नीतीश की यात्राएं-13 : विकास यात्रा में भ्रष्टाचार पर प्रहार की बनी रणनीति, ऑन स्पॉट होने लगा फैसला

Updated at : 20 Jan 2025 6:04 PM (IST)
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Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर प्रदेश की यात्रा पर हैं. 2005 में नवंबर महीने में मुख्यमंत्री बनने के पूर्व वे जुलाई महीने में न्याय यात्रा पर निकले थे. विकास यात्रा उनकी दूसरी यात्रा थी. नीतीश कुमार की अब तक 15 से अधिक यात्राएं हो चुकी हैं. आइये पढ़ते हैं इन यात्राओं के उद्देश्य और परिणाम के बारे में प्रभात खबर पटना के राजनीतिक संपादक मिथिलेश कुमार की खास रिपोर्ट की 13वीं कड़ी..

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Nitish Kumar Yatra: मुख्यमंत्री 2010 में जब विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद दोबारा प्रदेश की बागडोर संभाली तो भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जब्ती संबंधी कानून बनाने का एतिहासिक निर्णय लिया था. यह अनुभव विकास यात्रा से ही मिला था. 2010 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए. इसमें मुख्यमंत्री की पार्टी जदयू को अपार बहुमत मिला. सहयोगी भाजपा भी विधायकों से मालामाल हो गयी. जदयू के 115 और भाजपा के 91 विधायक चुनाव जीत कर आये. अगली सरकार बनी तो मुख्यमंत्री ने दो बड़े ही लोकप्रिय और एतिहासिक फैसले लिये. पहला यह कि उन्होंने विधायक फंड को समाप्त कर दिया. दूसरा भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जब्ती के लिए नया कानून बनाया.

भ्रष्टाचारियों के मकान में स्कूल खोलने का एलान

इस कानून के तहत भ्रष्ट तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त कर उसमें स्कूल खोले जाने का प्रावधान किया गया.
मुख्यमंत्री के इस फैसले का बड़ा ही प्रभाव पड़ा. राष्ट्रीय स्तर के साथ ही दूसरे राज्यों में इसकी चर्चा हुई. एक पत्रकार के रूप में मैं यह देखता हूं कि मुख्यमंत्री ने जो भी फैसले लिये उसके पीछे विकास यात्रा में उन्हें भ्रष्टाचार से संबंधित कई शिकायतों का मिलना था. उन्होंने इसे जड़-मूल से समाप्ति तथा अफसरों में भ्रष्टाचार को लेकर डर पैदा हो, इसके लिए कानून का प्रावधान किया. मुख्यमंत्री का मधुबनी जिले के धकजरी में ठहरने का कार्यक्रम था. वहां बड़ा-सा टेंट लगाया गया था. मुख्यमंत्री पहुंचे तो वहां स्थानीय लोगों की भीड़ पहले से जमा थी. जिले के पत्रकारों की टोली भी मौजूद थी.

भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ मुहिम

हम सीएम के साथ-साथ पूरी यात्रा में चल रहे थे. अपने सामान को गाड़ी में ही छोड़ मुख्यमंत्री के टेंट में हम भी प्रवेश किये. मुझे देख कर मुख्यमंत्री मुस्कुराये और बगल में बैठने को कहा. करीब घंटे भर वहां औपचारिक बातें हुई.
धकजरी में मुख्यमंत्री ने अगले दिन कहा कि हम जनता के लिए किये गये कार्य को देखने निकले हैं. समस्याएं भी देखनी है. जो भी बातें आयी हैं, हम उसे ठीक करेंगे. मुख्यमंत्री ने बताया कि बैंक कर्ज में गड़बड़ी, शिक्षक नियुक्ति में धांधली की बातें लोगों ने बतायी है. हम वादा करते हैं कि भ्रष्टाचार को समाप्त करेंगे. मधुबनी की सभा में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जिस अनुमंडल में डिग्री कॉलेज नहीं होंगे, वहां सरकार अपने खर्चे से कॉलेज खोलेगी.

जब मधबनी के धकजरी में बीडीओ हुए ऑन स्पॉट सस्पेंड

धकजरी में जनता दरबार लगा तो लोगों की भारी भीड़ पहुंच गयी. हर कोई मुख्यमंत्री के हाथों में अपनी समस्याएं देना चाहता था. इंदिरा आवास और अंत्योदय योजना में गड़बड़ी की कई शिकायतें मुख्यमंत्री के हाथों में पड़ी. मुख्यमंत्री ने डीएम की ओर इशारा किया. डीएम ने स्थानीय बीडीओ प्रखंड विकास पदाधिकारी को पुकारा. तीन बार माइक से उनका नाम पुकारा गया. बीडीओ थे राम नारायण प्रसाद. वह मौके पर नहीं उपस्थित हो पाये. मुख्यमंत्री ने डीएम से कहा, इन्हें तत्काल सस्पेंड करिये और बीडीओ सस्पेंड हो गये. शिक्षा विभाग की भी कई गड़बड़ियां आयी, साथ चल रहे बिहार शिक्षा परियोजना के निदेशक राजेश भूषण को तत्काल कार्रवाई करने को कहा.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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