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Makar Sankranti 2025: 19 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें इस दिन का विशेष महत्त्व

Updated at : 13 Jan 2025 4:28 PM (IST)
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Makar Sankranti 2025

Makar Sankranti 2025

Makar Sankranti 2025: इस साल की मकर संक्रांति बेहद खास है. मकर संक्रांति तीन साल बाद 14 जनवरी को पड़ने जा रही है. इस बार 19 साल बाद दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिसमें मांगलिक कार्य शुरू करने से मनचाहा फल मिल सकता है.

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Makar Sankranti 2025: स्नान-दान का पर्व मकर संक्रांति तीन साल बाद 14 जनवरी मंगलवार को मनाया जायेगा. इसके लिए घर-घर में तैयारी हो चुकी है. एक तरफ जहां गृहिणियां घरों में मिट्टी के हांडी में दही जमा रखी हैं और गुड़ की लाई से लेकर तिलपट्टी तक खुद से बना रखी हैं. वहीं पटना के बाजारों में भी देर रात तक लोगों ने तिलकुट, लाई, बादाम पट्टी व तिल से बनी कई तरह की मिठाइयों से लेकर दही-चूड़ा और गुड़ की खरीदारी की. पटना के गली-मोहल्लों से लेकर बाजार में कई जगहों पर मौसमी दुकानें खोली गयी हैं, जहां तिलकुट की सोंधी खुशबू लोगों को दूर से ही आकर्षित कर रही है. तिलकुट से लेकर चूड़ा-दही की दुकानों के साथ ही सुधा काउंटरों पर खरीदारों की भीड़ रही.

19 वर्ष बाद दुर्लभ भौम-पुष्य योग में मनेगी मकर संक्रांति

ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन 19 साल बाद भौम-पुष्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन सुबह 10:41 बजे से भौम-पुष्य योग शुरू हो जायेगा, जो पूरे दिन रहेगा. यह योग मंगलवार के दिन पुष्य नक्षत्र के विद्यमान होने से बनता है. पुष्य नक्षत्र विकास, शुभता, धन-समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का प्रतिनिधित्व करता है.

3 साल बाद 14 को होगा संक्रांति का पर्व

सनातन धर्मावलंबियों का खास पर्व मकर संक्रांति तीन साल बाद 14 जनवरी को मनाया जायेगा. इस दिन माघ कृष्ण प्रतिपदा से युक्त पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग बन रहा है. मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. इस दिन स्नान-दान करने से उसका सौ गुना पुण्य फल प्राप्त होता है. इसी दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास समाप्त हो जायेगा. इसके बाद मांगलिक कार्य का सिलसिला शुरु हो जायेगा. सूर्य 14 जनवरी को दोपहर बाद 02:55 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसका पुण्यकाल पूरे दिन रहेगा.

संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

संक्रांति का पुण्यकाल: सूर्योदय से लेकर पूरे दिन
सूर्य का राशि परिवर्तन: शाम 02:55 बजे
चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 09:19 बजे से दोपहर 01:19 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:37 बजे से 12:20 बजे तक
शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 02:39 बजे से शाम 03:59 बजे तक

पतंग उड़ाने की अनोखी परंपरा

तमिल के तन्दनान रामायण के अनुसार मकर संक्रांति के पतंग उड़ाने की अनोखी परंपरा त्रेता युग से ही चली आ रही है. गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकांड में भी मिलता है.

75 लाख लीटर दूध और 2 हजार टन बिकेगा दही

मकर संक्राति को लेकर पटना डेयरी प्रोजेक्ट और अन्य ब्रांडेड कंपनियों ने दूध और दही को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है. कारोबारियों की मानें तो लगभग 75 लाख लीटर दूध और 2 हजार टन दही बिकने का अनुमान है. मौसम बदलने के कारण दही और दूध की मांग अच्छा रहने की उम्मीद है. पटना डेयरी प्रोजेक्ट सुधा बुथ के साथ 12 जनवरी को टैंकर के जरिये दूध उपलब्ध कराया गया. सोमवार को भी टैंकर के जरिये दूध उपलब्ध कराया जायेगा. टैंकर के जरिये भी दूध बोरिंग रोड चौराहा, राजवंशी नगर हनुमान मंदिर के पास, जगदेव पथ,पीरबहोर थाना, दिनकर गोलंबर नाला रोड, गायघाट पुल के नीचे भी दूध मिलेगा.

इस बार पटना में मकर संक्रांति के मौके पर 35 लाख लीटर दूध की सप्लाइ की जायेगी. इसी तरह दही 950 मैट्रिक टन सप्लाइ किया जायेगा. पटना डेयरी प्रोजेक्ट इस बार 18 मैट्रिक टन तिलकुट तैयार किया है. खोवा तिलकुट 250 रुपये (500 ग्राम) और सादा तिलकुट 150 रुपये (400 ग्राम) कीमत में उपलब्ध है. इसके अलावा अन्य ब्रांडेड कंपनियों का दूध और दही बाजार में उपलब्ध है. कारोबारियों की मानें तो लगभग 75 लाख लीटर दूध और 2 हजार टन दही बिकने का अनुमान है.

गुड़ और खोवा तिलकुट लोगों की पहली पसंद

मार्केट में बादाम चिक्की, तिलकुट, लड्डू, गजक आदि उपलब्ध है. लेकिन, डिमांड सबसे अधिक गुड़ के तिलकुट का है. लोग इस साल खोवा तिलकुट की भी खरीदारी रहे हैं. खोवा तिलकुट 400 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहे हैं. वहीं, बादाम चिक्की 200 रुपये, गुड़ तिलकुट 350 से 400, चीनी तिलकुट 300 से 400, सफेद तिल पापड़ी व काला तिल पापड़ी 300- 400 रुपये किलो किलो बिक रही है.

लेटेस्ट रेट रुपया प्रति किलो

गुड़ तिलकुट – 350- 400
चीनी तिलकुट – 300- 400
सुगर फ्री तिलकुट – 400- 600
खोवा तिलकुट – 400- 600
तिल पापड़ी – 300- 400
लाल तिल पापड़ी – 300- 400
मस्का – 100- 150
तिल लड्डू – 400
तीसी-मेथी लड्डू – 400
रेबड़ी- 350-450
बादाम पट्टी – 250-350
करतनी चूड़ा – 80 – 100
बासमती चूड़ा- 110 -120
मोटा चूड़ा- 40- 50
भुरा – 60
गुड़ – 60
सफेद तिल – 250
काला – 300
मुड़ी लाई – 140-160
चूड़ा लाई – 140- 160

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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