चाइल्ड आर्टिस्ट से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर, लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को मिलेगा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार
Published by : Karuna Tiwari Updated At : 11 Jun 2026 12:02 PM
लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव
Patna News: बिहार की लोकसंगीत परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है. संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान उन्हें भोजपुरी लोकसंगीत के संरक्षण और संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा.
Patna News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट)
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकसंगीत जगत के लिए गौरव की खबर है. भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी ने प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बिहार की प्रख्यात लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को वर्ष 2025 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है. नई दिल्ली में 22 से 26 मार्च 2026 तक आयोजित सामान्य परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से देशभर के 106 युवा कलाकारों का चयन किया गया, जिसमें मनीषा श्रीवास्तव ने बिहार का मान बढ़ाया है.
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार और गौरवपूर्ण क्षण है. उन्होंने इस सम्मान को केवल अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि भोजपुरी लोकसंगीत और उससे जुड़े लाखों श्रोताओं की सामूहिक उपलब्धि बताया.
दादाजी की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर
मूल रूप से रोहतास जिले की रहने वाली मनीषा श्रीवास्तव के घर में बचपन से ही लोकसंगीत का माहौल रहा. छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान उनके दादाजी ने उन्हें संगीत की राह दिखाई. इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट भोजपुरी लोकगीतों की दुनिया में कदम रखा. एक ओर उन्होंने अपने चाचा की प्रेरणा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, वहीं दूसरी ओर संगीत के प्रति समर्पण बनाए रखते हुए प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से विधिवत संगीत शिक्षा भी प्राप्त की.
फूहड़ता से दूरी, लोकसंस्कृति को दी प्राथमिकता
मनीषा श्रीवास्तव ने व्यावसायिक संगीत कंपनियों के तड़क-भड़क और फूहड़ कंटेंट से दूरी बनाकर पारंपरिक लोकसंगीत को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना. उन्होंने स्वतंत्र रूप से भोजपुरी संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित करने का कार्य किया.
उनके द्वारा गाए गए बटोहिया, कजरी, सोहर, चैता और पारंपरिक विवाह गीतों को श्रोताओं ने काफी सराहा है. इसके अलावा कृषि विभाग के सहयोग से प्रस्तुत मिलेट्स (श्रीधान्यम्) पर आधारित गीत तथा वीर कुंवर सिंह पर गाया गया ‘ऐसन न जवानी देखनी’ भी काफी लोकप्रिय रहा है.
लोकसंगीत की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
बिहार में लोकगायिकी की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए मनीषा ने कहा कि वे भोजपुरी लोकसंगीत की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेंगी. उनका मानना है कि लोकसंगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है.
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार युवा कलाकारों को कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाने वाला देश का प्रतिष्ठित सम्मान है. यह पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है और इसका उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना है.
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By Karuna Tiwari
करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.
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