ePaper

बियाडा की नयी नीति हुई घोषित, बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी

Updated at : 20 Aug 2025 12:46 AM (IST)
विज्ञापन
बियाडा की नयी नीति हुई घोषित, बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने बियाडा एमनेस्टी पॉलिसी 2025 जारी की है.

विज्ञापन

संवाददाता, पटना

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने बियाडा एमनेस्टी पॉलिसी 2025 जारी की है. यह नीति उन सभी आवंटियों के लिए लागू होगी जो स्वेच्छा से इसमें सम्मिलित होकर निर्धारित लाभ प्राप्त करना चाहते हैं. यह नीति 31 दिसम्बर, 2025 तक प्रभावी रहेगी.

इस प्रक्रिया में आवेदक को पहले आवेदन प्रस्तुत करना होगा. जिस पर तीन कार्य दिवस में प्रारंभिक स्वीकृति दी जायेगी. औपचारिकताएं पूरी करने पर सात कार्य दिवस में अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाएगी. जिन औद्योगिक इकाइयों के भूखंड पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित नहीं हुए हैं. वे इस योजना का लाभ ले सकेंगी. एमनेस्टी पॉलिसी के अंतर्गत उद्योग वर्ग के अनुसार उत्पादन आरंभ करने की समय सीमा निर्धारित की गई है. बेहद छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयों को 9 माह में ट्रायल करना होगा. 12 माह में वाणिज्यिक उत्पादन करना होगा. लघु इकाइयों को 12 माह में ट्रायल और 18 माह में वाणिज्यिक उत्पादन आरंभ करना होगा.

मध्यम व बड़ी यूनिट का 18 माह में ट्रायल जरूरी

मध्यम और बड़ी इकाइयों को 18 माह में ट्रायल और 24 माह में वाणिज्यिक उत्पादन अनिवार्य होगा. इकाई को भू खण्ड दर का एक प्रतिशत प्रशासनिक शुल्क देना होगा. कार्यरत इकाई के मामले में विशेष ट्रांसफर शुल्क दस प्रतिशत तथा गैर-कार्यरत इकाई के मामले में 15 % लागू होगा. उत्पाद परिवर्तन की स्थिति में माइक्रो और लघु इकाइयों से 5 हजार रुपये तथा मध्यमम और बड़ी इकाइयों से 20 हजार रुपये लिए जाएंगे. आवेदन शुल्क क्रमशः 5 हजार रुपये और 10 हजार रुपये निर्धारित है. इसके अतिरिक्त आवेदक को भूखंड दर का 5 % बैंक गारंटी देनी होगी, जिसकी वैधता 24 माह होगी. आवेदक इकाई को तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें जीएसटी रिटर्न, बिजली बिल और आयकर रिटर्न जैसे प्रमाण शामिल होंगे. यदि शर्तों का पालन नहीं किया गया तो बियाडा को आवंटित भूखण्ड का कब्ज़ा लेने व उसे पुनः तृतीय पक्ष को आवंटित करने का अधिकार होगा.

हाल में कई यूनिट आंशिक कार्यरत मिलीं

बियाडा के अनुसार हाल के वर्षों में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयां आंशिक या न्यूनतम रूप से कार्यरत पायी गयी. निरीक्षण के बाद इन इकाइयों को नोटिस दिये गये. उनके संतोषजनक उत्तर नहीं मिले. उनके भूखण्ड आवंटन रद्द कर दिए गए. इसकी वजह से बड़ी संख्या में अपीलें प्राधिकरण के समक्ष तथा याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल हो गयीं. इससे राज्य में औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई. उद्योग संगठनों एवं निवेशकों से चर्चा के बाद यह सुझाव प्राप्त हुआ कि रद्द इकाइयों को अंतिम अवसर प्रदान करने के लिए एक सशक्त एमनेस्टी नीति लायी जाये. इसी की वजह से यह पॉलिसी लायी गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RAKESH RANJAN

लेखक के बारे में

By RAKESH RANJAN

RAKESH RANJAN is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन