फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पड़ी भारी, बिहार के इस जिले में 38 CSC संचालकों की मान्यता रद्द

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 12 Feb 2026 3:12 PM

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सांकेतिक फोटो

Farmer Registry: मधेपुरा में फार्मर रजिस्ट्री अभियान में सहयोग नहीं करने पर 38 सीएससी संचालकों की मान्यता रद्द कर दी गई है. प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है. यह अभियान किसानों के रजिस्ट्रेशन के लिए चलाया गया था, ताकि उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ बिना किसी दिक्कत के मिल सके.

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Farmer Registry: मधेपुरा जिले में किसानों के लिए चलाई जा रही फार्मर रजिस्ट्री योजना में लापरवाही बरतने वाले 38 कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. इन संचालकों पर किसान रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए गए स्पेशल कैंप में सहयोग नहीं करने का आरोप है. जिला प्रशासन ने इसे सरकारी काम में उदासीनता और किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ मानते हुए इन सभी 38 केंद्रों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है.

डीएम ने इस वजह से लिया एक्शन

प्रशासन के आदेश में बताया गया कि यह कार्रवाई कुमारखंड, चौसा, आलमनगर, मुरलीगंज और सदर प्रखंड समेत अन्य ब्लॉक में की गई है. सरकार की प्राथमिकता थी कि इस अभियान के जरिए अधिक से अधिक किसानों का डेटाबेस तैयार किया जाए ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा मिल सके. लेकिन इन संचालकों की गैर-मौजूदगी और काम में ढिलाई की वजह से रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य प्रभावित हुआ. इस वजह से डीएम ने एक्शन लिया.

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इन संचालकों पर गाज

रद्द किए गए संचालकों मो. तनवीर आलम, राजा कुमार, प्रियंका कुमारी और ओंकार नाथ शर्मा सहित कुल 38 नाम शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि सीएससी संचालकों की भूमिका जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होती है. ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से न केवल सरकारी काम में रुकावट आई, बल्कि किसानों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

इस सख्त कदम के जरिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भविष्य में भी अगर कोई संचालक सरकारी योजनाओं के जमीन पर उतारने में लापरवाही दिखाएगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. फार्मर रजिस्ट्री जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए प्रशासन अब नए सिरे से व्यवस्था बनाने पर जोर दे रहा है. अधिकारियों ने कहा है कि किसानों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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