुरू

सड़क सुरक्षा और सौंदर्य का भी रखा गया ध्यान

नई नियमावली में केवल राजस्व ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. ट्रैफिक सिग्नल जैसे रंग या आकृतियों वाले विज्ञापनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि वाहन चालकों का ध्यान न भटके. इसके अलावा, रात 12 बजे के बाद एलइडी विज्ञापनों की रोशनी कम करना अनिवार्य होगा. अत्यधिक चमकदार और आंखों को चुभने वाले फ्लैशिंग विज्ञापनों पर भी रोक रहेगी. विज्ञापनों को केवल चार श्रेणियों में बड़े होर्डिंग्स, सार्वजनिक स्थल जैसे पार्क व बस शेल्टर, वाहन आधारित विज्ञापन और स्वयं के प्रतिष्ठान के साइन बोर्ड तक सीमित रखा गया है.

विकास में खर्च होगी विज्ञापन से हुई कमाई

मेयर सीता साहू ने बैठक के अंत में कहा कि यह नई विज्ञापन नीति पटना के आंतरिक राजस्व को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी. विज्ञापन से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग शहर की नागरिक सुविधाओं जैसे सड़कों की मरम्मत, स्वच्छता अभियान, स्ट्रीट लाइट और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में किया जाएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इस पारदर्शी व्यवस्था से पटना न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होगा, बल्कि होर्डिंग्स के मकड़जाल से मुक्त होकर सुंदर भी दिखेगा. इस विशेष बैठक में उपमहापौर, सभी सशक्त स्थायी समिति के सदस्य और पार्षद उपस्थित रहे.

ये भी पढ़ें: 10 माह में हटाना है 13 लाख टन Legacy Waste, लेकिन RDF उठान बनी सबसे बड़ी चुनौती

विज्ञापन
हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन