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कोसी का मेची से माखनपुर में होगा संगम, केंद्र के बाद अब बिहार सरकार ने भी दिया पैसा

Updated at : 25 Jun 2025 9:32 AM (IST)
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Kosi Mechi Link

Kosi Mechi Link

Kosi Mechi Link: बिहार में कोसी नदी और महानंदा नदी की सहायक नदी मेची को मिलाया जाएगा. कोसी-मेची नदी जोड़ परियोजना बिहार की पहली और देश की दूसरी नदी जोड़ योजना है. इससे बिहार में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा. सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और कृषि उत्पादन में सुधार होगा.

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Kosi Mechi Link: पटना. करीब दो दशक बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का ड्रीम प्रोजेक्ट कोसी मेची लिंक परियोजना जमीन पर उतरने जा रही है. इस परियोजना के तहत कोसी का मेची से माखनपुर में संगम होगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति यानी सीसीईए के बाद बिहार राज्य परिषद ने भी कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना के लिए राशि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस योजना के लिए 3652 करोड़ रुपए से अधिक केंद्रीय सहायता मिलेगी, बाकी राशि बिहार सरकार दे रही है. इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 6282.32 करोड रुपए है. इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

बिहार के इन आठ जिलों को होगा बंपर फायदा

कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त जल को महानंदा बेसिन तक पहुंचा जायेगा. इसके तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर का पुनर्निर्माण होगा. इस नहर की लंबाई 41.30 किमी से बढ़ाकर 117.50 किमी तक विस्तारित किया जाना है, ताकि कोसी और मेची नदियों को जोड़ा जा सके. इससे बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को लाभ मिलेगा. कोसी-मेची लिंक परियोजना बिहार के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है. इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार और मधुबनी सहित आठ से अधिक जिले के लोगों को बाढ़ से राहत मिलेगी. वहीं, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जिले में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी.

कई नहरों में पानी का होगा वितरण

यह परियोजना कोसी बराज से मेची नदी तक लंबी होगी. इसके तहत वीरपुर से फारबिसगंज तक पहुंची मुख्य पूर्वी नहर का किशनगंज के मेची नदी तक विस्तार होगा. इसमें फारबिसगंज तक मुख्य पूर्वी नहर 41.3 किमी बना हुआ है. यहां से इसी नहर का मेची नदी तक 76.2 किमी विस्तारीकरण होगा. वर्ष 1962 में बने नहर का डिजाइन डिस्चार्ज फिलहाल 425 क्यूमेक(घनमीटर) है, जिसको बढ़ाकर 573 क्यूमेक किया जाना है. इस पूरी नहर परियोजना से सिंचाई के लिए चार ब्रांच कैनाल (शाखा नहर) और छह डिस्ट्रीब्यूटरी कैनाल (वितरणी नहर) होगा.

सहरसा प्रमंडल में बनेगा सबसे लंबा कैनाल

ब्रांच कैनाल (शाखा नहर) एक की लंबाई सबसे अधिक 116 किमी है, जो सहरसा प्रमंडल में आएगा. ब्रांच कैनाल दो कटिहार डिवीजन में है, जिसकी लंबाई 65 किमी. वहीं, अररिया प्रमंडल में कैनाल तीन 18 किमी और कैनाल चार 30 किमी लंबी होगी. इसी तरह 6 डिस्ट्रीब्यूटरी कैनाल (वितरणी नहर) में अररिया जिले के बथनाहा प्रमंडल में पड़ने वाले एक की लंबाई 10 किमी, दो की लंबाई 05 किमी, कटिहार प्रमंडल में तीन की लंबाई पांच और चार की सात किमी, अररिया प्रमंडल का डिस्ट्रीब्यूटरी कैनाल पांच की 11 किमी और छह की 10 किमी लंबाई होगी.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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