1.31 करोड़ का था जुर्माना और 3 साल की जेल, हाईकोर्ट ने एक झटके में खत्म की सजा
पटना हाईकोर्ट
Patna High Court: पटना हाई कोर्ट ने 1.31 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी के एक मामले में सजायाफ्ता आरोपी को बरी कर दिया है. जज शैलेंद्र सिंह की बेंच ने गया की निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि शिकायत करने वाला पक्ष आरोपी के खिलाफ केस साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है.
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक के बिजली चोरी मामले में बड़ी राहत देते हुए एक सजायाफ्ता व्यक्ति को बरी कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में शिकायत करने वाला पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा. न्यायमूर्ति शैलेन्द्र सिंह की एकल पीठ ने मो. मकसूद आलम की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने गया के स्पेशल बिजली कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें अपील करने वाले को दोषी ठहराया गया था.
मामला क्या था
स्पेशल कोर्ट ने मो. मकसूद आलम को बिजली अधिनियम की धारा 135(1) के तहत दोषी मानते हुए तीन साल की कठोर कैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि जुर्माना नहीं दिया गया तो चार महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी. अदालत ने यह भी माना था कि बिजली चोरी के कारण बिजली विभाग को एक करोड़ 31 लाख 33 हजार 664 रुपये का नुकसान हुआ है.
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हाईकोर्ट में चुनौती दी थी
इस फैसले को मो. मकसूद आलम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच की और पाया कि जांच और साक्ष्य दोनों ही बेहद कमजोर हैं. कोर्ट ने कहा कि इस केस में जांच अधिकारी की गवाही तक नहीं कराई गई. यहां तक कि छापेमारी के समय जांच अधिकारी मौके पर मौजूद भी नहीं था. केवल एक व्यक्ति अनिल पांडेय के बयान के आधार पर अपील करने वाले को आरोपी बना दिया गया था.
बाद में जांच के दौरान अनिल पांडेय को निर्दोष मानते हुए उसका नाम ट्रायल के लिए भेजा ही नहीं गया. कोर्ट ने यह भी पाया कि जिस परिसर की बात की जा रही है, वहां बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण पहले ही बिजली कनेक्शन काट दिया गया था.
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत करने वाला पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा. इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए मो. मकसूद आलम को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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